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चित्रकूटः जल संरक्षण के लिए तालाब वरदान साहित हो रहे

Sun, 21 Jun 2020 10:30 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2020 10:30 PM IST
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Chitrakoot: ponds are boon literature for water conservation
फोटो-1- व 1 आर- अमरउजाला फेसबुक लाइव कार्यक्रम में दर्शकों के सवाल का जवाब देते चित्रकूट निवासी पर्? - फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट। बुंदेलखंड के किसानों को कृषि विशेषज्ञों का साथ और सलाह दिलाने के लिए ‘अमर उजाला‘ ने एक और पहल की है। रविवार को फेसबुक लाइव के जरिये जल संरक्षण और प्रबंधन के उपाय को लेकर पर्यावरणविद् गुंजन मिश्रा (चित्रकूट) ने जल संरक्षण के उपाय बताए। जल संरक्षण के लिए तालाब को सबसे अच्छा और उपयोगी बताया। कहा कि कम खर्च में गांव में ही तालाबों के निर्माण होने से जल संचय के साथ ही खेतों की सिंचाई और अच्छी जलवायु के लिए यह वरदान साबित हो रहे है। उन्होंने कहा कि बांधों के स्थान पर तालाबों का ही निर्माण किया जाए, जिससे ज्यादा से ज्यादा बारिश के पानी का संचय हो सके। बुंदेलखंड खासकर चित्रकूट का पाठा क्षेत्र और महोबा में हर साल पानी की समस्या भीषण होती है। पाठा क्षेत्र में आज भी महिलाएं कई किलोमीटर दूर चोहड़ों से पानी लातीं हैं।
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प्राकृतिक जलस्रोतों को बचाए रखने के लिए सबसे अच्छा उपाय क्या है? मोहित द्विवेदी हमीरपुर
--तालाबाें का संरक्षण, यदि तालाब में पानी भरा रहेगा तो प्राकृतिक जलस्रोत भी बने रहेंगे।
घर की छतों से बारिश का पानी कैसे संचय किया जा सकता है? राहुल मिश्रा बांदा
पाइप के मध्यम से रेन हार्वेस्टिंग जैसे उपाय अपनाकर पानी का संचय किया जा सकता है।
: बारिश का पानी पीने योग्य होता है कि नहीं? आरिफ अहमद अंसारी हमीरपुर
-बारिश का पानी पीने योग्य नहीं रहता है। जीवंत स्रोत कुआं, झरने और साफ तालाब का ही पानी पीना चाहिए।
: केन-बेतवा लिंक परियोजना से पानी के संरक्षण के लिए क्या फायदा मिलेगा? संजय सिंह झांसी
-केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत सरकार की योजना है। इसमें बहुत लागत लगेगी। पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बांध और नहर का निर्माण होगा। इससे पर्यावरण का नुकसान है। साथ ही यह योजना लाभदायक नहीं है। इस योजना में लगभग 28 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यदि इतनी ही धनराशि से तालाब बुंदेलखंड क्षेत्र में बनाए जाएं तो प्रत्येक गांव में सौ से अधिक तालाब का निर्माण हो सकता है।
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: तालाब बनाने के लिए इनलेट व आउटलेट के बारे जानकारी दे? स्वतंत्र तिवारी- बांदा
- भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार ही तालाब बनाएं। कृषि कार्य के लिए छोटे तालाब ही बनाएं। बडे़ तालाब बनाने से खेतों की मिट्टी में क्षार बढ़ जाती है। यह समस्या बुंदेलखंड क्षेत्र में अधिक है।
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: तालाब योजना को सफल बनाने के लिए क्या करना चाहिए? प्रेम सिंह बांदा
-तालाब योजना सफल हो रही है। किसान अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। जरूरत है कि सभी गांवों में किसानों को जागरूक किया जाए ताकि अधिक से अधिक किसान अपने खेतों मेें तालाब बना सकें।
इसके अलावा अमर उजाला की फेसबुक ऑनलाइन चर्चा में बुंदेलखंड के किसान संतोष सिंह भदौरिया, अनिल पासवान, महेंद्र मिश्र, शैलेंद्र सिंह बुंदेला, आशीष चौहान, पंकज शर्मा, साधना सैनी, जितेंद्र देव दुबे, राजेश सिंह, अर्चना अग्रवाल, पंकज बागवान, रज्जन मिश्रा, जुगनू खान, नवल डागा, सुनील मिश्रा, मुनीर खान, कुलदीप सिंह खंडेलवाल, सुधांशु शेखर, हरिबाबू पासवान, ने भी जल संरक्षण व प्रबंधन के अलावा पर्यावरण संबंधी सवाल पूछे।

सुखी जीव जहां नीर अगाधा...
पर्यावरण विशेषज्ञ गुंजन मिश्रा ने बताया कि किसान ही तालाब, पशुपालन, देशी बीज के माध्यम से प्राकृतिक चक्र को संतुलित रख सकता है। इसकी जरूरत आज पूरे विश्व को है। जल की समृद्धि का यही एकमात्र तरीका है। बुंदेलखंड के विषय में यहीं कहा जा सकता है कि सुखी जीव जहां नीर अगाधा...क्याेंकि मनुष्य का प्रारब्ध भविष्य पानी ही है।
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