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किसानों के सामने उनकी मेहनत हुई राख
Chitrakoot
Updated Thu, 24 Apr 2014 05:30 AM IST
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चित्रकूट। बहिलपुरवा क्षेत्र के गांव सेमरिया चरणदासी में बुधवार को शार्टसर्किट से किसानों की मेहनत जलकर राख हो गई। बेबस किसान खलिहान में जलती फसल को बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन असफल रहे। गांव के किसानों में आक्रोश है कि दो किमी दूर होने के बाद भी दमकल की गाड़ी 25 मिनट बाद पहुंची है। फसल राख होने से अब उनके पास कुछ नहीं बचा है।
सेमरिया चरणदासी गांव के पास रोड किनारे खलिहान में गांव के दर्जनभर किसानों की गेहूं और अरहर की फसल रखी थी। ग्रामीणों के अनुसार 440 वोल्ट लाइन में शार्टसर्किट होने से चिंगारी खलिहान में रखी फसल पर जा गिरी जिससे सूखी फसल से तेज लपटे उठने लगी। लपटे देख गांव के लोग शोर मचाते हुए खलिहान की तरफ भागे। बाल्टियों से पानी भरकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हो सके। आग बढ़ती गई। किसानों के अनुसार लपटे इतनी तेज थी कि लोग उसके नजदीक जाने की हिम्मत नहीं कर सके और पूरी फसल लगभग पौन घंटे में जलकर राख हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि हादसे के पांच मिनट के अंदर फायर बिग्रेड को सूचना दे दी गई थी, लेकिन दो किमी दूरी तय करने में दमकल जवानों को 25 मिनट से ज्यादा समय लग गया। दमकल की गाड़ी अगर समय पर आ जाती तो कई किसानों की फसल बचाई जा सकती थी। हादसे में बिंदा प्रसाद द्विवेदी और बटाईदार चुन्ना की 10 बीघा, छोटा यादव की दो बीघा, सोमदत्त तिवारी की तीन बीघा, चंद्र मोहन द्विवेदी, बटाईदार चुन्ना खा की चार बीघा, धनपत कोटार्य की डेढ़ बीघा, देवमुनि तिवारी की डेढ़ बीघा, रामसूरत यादव की दो बीघा गेंहू की फसल और थ्रेशर जला है। राम आसरे, बिंदा प्रसाद की चार बीघा की अरहर और गेहूं की फसल जली है। किसानों ने कहा कि पहले ओला और अतिवृष्टि ने तबाह किया अब आग बचा हुआ सब कुछ अपने साथ ले गई।
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सेमरिया चरणदासी गांव के पास रोड किनारे खलिहान में गांव के दर्जनभर किसानों की गेहूं और अरहर की फसल रखी थी। ग्रामीणों के अनुसार 440 वोल्ट लाइन में शार्टसर्किट होने से चिंगारी खलिहान में रखी फसल पर जा गिरी जिससे सूखी फसल से तेज लपटे उठने लगी। लपटे देख गांव के लोग शोर मचाते हुए खलिहान की तरफ भागे। बाल्टियों से पानी भरकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हो सके। आग बढ़ती गई। किसानों के अनुसार लपटे इतनी तेज थी कि लोग उसके नजदीक जाने की हिम्मत नहीं कर सके और पूरी फसल लगभग पौन घंटे में जलकर राख हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि हादसे के पांच मिनट के अंदर फायर बिग्रेड को सूचना दे दी गई थी, लेकिन दो किमी दूरी तय करने में दमकल जवानों को 25 मिनट से ज्यादा समय लग गया। दमकल की गाड़ी अगर समय पर आ जाती तो कई किसानों की फसल बचाई जा सकती थी। हादसे में बिंदा प्रसाद द्विवेदी और बटाईदार चुन्ना की 10 बीघा, छोटा यादव की दो बीघा, सोमदत्त तिवारी की तीन बीघा, चंद्र मोहन द्विवेदी, बटाईदार चुन्ना खा की चार बीघा, धनपत कोटार्य की डेढ़ बीघा, देवमुनि तिवारी की डेढ़ बीघा, रामसूरत यादव की दो बीघा गेंहू की फसल और थ्रेशर जला है। राम आसरे, बिंदा प्रसाद की चार बीघा की अरहर और गेहूं की फसल जली है। किसानों ने कहा कि पहले ओला और अतिवृष्टि ने तबाह किया अब आग बचा हुआ सब कुछ अपने साथ ले गई।
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