{"_id":"575f0c364f1c1bf82311b907","slug":"unfinished-bridge","type":"story","status":"publish","title_hn":"अधूरा पड़ा है तिरगांवा-सैदपुर पुल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अधूरा पड़ा है तिरगांवा-सैदपुर पुल
ब्यूरो/ अमरउजाला, चंदौली
Updated Tue, 14 Jun 2016 01:10 AM IST
विज्ञापन
निर्माणाधीन पुल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में भले ही गाजीपुर को जोड़ने वाले तिरगांवा - सैदपुर पुल को अगस्त तक पूरा करने का निर्देश अधिकारियों को दिया है, लेकिन इस आधे अधूरे पुल के इतने जल्दी बनकर चालू हो जाने के आसार नहीं हैं।
प्रशासनिक मशीनरी की लचर व्यवस्था से तिरगांवा-सैदपुर पुल का चालू होना संभव नहीं दिख रहा है। न तो पुल का निर्माण पूरा हो सका है और न ही उसको जोड़ने वाला मार्ग अभी बना है। हालांकि पुल पर नब्बे करोड़ खर्च किये जा चुके हैं।
चंदौली और गाजीपुर को जोड़ने वाले तिरगांवा-सैदपुर पुल का निर्माण वर्ष 1999 में शुरू हुुआ। तब इस कार्य को बिल्ट आपरेट एंड ट्रांसफर के आधार पर स्वीकृत किया गया था। उस समय पुल की लंबाई लगभग नौ सौ मीटर थी। जिसके लिए 42 करोड़ का बजट पास हुआ था। जब एक वर्ष तक कोई भी कार्य करने को तैैयार नहीं हुआ, तब वर्ष 2000 में नियमों में संशोधन कर पुल निर्माण का कार्य सेतु निगम को दे दिया गया। फिर पुल की लंबाई भी बढ़ती गयी, तो पहले के नौ सौ मीटर से बढ़कर 1755 मीटर हो गयी है। साथ ही बीते मई में इसकी लागत बढ़ाकर एक अरब पांच करोड़ रुपये कर दी गयी है । लेकिन अभी तीन पिलर बनना बाकी है और सड़क का काम भी बाकी है। उसे देखकर नहीं प्रतीत होता कि कार्य अगस्त तक पूरा होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रशासनिक मशीनरी की लचर व्यवस्था से तिरगांवा-सैदपुर पुल का चालू होना संभव नहीं दिख रहा है। न तो पुल का निर्माण पूरा हो सका है और न ही उसको जोड़ने वाला मार्ग अभी बना है। हालांकि पुल पर नब्बे करोड़ खर्च किये जा चुके हैं।
विज्ञापन
चंदौली और गाजीपुर को जोड़ने वाले तिरगांवा-सैदपुर पुल का निर्माण वर्ष 1999 में शुरू हुुआ। तब इस कार्य को बिल्ट आपरेट एंड ट्रांसफर के आधार पर स्वीकृत किया गया था। उस समय पुल की लंबाई लगभग नौ सौ मीटर थी। जिसके लिए 42 करोड़ का बजट पास हुआ था। जब एक वर्ष तक कोई भी कार्य करने को तैैयार नहीं हुआ, तब वर्ष 2000 में नियमों में संशोधन कर पुल निर्माण का कार्य सेतु निगम को दे दिया गया। फिर पुल की लंबाई भी बढ़ती गयी, तो पहले के नौ सौ मीटर से बढ़कर 1755 मीटर हो गयी है। साथ ही बीते मई में इसकी लागत बढ़ाकर एक अरब पांच करोड़ रुपये कर दी गयी है । लेकिन अभी तीन पिलर बनना बाकी है और सड़क का काम भी बाकी है। उसे देखकर नहीं प्रतीत होता कि कार्य अगस्त तक पूरा होगा।
विज्ञापन