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जाम रहा एंबुलेंस 108 व 102 का पहिया
अमर उजाला चित्रकूट
Updated Fri, 10 Jun 2016 12:34 AM IST
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एंबुलेंस खड़ी कर विरोध जताते चालक
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश सरकार की 108 व 102 एंबुलेंस योजना के एक दिन की हड़ताल से व्यवस्थाएं बिगड़ गई। पूरा वेतन न मिलने और संचालकों की मनमानी के खिलाफ गुरुवार को नेशनल एंबुलेंस सर्विस के लगभग 90 कर्मचारियों ने एंबुलेंस के पहिये जाम कर दिए। जिससे अस्पतालों में मरीज बेहाल रहे। गर्मी में अन्य साधन न मिलने से परेशान मरीजों की हालत देख एंबुलेंस संचालक ने मांगे मानकर देर शाम को हड़ताल खत्म कराई।
108 व 102 एंबुलेंस के पायलट और अन्य सहयोगियों ने गुरुवार सुबह जिले के इएमआई इंचार्ज हिमांशु श्रीवास्तव से मिले। सभी ने आरोप लगाया कि उनका वेतन दस हजार से अधिक है, लेकिन लगातार दो माह से उन्हें महज तीन व पांच हजार तक का वेतन मिल रहा है। जबकि वह नियमित काम कर रहें हैं। सुदूर जिले के होने के कारण इतने वेतन में गुजारा नहीं हो रहा। जब वह नियमित काम करते हैं तो वेतन क्यों काटा जा रहा है।
कर्मचारियों ने इएमआई पर जबरन अनुपस्थित दिखाने व वेतन कम कराने का आरोप लगाया। बातचीत के दौरान कोई समझौता न होने पर कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर एंबुलेंस के पहिये जाम कर दिए। अचानक अस्पतालों से एंबुलेंस गायब होने और लखनऊ 108 प 102 पर फोन करने पर भी एंबुलेंस नहीं आई तो मरीज और तीमारदार परेशान हो गए। खासकर प्रसूता महिलाओं को लाने जाने में गर्मी भी आड़े आई। हालात को देखते हुए सीएमओ डा. अनीता सिंह और सीएमएस डा. एनके गुप्ता ने ईएमआई से बातचीत की।
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देर शाम को अधिकारियों के निर्देश पर ईएमआई ने फिर एंबुलेंस के कर्मचारियों से बातचीत की। करीब एक घंटे की बातचीत के बाद तय हुआ कि 72 घंटे के अंदर कर्मचारियों का रोका गया वेतन दिलाया जाएगा। कर्मचारियों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण कराया जाएगा।
इस मौके पर प्रदीप कुमार, दीपक अरोड़ा, अवनीश पटेल व प्रदीप कुशवाहा आदि रहे। एंबुलेंस संचालन का काम देख रहे आरएम कुलदीप सक्सेना ने बताया कि यह आकस्मिक सेवाएं हैं, इसमें किसी तरह का खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। मिली शिकायतों का निस्तारण कराया जाएगा।
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108 व 102 एंबुलेंस के पायलट और अन्य सहयोगियों ने गुरुवार सुबह जिले के इएमआई इंचार्ज हिमांशु श्रीवास्तव से मिले। सभी ने आरोप लगाया कि उनका वेतन दस हजार से अधिक है, लेकिन लगातार दो माह से उन्हें महज तीन व पांच हजार तक का वेतन मिल रहा है। जबकि वह नियमित काम कर रहें हैं। सुदूर जिले के होने के कारण इतने वेतन में गुजारा नहीं हो रहा। जब वह नियमित काम करते हैं तो वेतन क्यों काटा जा रहा है।
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कर्मचारियों ने इएमआई पर जबरन अनुपस्थित दिखाने व वेतन कम कराने का आरोप लगाया। बातचीत के दौरान कोई समझौता न होने पर कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर एंबुलेंस के पहिये जाम कर दिए। अचानक अस्पतालों से एंबुलेंस गायब होने और लखनऊ 108 प 102 पर फोन करने पर भी एंबुलेंस नहीं आई तो मरीज और तीमारदार परेशान हो गए। खासकर प्रसूता महिलाओं को लाने जाने में गर्मी भी आड़े आई। हालात को देखते हुए सीएमओ डा. अनीता सिंह और सीएमएस डा. एनके गुप्ता ने ईएमआई से बातचीत की।
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देर शाम को अधिकारियों के निर्देश पर ईएमआई ने फिर एंबुलेंस के कर्मचारियों से बातचीत की। करीब एक घंटे की बातचीत के बाद तय हुआ कि 72 घंटे के अंदर कर्मचारियों का रोका गया वेतन दिलाया जाएगा। कर्मचारियों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण कराया जाएगा।
इस मौके पर प्रदीप कुमार, दीपक अरोड़ा, अवनीश पटेल व प्रदीप कुशवाहा आदि रहे। एंबुलेंस संचालन का काम देख रहे आरएम कुलदीप सक्सेना ने बताया कि यह आकस्मिक सेवाएं हैं, इसमें किसी तरह का खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। मिली शिकायतों का निस्तारण कराया जाएगा।