Chitrakoot: तिलक से पहले शिक्षिका ने दी जान, रिश्ते से थी असंतुष्ट, परिजन बोले- बेटी ने कभी विरोध नहीं किया
पिता ने बताया कि मंगलवार को उसका तिलक चढ़ाने जाना था। रविवार की शाम को परिजन शादी की तैयारी में थे। घर में सिर्फ उसकी मां और पुत्री थी। इसी बीच उसने कमरे में जाकर पंखे में दुपट्टे का फंदा बनाकर खुदकुशी कर ली
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चित्रकूट जिले के राजापुर थाना क्षेत्र के तीरघुमाई गंगू गांव की डायट की प्रशिक्षु घर में फंदे पर झूल गई। घटना की जानकारी होते ही परिवार में कोहराम मच गया। मृतका की शादी तय हो चुकी थी। मंगलवार को उसका तिलक का कार्यक्रम था।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर पंचनामा कराया। तीरघुमाई निवासी मनोरमा त्रिपाठी (24) पुत्री रमाकांत बीएड करने के बाद डायट शिवरामपुर में शिक्षिका का प्रशिक्षण ले रही थी। इसके अलावा प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती भी थी।
उसके पिता ने बताया कि मंगलवार को उसका तिलक चढ़ाने जाना था। रविवार की शाम को परिजन शादी की तैयारी में थे। घर में सिर्फ उसकी मां और पुत्री थी। इसी बीच उसने कमरे में जाकर पंखे में दुपट्टे का फंदा बनाकर खुदकुशी कर ली। देर शाम घर लौटे परिजनों ने मनोरमा को ढूंढा लेकिन वह नहीं मिली।
कमरे में पहुंचे तो उसे फंदे में लटकता देख चीख पड़े। पूरे घर में कोहराम मच गया। सूचना मिलने पर थाना प्रभारी दीपेंद्र सिंह मय फोर्स पहुंचे और परिजनों की मदद से शव को फंदे से नीचे उतारा। इसके बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया।
दो भाइयों में इकलौती बहन थी मनोरमा
दो भाइयों के बीच किसान परिवार की मनोरमा अकेली बहन थी। अच्छी शिक्षा ग्रहण करने के बाद परिजनों को विश्वास था कि एक साल के अंदर उसे सरकारी नौकरी मिल जाएगी। खुशी-खुशी उसकी शादी कमासिन गांव के एक युवक से तय कर दी थी।
ग्रामीणों और कुछ परिजनों की माने, तो शायद मनोरमा शादी के इस रिश्ते से असंतुष्ट थी। इसीलिए उसने जान दे दी। पिता ने बताया कि कभी पुत्री ने शादी को लेकर न कोई बात की और न ही विरोध किया। इससे उसकी मंशा का पता नहीं चला।