फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chitrakoot News ›   नहर सूखी पड़ी, कैसे होगी धान की नर्सरी?

नहर सूखी पड़ी, कैसे होगी धान की नर्सरी?

Thu, 22 May 2014 05:32 AM IST
Chitrakoot
Chitrakoot Updated Thu, 22 May 2014 05:32 AM IST
विज्ञापन
राजापुर (चित्रकूट)। बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों को तोड़ दिया है। अब उन्हें धान और जायद की फसलों से उम्मीद है। ऐसे में नहरें सूखी पड़ी होने से किसान परेशान है। 15 दिन में ही धान की नर्सरी का काम शुरू हो जाएगा। ऐसे ही हालात रहे तो किसानों को सिंचाई का पानी कहां से मिलेगा।
विज्ञापन

राजापुर पंप कैनाल की क्षमता 50 क्यूसेक की है। पंप कैनाल में पांच पंप लगे हैं। जिनसे पानी की आपूर्ति की जाती है। कैनाल की पश्चिमी शाखा से चिल्ली राकस, बेराउर, रायपुर, कुसेली, उदघटा, महुंआ, उत्तमपुर आदि और दक्षिणी शाखा राजापुर, नादिन कुर्मियान, पराको, चनहट, मलवारा आदि गांवों में सिंचाई का पानी जाता है। कुल 20 से अधिक गांव में सिंचाई के पानी की आपूर्ति होती है। चिल्ली राकस के किसान सत्येंद्र कुमार पांडेय, बेराउर के सदाशिव निषाद ने बताया धान की सर्जरी के लिए 15 दिन ही बचे हैं। पंप कैनाल के पांच पंपों में चार ठीक बताए जाते हैं। लेकिन समस्या यह है कि ट्रांसफार्मर फाल्ट के चलते दो पंप बंद पड़े है। दो चालू है, मगर उनमें भी बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण चल नहीं पाते है। फिलहाल एक पंप ही चल रहा है। रायपुर के शंकर प्रजापति ने बताया नियमानुसार 15 से 16 घंटे तक पंप चलने चाहिए, लेकिन सात से आठ घंटे ही पंप चल रहे हैं। ऐसी हालात में केवल दो किमी तक ही पानी पहुंच सकता है। कुसेरी के मंगल सिंह ने बताया एक पंप से जो पानी नहरों में पहुंचता है वह सिर्फ तलहटी में ही रहता है। जब गुलाबों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है तो खेत तक कैसे पहुंचेगा।
विज्ञापन

सूख रही हैं जायद की फसलें
अन्नाप्रथा के चलते किसान वैसे ही जायद की फसल करने से कतराते हैं, लेकिन बीती फसल में नुकसान के कारण हिम्मत की है। उदघटा गांव के महेंद्र कुमार, पटवरिया के पप्पू सिंह ने बताया सिंचाई के लिए पानी न मिलने से अब जायद की फसल भी सूख रही है। डर है कहीं यह फसल भी न बर्बाद जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

किसानों ने दी चेतावनी
जायद फसल की सिंचाई और धान की नर्सरी के लिए पानी की समस्या देखते हुए किसान परेशान है। भटरी के वीरेंद्र द्विवेदी, महुंआ गांव के कन्धई ने बताया पहले से अधिकारियों को आगाह कर दिया गया है। एक सप्ताह में अगर नहरों से पानी नहीं मिला तो पिछली वर्ष की तरह इस वर्ष भी धान की फसल बर्बाद जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed