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आग में सब राख, दाने-दाने को मोहताज
चित्रकूट
Updated Wed, 12 Apr 2017 11:43 PM IST
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खुले आसमान के नीचे डेरा जमाए ग्रामीण
- फोटो : amarujala
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राजापुर (चित्रकूट)। भीषण आग का वो मंजर याद करते ही पीड़ितों की आंखें नम हो जाती हैं। उनकी आंखों के सामने ही टूटे व जले पड़े घरों की ओर निहारते हुए पीड़ित कहते हैं कि शासन प्रशासन की सहायता से पेट तो भर रहा है लेकिन क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती। कुदरत के इस कहर से तो अब कुदरत ही बचा सकता है।
चार बेटियों की शादियां तय हैं जिनको लेकर असमंजस की स्थिति बनी है। खासकर बच्चों व महिलाओं की हालत खराब है। खुले आसमान के नीचे धूल व धूप के बीच भोजन करते इन पीड़ितों के स्वास्थ्य की किसी को चिंता नहीं है। आग से झुलसे आधा दर्जन ग्रामीण इलाज को भटक रहे हैं।
तहसील क्षेत्र के गड़ौली गांव में सोमवार की दोपहर को अचानक आग लगने से सवा सौ घर धू-धूकर जल गए। दो दिन बाद प्रभावित परिवार के सदस्य दिनरात खुले आसमान के नीचे डेरा जमाए हैं। आग से बची कुछ सामग्री को ग्रामीण ऐसे सहेजते हैं जैसे मानों वह उनकी पूंजी है। काफी देर तक जले घर को देखने के बाद उसे बनाने का कुछ प्रयास करते हैं।
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प्रशासन ने जो पन्नियां दी हैं उसे टूटी दीवार में लगाकर रहने का प्रयास करते हैं लेकिन अभी भी आग की तपन ऐसी महसूस होती है कि सभी पेड़ की छांव में ही भागकर जाते हैं।
आग बुझाते समय गांव के अवधेश, रामनरेश, किरहा, मुन्नी व भगवानदीन आदि झुलस गए थे।
आग के धुएं से कई बच्चे बीमार हो गए हैं। जिनका कोई पुरसाहाल नहीं है। एसडीएम दुर्गेश मिश्रा ने बताया कि मंगलवार को तो स्वास्थ्य विभाग की टीम आई थी सभी का इलाज भी किया गया है लेकिन ग्रामीणों के अनुसार बुधवार को कोई नहीं आया। जिससे कुछ बच्चों की आंखों में जलन व आग से झुलसे ग्रामीणों का इलाज नहीं हो सका।
शादी की तारीख बढ़ाने की कवायद
चित्रकूट। अग्निकांड वाले घरों में चार लड़कियों की शादी तय हो चुकी है। जिसके लिए तैयारियां की जा रही थी। संगीता पुत्री कमलेश,रानी पुत्री तुलसी, बिट्टी पुत्री मइयादीन, उत्त्तरा पुत्री रामऔतार ने दु:खी भाव से बताया कि उनकी शादी के पहले घर का यह नजारा देखकर लगता है कि पहले नया घर बना लें फिर शादी करें।
परिजनों का कहना है कि अब लड़कों वालों पर भी निर्भर है कि वह उसी तारीख में शादी करेंगे या अगली तारीख बताएंगे।
---इनसेट
चित्रकूट। जिलाधिकारी मोनिका रानी ने एसडीएम दुर्गेश मिश्रा को निर्देश दिए सूची में कोई व्यक्ति छूटने न पाए। अभी 122 परिवार को कपड़े, बर्तन व भोजन के लिए 14 हजार से लेकर साढे़े चार हजार तक के राहत चेक बांटे जा चुके हैं। जिला बेसिक शिक्षा विभाग उठा रहा है।
वहीं दूसरी ओर घटना वाले दिन से लेकर तीसरे दिन बुधवार को दोनों पहर का भोजन गांव के विद्यालय में विभाग के अधिकारी, कर्मचारी व शिक्षकों की मौजूदगी में बनवा कर वितरित किया गया।
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चार बेटियों की शादियां तय हैं जिनको लेकर असमंजस की स्थिति बनी है। खासकर बच्चों व महिलाओं की हालत खराब है। खुले आसमान के नीचे धूल व धूप के बीच भोजन करते इन पीड़ितों के स्वास्थ्य की किसी को चिंता नहीं है। आग से झुलसे आधा दर्जन ग्रामीण इलाज को भटक रहे हैं।
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तहसील क्षेत्र के गड़ौली गांव में सोमवार की दोपहर को अचानक आग लगने से सवा सौ घर धू-धूकर जल गए। दो दिन बाद प्रभावित परिवार के सदस्य दिनरात खुले आसमान के नीचे डेरा जमाए हैं। आग से बची कुछ सामग्री को ग्रामीण ऐसे सहेजते हैं जैसे मानों वह उनकी पूंजी है। काफी देर तक जले घर को देखने के बाद उसे बनाने का कुछ प्रयास करते हैं।
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प्रशासन ने जो पन्नियां दी हैं उसे टूटी दीवार में लगाकर रहने का प्रयास करते हैं लेकिन अभी भी आग की तपन ऐसी महसूस होती है कि सभी पेड़ की छांव में ही भागकर जाते हैं।
आग बुझाते समय गांव के अवधेश, रामनरेश, किरहा, मुन्नी व भगवानदीन आदि झुलस गए थे।
आग के धुएं से कई बच्चे बीमार हो गए हैं। जिनका कोई पुरसाहाल नहीं है। एसडीएम दुर्गेश मिश्रा ने बताया कि मंगलवार को तो स्वास्थ्य विभाग की टीम आई थी सभी का इलाज भी किया गया है लेकिन ग्रामीणों के अनुसार बुधवार को कोई नहीं आया। जिससे कुछ बच्चों की आंखों में जलन व आग से झुलसे ग्रामीणों का इलाज नहीं हो सका।
शादी की तारीख बढ़ाने की कवायद
चित्रकूट। अग्निकांड वाले घरों में चार लड़कियों की शादी तय हो चुकी है। जिसके लिए तैयारियां की जा रही थी। संगीता पुत्री कमलेश,रानी पुत्री तुलसी, बिट्टी पुत्री मइयादीन, उत्त्तरा पुत्री रामऔतार ने दु:खी भाव से बताया कि उनकी शादी के पहले घर का यह नजारा देखकर लगता है कि पहले नया घर बना लें फिर शादी करें।
परिजनों का कहना है कि अब लड़कों वालों पर भी निर्भर है कि वह उसी तारीख में शादी करेंगे या अगली तारीख बताएंगे।
---इनसेट
चित्रकूट। जिलाधिकारी मोनिका रानी ने एसडीएम दुर्गेश मिश्रा को निर्देश दिए सूची में कोई व्यक्ति छूटने न पाए। अभी 122 परिवार को कपड़े, बर्तन व भोजन के लिए 14 हजार से लेकर साढे़े चार हजार तक के राहत चेक बांटे जा चुके हैं। जिला बेसिक शिक्षा विभाग उठा रहा है।
वहीं दूसरी ओर घटना वाले दिन से लेकर तीसरे दिन बुधवार को दोनों पहर का भोजन गांव के विद्यालय में विभाग के अधिकारी, कर्मचारी व शिक्षकों की मौजूदगी में बनवा कर वितरित किया गया।