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बाजारवाद से धर्म नैतिकता पर असर
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 30 Jan 2017 01:16 AM IST
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सेमिनार में बोलती आकाशवाणी रीवा की सहायक निदेशिका डा. नीरजा माधव।
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बाजारवादी संस्कृति ने धर्म और नैतिकता पर असर डाला है। ऐसे में भारतीय नैतिक मूल्यों का अनुशीलन आवश्यक है। ये विचार स्थानीय सावित्री बाई फूले राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग एवं थाट एक्पेरिमेंट लैब्स चेन्नई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नैतिकता से आध्यात्मिकता की ओर धर्म, समाज एवं विकास विषयक संगोष्ठी में प्रसार भारती की रीवां आकाशवाणी की सहायक निदेशिका मुख्य अतिथि डॉ. नीरजा माधव ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदलने के लिए नैतिकता मूल तत्व है। विषय प्रवर्तन करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर उमाकांत यादव ने कहा कि भौतिकतावादी चिंतन में आध्यात्मिकता तथा नैतिकता का लोप दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन में जीवन का लक्ष्य निर्धारित है। भारतीय दर्शन तर्क का खंडन करने के साथ ही तत्व साक्षात्कार को स्वीकार करता है। जबकि पाश्चात्य दर्शन तर्क आधारित व्यवहारिकता पर आधारित है।
संगोष्ठी में इटली के वेनिस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रूबैरा लोरियो ने पाश्चात्य दार्शनिक अरस्तू, प्लेटो, सुकरात, रेने देकार्त, कांट, हेगल से लेकर मार्क्स, एंजिल्स, स्पेंसर, डार्विन, पाइथागोरस के दर्शन और भारतीय दर्शन के बीच तुलनात्मक अध्ययन हिंदी में प्रस्तुत किया। इस दौरान डॉ. कौशल कुमार श्रीवास्तव, डॉ. मिथिलेश कुमार, डॉ. संगीता सिन्हा, डॉ. प्रियंका पटेल, डॉ. माधवी शुक्ला, डॉ. सरवन कुमार यादव, डॉ. क्रांति कुमार त्रिवेदी आदि रहे।
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देवेन्द्र बहादुर आदि रहे। अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. शिवनारायण गुप्त ने और संचालन डॉ. अमिता सिंह ने किया।
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उन्होंने कहा कि नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदलने के लिए नैतिकता मूल तत्व है। विषय प्रवर्तन करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर उमाकांत यादव ने कहा कि भौतिकतावादी चिंतन में आध्यात्मिकता तथा नैतिकता का लोप दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन में जीवन का लक्ष्य निर्धारित है। भारतीय दर्शन तर्क का खंडन करने के साथ ही तत्व साक्षात्कार को स्वीकार करता है। जबकि पाश्चात्य दर्शन तर्क आधारित व्यवहारिकता पर आधारित है।
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संगोष्ठी में इटली के वेनिस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रूबैरा लोरियो ने पाश्चात्य दार्शनिक अरस्तू, प्लेटो, सुकरात, रेने देकार्त, कांट, हेगल से लेकर मार्क्स, एंजिल्स, स्पेंसर, डार्विन, पाइथागोरस के दर्शन और भारतीय दर्शन के बीच तुलनात्मक अध्ययन हिंदी में प्रस्तुत किया। इस दौरान डॉ. कौशल कुमार श्रीवास्तव, डॉ. मिथिलेश कुमार, डॉ. संगीता सिन्हा, डॉ. प्रियंका पटेल, डॉ. माधवी शुक्ला, डॉ. सरवन कुमार यादव, डॉ. क्रांति कुमार त्रिवेदी आदि रहे।
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देवेन्द्र बहादुर आदि रहे। अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. शिवनारायण गुप्त ने और संचालन डॉ. अमिता सिंह ने किया।