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स्पीड ब्रेकर न होना बनी मौत की वजह
Chitrakoot
Updated Fri, 25 Jul 2014 05:30 AM IST
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चित्रकूट। बहरवा पुल के पास अमवा गांव के संपर्क मार्ग से तेज रफ्तार में वाहनों का आवागमन रहता है और किसी तरह के अवरोधक न होने से आएदिन दुर्घटनाएं होती हैं। ग्रामीणों ने कई बार इस सड़क पर स्पीडब्रेकर बनवाने की मांग की पर जिम्मेदारों ने कोई ध्यान नहीं दिया।
ग्रामीणों का कहना था कि इस रोड पर पास के पहाड़ों से पत्थर लादकर ट्रक तेजी से निकलते हैं। इनकी रफ्तार पर भी किसी तरह से नियंत्रण नहीं रहता है। जिससे आएदिन हादसे होते रहते हैं। इन लोगों की मांग थी कि पहले विधायक मौके पर आएं तभी शवों को उठने दिया जाएगा। सूचना पाकर विधायक वीर सिंह पहुंचे और मृतकों के परिजनों को दस-दस हजार की सहायता दी। भरोसा दिया कि वह सरकार से हर संभव मदद दिलाने की कोशिश करेंगे। इसके बाद ही शवों को उठाने दिया गया। जिला पंचायत सदस्य शिवशंकर सिंह ने कहा कि यहां पर अवरोधक बनवाने के लिए प्रयास किया जाएगा। उन्होंने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख आर्थिक सहायता की मांग की।
चालक के संदेह में ज्यादा पिट गया क्लीनर
भीड़ इतनी आक्रोशित थी कि घटनास्थल से लगभग आधा किमी दूर अमवा माइनर के पास सामने से और पीछे से ग्रामीणों ने ट्रक का रास्ता बाधित कर इसे रोक लिया और फिर चालक और क्लीनर को इससे उतारकर जमकर पीटा। लोगों ने भइयन निवासी काली घाटी सरैंया को चालक समझकर ज्यादा पिटाई कर दी कि वह चलने से नाकाम हो गया। अगर कुछ लोग बीचबचाव न करते तो इसकी जान तक जा सकती थी। चालक मुन्ना निवासी रानीपुर खाकी (शिवरामपुर) के भी काफी चोटें आई हैं। दोनों को सरधुवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला अस्पताल रिफर किया गया है। डंफर सरैंया का बताया जा रहा है और इसमें गर्ग सरैंया लिखा है।
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शिवकरण की मौत से बेहाल हुई बहन
शिवकरण केदारनाथ जगन्नाथ महाविद्यालय खटवारा में बीए प्रथम वर्ष का छात्र था। उसके गांव के लोगों ने बताया कि कुंभकरण, मनीष और शिवकरण तीन भाइयों में वह सबसे होनहार था और परिवार को उससे आशाएं थीं। भाई की मौत की बात सुनकर घटनास्थल पहुंची उसकी बहन ममता का हाल बेहाल देखकर लोगों की आंखें भर आईं।
अब कौन पालेगा परिवार
अर्जुन के परिवार में उसकी पत्नी मीरा और दो बच्चे अंकित (6) और सपना (4) हैं। परिजन इनको भी घटनास्थल पर लाए थे। दोनों भाई-बहन लोगों को देखते फिर अपने पिता की मृत देह को देखते। कभी ये रो पड़ते तो कभी चुप हो जाते। अर्जुन छोटा मोटा काम कर अपने परिवार का पेट पालता था। उसके चले जाने से दोनों बच्चों के सिर से पिता का साया तो उठ ही गया साथ ही रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया।
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ग्रामीणों का कहना था कि इस रोड पर पास के पहाड़ों से पत्थर लादकर ट्रक तेजी से निकलते हैं। इनकी रफ्तार पर भी किसी तरह से नियंत्रण नहीं रहता है। जिससे आएदिन हादसे होते रहते हैं। इन लोगों की मांग थी कि पहले विधायक मौके पर आएं तभी शवों को उठने दिया जाएगा। सूचना पाकर विधायक वीर सिंह पहुंचे और मृतकों के परिजनों को दस-दस हजार की सहायता दी। भरोसा दिया कि वह सरकार से हर संभव मदद दिलाने की कोशिश करेंगे। इसके बाद ही शवों को उठाने दिया गया। जिला पंचायत सदस्य शिवशंकर सिंह ने कहा कि यहां पर अवरोधक बनवाने के लिए प्रयास किया जाएगा। उन्होंने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख आर्थिक सहायता की मांग की।
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चालक के संदेह में ज्यादा पिट गया क्लीनर
भीड़ इतनी आक्रोशित थी कि घटनास्थल से लगभग आधा किमी दूर अमवा माइनर के पास सामने से और पीछे से ग्रामीणों ने ट्रक का रास्ता बाधित कर इसे रोक लिया और फिर चालक और क्लीनर को इससे उतारकर जमकर पीटा। लोगों ने भइयन निवासी काली घाटी सरैंया को चालक समझकर ज्यादा पिटाई कर दी कि वह चलने से नाकाम हो गया। अगर कुछ लोग बीचबचाव न करते तो इसकी जान तक जा सकती थी। चालक मुन्ना निवासी रानीपुर खाकी (शिवरामपुर) के भी काफी चोटें आई हैं। दोनों को सरधुवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला अस्पताल रिफर किया गया है। डंफर सरैंया का बताया जा रहा है और इसमें गर्ग सरैंया लिखा है।
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शिवकरण की मौत से बेहाल हुई बहन
शिवकरण केदारनाथ जगन्नाथ महाविद्यालय खटवारा में बीए प्रथम वर्ष का छात्र था। उसके गांव के लोगों ने बताया कि कुंभकरण, मनीष और शिवकरण तीन भाइयों में वह सबसे होनहार था और परिवार को उससे आशाएं थीं। भाई की मौत की बात सुनकर घटनास्थल पहुंची उसकी बहन ममता का हाल बेहाल देखकर लोगों की आंखें भर आईं।
अब कौन पालेगा परिवार
अर्जुन के परिवार में उसकी पत्नी मीरा और दो बच्चे अंकित (6) और सपना (4) हैं। परिजन इनको भी घटनास्थल पर लाए थे। दोनों भाई-बहन लोगों को देखते फिर अपने पिता की मृत देह को देखते। कभी ये रो पड़ते तो कभी चुप हो जाते। अर्जुन छोटा मोटा काम कर अपने परिवार का पेट पालता था। उसके चले जाने से दोनों बच्चों के सिर से पिता का साया तो उठ ही गया साथ ही रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया।