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चीन की दस्तक से फीरोजाबाद में आशंका
दीपक जैन/फीरोजाबाद
Updated Sat, 26 Oct 2013 12:21 AM IST
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चीन और भारत के बीच औद्योगिक विकास के लिए करार होने के बाद चीन अब भारतीय कांच उद्योग में रुचि दिखा रहा है।
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खुदरा बाजार में भारतीय उत्पादों को चुनौती देने वाले चीन ने सुहाग नगरी में दस्तक दी है। चीनी मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना के लिए चीनी प्रतिनिधि मंडल ने उत्साह दिखाया है।
इसके लिए ताज संरक्षित जोन से बाहर शिकोहाबाद-बटेश्वर रोड पर जगह भी तलाशी गई है। इस बीच, स्थानीय उद्योगपतियों ने चीन की इस पहल पर कई तरह की आशंकाएं जाहिर की हैं।
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भारत सरकार के औद्योगिक नीति एवं प्रोत्साहन विभाग (डीआईपीपी) की पहल पर चीनी प्रतिनिधि मंडल 20 अक्तूबर को यहां आया था। चाइना डेवलपमेंट बैंक की अधिकारी सुयी डॉगनिंग ने यहां के कांच उत्पाद देखने के साथ-साथ कारखानों में उत्पादन की स्थिति को भी देखा।
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उनके साथ प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास डा. सूर्य प्रताप सिंह भी थे। उद्योग विभाग के अधिकारियों ने शिकोहाबाद-बटेश्वर मार्ग पर चिह्नित की गई 800 एकड़ जमीन को भी दिखाया है।
खास बात यह है कि यह इलाका ताज संरक्षित होने के बाहर है, क्योंकि ताज संरक्षित जोन में नई इकाइयां फिलहाल नहीं लगाई जा सकतीं।
इस कवायद के बीच स्थानीय उद्योगपतियों ने कई तरह की आशंकाएं भी जाहिर की है। उनका मानना है कि चीन का कांच आइटमों के बाजार पर बीस फीसदी पहले से कब्जा है।
यहां बनने वाले हैंडीक्राफ्ट, झाड़-फानूस आदि आइटमों से सुहाग नगरी के शो-रूम पहले भरे रहते थे। लेकिन बाजार में डिमांड को देख कर अधिकांश शोरुमों पर अब चीन के आइटम दिखाई देते हैं।
युवा उद्योगपति हेमंत अग्रवाल बल्लू कहते हैं कि भारतीय कांच उद्योग को चीन पहले से चुनौती दे रहा है यदि चीनी निवेश हुआ या चीन ने खुद उद्योग लगाया तो कांच उद्योग के क्षेत्र में जमे मौजूदा लोगों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
आल इंडिया ग्लास मैन्यू फैक्चर ग्लास फेडरेशन के अध्यक्ष सुरेश चंद्र बंसल कहते हैं कि अभी तक की जानकारी के मुताबिक चीनी डेलीगेशन पहली बार आया है आगे क्या रणनीति है इसका पता नहीं।
यूपी जीएमएस के अध्यक्ष मोहन लाल अग्रवाल कहते हैं कि चीन ने रुचि बेशक दिखाई है लेकिन यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और चीन के इंफ्रास्ट्रक्चर में जमीन-आसमान का अंतर है।