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धनतेरस पर बाजारों में बरसेगा धन
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
Updated Fri, 28 Oct 2016 12:37 AM IST
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मुख्यालय के रेलवे क्रासिंग के पास सराफा दुकान में खरीददारी करती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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चित्रकूट। धनतेरस के लिए शहर का सराफा बाजार तैयार हो गया है। कारोबारियों ने ग्राहकों के लिए सोने और चांदी के बने एक से बढ़कर एक आइटम पेश किए हैं। दुकानों, शोरूमों को सजाया गया है। इस बार पुराने चांदी के सिक्कों के अलावा भारी चांदी के बर्तनों की मांग ज्यादा है। दुकानदार भी शुक्रवार को पड़ रहे धनतेरस पर्व पर अच्छी बिक्री की संभावना जता रहे हैं।
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धनतेरस से लेकर दीपावली पर्व में सभी घरों में भगवान गणेश-लक्ष्मी की तो पूजा होती ही है इसके साथ ही इस पर्व मेें धनतेरस के दिन सोने, चांदी के जेवर व बर्तन खरीदने की परंपरा है। मध्य वर्ग से लेकर उच्च वर्ग सोने चांदी के जेवरात खासकर सिक्के और चांदी के भगवान गणेश-लक्ष्मी खरीदकर पूजन करते हैं। कारोबारियों की मानें तो सोने- चांदी के जेवर यहीं के कारीगरों से बनवाएं हैं। जबकि चांदी के बने गणेश, लक्ष्मी और बर्तन बाहर से मंगवाए हैं।
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बनारसी ज्वलैर्स के राजू अग्रवाल, अग्रवाल ज्वैलर्स के अतुल अग्रवाल , मां रजनी ज्वैलर्स के हीरा लाल सोनी, सूरज ज्वैलर्स के राम विशाल सोनी ने बताया कि दीवाली का पर्व पर सोने-चांदी की अच्छी मांग है। गणेश-लक्ष्मी केे अलावा चांदी के बर्तन ब्रिकी के लिए मंगाए गए हैं। गणेश लक्ष्मी के सिक्के भी बिक्री के लिए हैं। बताया कि दीपावली नजदीक आते ही चांदी के भाव कुछ बढ़ गए हैं। तीन दिन पहले 42 हजार एक सौ रुपये प्रतिकिलो वाली चांदी के दाम अब 42 हजार 600 रुपये प्रति किलो हो गई है।
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दुकानदारों ने बताया कि अंग्रेजों के शासन काल के जमाने का विक्टोरिया रानी के बने चित्र के चांदी के सिक्के की सबसे अधिक मांग रहती है। एक तोले का चांदी का सिक्का की कीमत 800 रुपये से शुरू है। इसके अलावा गिफ्ट में देने वाले सिक्के भी बाजार में हैं। जिनकी कीमत कम होती है।
आयुर्वेद के जन्मदाता भगवान धनवंतरी की पूजा धनतेरस में उसी तरह होती है जिस तरह दीवाली के दिन भगवान गणेश-लक्ष्मी की होती है। आयुर्वेद इलाज करने वाले डाक्टर व आयुर्वेद को बढ़ावा देने वाले ट्रस्टों में पूजन की तैयारियां जोरों पर हैं। धर्म नगरी के पहाड़ों में तमाम जड़ी बूटियां होने के कारण सूदूर क्षेत्र से आयुर्वेद व वैद्य का जमावड़ा धनतेरेस के दिन होगा। डा. विष्णुदत्त बुधौलिया ने बताया कि आयुर्वेद की विशेषता यह है मन, आत्मा, शरीर, और इंद्रियों से युक्त जीवन को स्वस्थ रखता है।
आयुर्वेद चिकित्सा का मूल सिद्धांत पंच महाभूत, तीन शारीरिक दोष वात, पित्त, कफ। तीन मानसिक गुण रज, सत, मन, सप्त धातुओं रस, रक्त, मांस, मेद, अग्नि का महत्व है। भारत देश में आयुर्वेद का बड़ा महत्व था। आज भी वही परम्परा चल आ रही है। अधिकतर लोगों को आयुर्वेद की दवाओं व बताएं गये सिद्घांतों में विश्वास आज भी है।
जिससे प्रत्येक वर्ष धनतेस पर्व में भगवान धनवंतरी की पूजा धूमधाम से की जाती है। डा. मदन गोपल वाजपेयी ने बताया कि भगवान धनवंतरी आयुर्वेद के जन्मदाता हैं। जिससे प्रत्येक वर्ष उनकी पूजा पाठ की जाती है। आज आयुर्वेद की आवश्यकता है। आज के परिवेश में शारीरिक और मानसिक रोग बढ़ते जा रहे हैं। इस लिए धनतेरस में विभिन्न स्थानों से आने वाले आयुर्वेद डाक्टर व वैद्य इस समस्या को खत्म करने लिए विचार गोष्ठी सूरज कुंड रोड़ स्थित आयुष ग्राम ट्रस्ट के परिसर में करेंगे।