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पिस्टल पर उलझी गुत्थी, कैसे पहुंची जेल

Thu, 20 May 2021 11:46 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 20 May 2021 11:46 PM IST
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Confusion on pistol, how reached jail
जेल में खूनी खेल- फाइल नंबर-3
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पिस्टल पर उलझी गुत्थी, कैसे पहुंची जेल
:- न्यायिक व मानवाधिकार आयोग की जांच में भी पिस्टल मुख्य बिंदू
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। जिला जेल में हुए खूनी खेल मामले में सबके लिए यही सवाल अहम हो रहा है कि जेल के लिए कडी सुरक्षा की बडी बडी बातें करने के बावजूद विदेशी पिस्टल आखिर कैसे पहुंची। इतना ही नहीं पिस्टल लेकर हत्यारोपी शार्पशूटर सुबह से बैरक के बाहर हंगामा करता रहा लेकिन किसी ने उसे रोकने का प्रयास नहीं किया। सभी जांच करने वाले अधिकारियों का यह तो मानना है कि यह विदेशी पिस्टल है जो सामान्य लोगों के पास जल्दी नहीं मिलती है लेकिन यह जेल कैसे पहुंची इसकी गुत्थी उलझी है। सूत्रों के अनुसार छह दिन की जांच में डीआईजी जेल इस गुत्थी को सुलझाने के काफी करीब पहुंच चुके हैं और प्रथम रिपोर्ट शासन को पहुंचाने लखनऊ रवाना हुए हैं।
जेल में दो कुख्यात अपराधियों मुकीम काला व मेराजी अली की गोलीमार हत्या के बाद हत्यारोपी अपराधी अंशू दीक्षित के ढेर होने के बाद जो हथियार वहां से बरामद हुआ वह सबके लिए पहेली बन गया है। काले रंग की विदेशी पिस्टल से अंशू ने 15 दनादन फायर किए थे। एक अतिरिक्त मैग्जीन भी उसके पास होने का दावा किया गया है। जेल परिसर के अंदर बैरक के आमने सामने के सीसीटीवी कैमरे लगभग दो माह से खराब होने की जानकारी इन अपराधियाें को थी तभी इतनी आसानी से पूरा काम हो गया। इस पिस्टल के बारे में कहा जा रहा है कि इटली, टर्की या आस्ट्रेलिया की बनी हो सकती है। यह बिहार के मुंगेर की ओर से आई है। इसका प्रयोग नामी अपराधियों ने किया है। इस मामले की न्यायिक जांच के साथ मानवाधिकार आयोग भी जांच कर रहा है। शासन प्रशासन की टीमें अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। सभी के लिए पिस्टल व मैग्जीन का जेल की बैरक तक पहुंचना एक पहेली बना है।
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बंदीरक्षकों के साथ ही डयूटी पर रहने वाले पुलिसकर्मियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। इसमें एक अन्य प्रमुख बंदियों के कारखास बंदी से भी गहन पूछताछ की जारही है। बंदीरक्षक जगमोहन का बागपत शूटआउट और फिर चित्रकूट में भी मौजूदगी, अंशू का नाम लेकर बार बार आत्मसमर्पण के लिए कहना, कुछ बंदीरक्षकों की डयूटी एक दिन पूर्व ही इस बैरक के पास से हटाना, 13 मई की रात को जेल टीम द्वारा पहले से खराब सीसीटीवी कैमरों की जांच कर बंदियों की तलाशी करना फिर 14 मई की सुबह यह दुर्दांत कांड होने में पिस्टल ही प्रमुख है। इसे लेकर अभी तक कयासों पर ही जांच चल रही है। इस संबध में पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल ने बताया कि डीआईजी जेल पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। उनकी रिपोर्ट आने के बाद सही जानकारी होगी।
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