फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chitrakoot News ›   chitrakoot news

खबरें लातीं, अखबार छपवातीं, घर घर बेचतीं और खुद ही पढ़कर सुनातीं

Wed, 09 Feb 2022 11:03 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 09 Feb 2022 11:03 PM IST
विज्ञापन
chitrakoot news
खबर लहरिया टीम के साथ चित्रकूट में बाहर से आए प्रतिनिधियों की ग्रुपिंग फोटो। संवाद - फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े क्षेत्र से दुनिया के सबसे बड़े पुरस्कार आस्कर में नामित होने तक का ‘खबर लहरिया’ अखबार का सफर पथरीली जमीन पर चलने से कहीं अधिक कठिन रहा। खबर लहरिया की संस्थापक सदस्य मीरा जाटव और नाजनीन बताती हैं कि जब वे बुंदेली में महिलाओं से पूछती हैं कि ‘का बहिनी कसत हौ, का होई गा हव’, का चहती हो... तो उनसे आत्मीयता और सम्मान मिलता है। 20 साल पहले जब ये अखबार शुरू किया गया था जब दबी, कुचली, शोषित महिलाएं ही खबरें लातीं, अखबार छपवातीं और फिर घर घर बेचतीं। बिना पढ़े लिखे लोगों को पढ़कर भी सुनाती थीं। शुरू में जिले में ढाई हजार प्रतियां घरों और दुकानों पर जाकर बेचती थीं। दो रुपये के मूल्य वाले साप्ताहिक अखबार में बेचने वाली महिला को 50 पैसे कमीशन मिलता था। अपनी भाषा में अखबार में छपी बातें सुनकर लोग खुलकर अपनी समस्याएं भी बताने लगे। अखबार प्रयागराज के भार्गव प्रेस में छपवाया जाता था। हालांकि अखबार को विज्ञापन नहीं मिलता था।
विज्ञापन

भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में 31 मई 2002 को बुंदेली अखबार ‘खबर लहरिया’ को सात महिलाओं ने मिलकर शुरू किया। इनका उद्देश्य महिलाओं को जागरूक करना और हिंसा के खिलाफ आवाज उठाना था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी यह शुरुआत एक दिन आस्कर तक पहुंच जाएगी। संस्थापक की सदस्य शालिनी और मीरा ने बताया कि वह दिल्ली की निरंतर संस्था में काम करती थीं। महिला समाख्या नामक संस्था का निरंतर सहयोग मिला। महिलाओं के उत्पीड़न और शिक्षा के लिए समाख्या ने जिले में 10 वर्ष तक काम किया। इसी में एक महिला डाकिया नामक पत्र निकाला जाता था। इसमें संस्थान की कर्मचारियों की ओर से किए कार्य और परेशान महिलाओं के आने वाले पत्रों का प्रकाशन कर गांव में वितरण किया जाता था। पत्र को अधिकारियों तक पहुंचाकर समस्याओं का समाधान भी कराया जाता था। 1998 में महिला डाकिया का प्रकाशन बंद हो गया।
विज्ञापन

महिला समाख्या के संचालन में भी अड़चनें आने लगीं तो ‘निरंतर’ संस्था के सहयोग से 31 मई 2002 को खबर लहरिया नामक संस्था का रजिस्ट्रेशन कराकर अखबार निकालने लगीं। महिला डाकिया जैसा ही यह अखबार भी था। इसमें शालिनी, मीरा के अलावा कविता, नाजनीन, शांति, अवधेश, कृष्णा और नेहा भी शामिल थीं। इसे यूपी-एमपी के पूरे बुंदेलखंड जिले में वितरण का लक्ष्य बनाया गया। लोग मोबाइल और टीवी की ओर भागने लगे तो संस्थान की फंडिंग में परेशानी हुई। तब निर्णय लिया कि अखबार का प्रकाशन बंद कर खुद भी डिजिटल दुनिया में उतरेंगी। अब पूरा संस्थान डिजिटल हो चुका है। खबर लहरिया का पोर्टल है। इसका यूपी एमपी के बुंदेलखंड के अलावा वाराणसी में संचालन है। बिहार में भी इसे लांच कर दिया गया है। संस्था का मुख्यालय दिल्ली में है और 40 महिलाओं की टीम है।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे होती फंडिंग
महिलाओं की इस संस्था को फंडिंग करने के लिए निरंतर संस्था लगातार काम कर रही है। हर संघर्ष में कार्यरत महिलाओं के साथ कंधा मिलाकर सहयोग करती है। संस्था की संस्थापक सदस्य मीरा जाटव ने बताया कि पहले टाटा ग्रुप उन्हें फंडिंग करता था। अब इस समय मुंबई का दसरा फाउंडेशन फंडिंग करता है। कई बार फिल्मी कलाकारों आमिर खान, शाहरुख खान, जॉन इब्राहिम, विद्या बालन ने संस्था के कर्मचारियों का हौसला बढ़ाया। कौन बनेगा करोड़पति के सेट पर भी संस्था की कर्मचारी पहुंच चुकी हैं।
सिर्फ महिला कर्मचारी
संस्था का सारा कार्य महिलाएं ही करती हैं। इसमें दलित वर्ग, आदिवासी, अल्पसंख्यक वर्ग की कक्षा आठ पास महिला को प्राथमिकता दी जाती है। अन्य वर्ग की महिलाओं को तभी नौकरी दी जाती है, जब यह साबित हो जाता है कि वह समाज या परिवार के उत्पीड़न का शिकार है। उसे पेट परिवार पालने के लिए आर्थिक मदद की जरूरत है।

समाज भी देता था ताना
संस्थान में कार्य करने वाली महिलाओं का कहना है कि समाज से लेकर परिवार तक में ताने सुनने को मिलते थे, लेकिन हौसला नहीं टूटा। परिवार को पालने के लिए हर कदम पर संघर्ष किया। अब सफलता मिलने पर ताने देने वाले लोग सम्मान से ही मिलते हैं।

चित्रकूट : समाचार संकलन के बाद संपादन और अखबार देखती लहरिया की टीम।

चित्रकूट : समाचार संकलन के बाद संपादन और अखबार देखती लहरिया की टीम।- फोटो : CHITRAKOOT

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed