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Chandauli News: मिठाइयों में मिलावट की आशंका, 20 महीने में 45.5 क्विंटल नकली खोवा नष्ट कराया
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पीडीडीयू नगर में 2025 में मिले खोआ को तालाब में फेंकवाते खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी। फाइल
- फोटो : Samvad
पीडीडीयू नगर। त्योहारों पर मिठाइयों की बढ़ती मांग के बीच खोवा में मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है। पूर्वांचल की प्रमुख खोवा मंडियों में शामिल पीडीडीयू नगर में पिछले 20 महीने में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई में 45.5 क्विंटल नकली खोवा नष्ट कराया जा चुका है। जांच में पाउडर, पाम ऑयल और रिफाइंड ऑयल जैसी सामग्री से खोवा तैयार करने के मामले सामने आए हैं। तीन बड़ी कार्रवाइयों में भारी मात्रा में नकली खोवा मिलने से मंडी में आने वाली खेपों की गुणवत्ता और आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी का सवाल खड़ा हो गया है।
पीडीडीयू नगर की खोवा मंडी में रोजाना करीब 80 से 90 क्विंटल खोवा की खपत होती है। यहां से बनारस के मिठाई कारोबारी खोवा खरीदकर ले जाते हैं। बड़ी मात्रा में इसकी आपूर्ति झारखंड के बैजनाथ धाम तक भी होती है। ऐसे में यहां बिकने वाले खोवा की गुणवत्ता का असर स्थानीय बाजार के साथ दूसरे जिलों और राज्यों में भी मिठाइयों की शुद्धता पर पड़ता है।
त्योहारों में मांग बढ़ने पर कम लागत में तैयार खोवा खपाने की कोशिश उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। हालांकि, मंडी में बिकने वाले सभी खोवा को मिलावटी मानना उचित नहीं होगा। असल चुनौती शुद्ध और मिलावटी उत्पादों की पहचान करने और आपूर्ति की प्रत्येक खेप पर प्रभावी निगरानी रखने की है। संवाद
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इनसेट-
आसपास के जिलों और बिहार से आता है खोवा
पीडीडीयू नगर की मंडी में मिर्जापुर, सोनभद्र और भदोही के अलावा बिहार के कैमूर और हाटा सहित विभिन्न क्षेत्रों से खोवा पहुंचता है। जिले के धानापुर, चकिया और नौगढ़ क्षेत्रों से भी इसकी आपूर्ति होती है। कारोबारी यहां से अपनी जरूरत के मुताबिक खोवा खरीदकर मिठाई बनाने के लिए दूसरे बाजारों तक पहुंचाते हैं।त्योहारों के दौरान मिठाई की बिक्री बढ़ने के साथ खोवा की मांग भी बढ़ जाती है। ऐसे में आपूर्ति की मात्रा और गुणवत्ता के बीच संतुलन बनाए रखना खाद्य सुरक्षा विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। विभाग की पूर्व की कार्रवाइयों में पाउडर और पाम ऑयल से तैयार खोवा की बड़ी खेपें पकड़े जाने से मिलावट की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इनसेट-
उपभोक्ता भी बरतें सावधानी
खोवा खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, गंध, बनावट और बिक्री के स्थान पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, केवल रंग, स्वाद या बनावट के आधार पर मिलावट की पुष्टि नहीं की जा सकती। उत्पाद पर संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना देना बेहतर है। घर पर किए जाने वाले सामान्य परीक्षण भी हर तरह की मिलावट की विश्वसनीय पहचान नहीं कर सकते। त्योहारों की मिठास बरकरार रखने के लिए जरूरी है कि खोवा कारोबारी खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करें, विभाग नियमित रूप से नमूने लेकर जांच करे और मिलावट के मामलों में दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।
केस एक-
पाउडर से तैयार 50 किलो खोवा नष्ट कराया
अगस्त 2026 में रक्षाबंधन के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चलाया था। इसी क्रम में धानापुर कस्बे के पास अतौली गांव में छापा मारकर पाउडर से तैयार किए जा रहे खोवा का नमूना लिया गया। मौके पर करीब 50 किलो खोवा मिला, जिसे अधिकारियों ने नष्ट करा दिया। इसकी कीमत लगभग 15 हजार रुपये बताई गई थी।
केस दो-
पाम ऑयल और पाउडर से तैयार 20 क्विंटल खोवा पकड़ा
जुलाई 2025 में पीडीडीयू नगर के चकिया तिराहे के पास जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने एक मालवाहक वाहन से करीब 20 क्विंटल खोवा बरामद किया था। जांच में खोवा पाम ऑयल और पाउडर से तैयार किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद विभाग ने गड्ढा खोदकर पूरी खेप नष्ट करा दी थी।
केस तीन-
तीन गाड़ियों में मिला 25 क्विंटल नकली खोवा
जनवरी 2025 में पीडीडीयू नगर की मिठाई की दुकानों पर मिलावटी खोवा की आपूर्ति की सूचना मिलने पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने पुराने रोडवेज बस स्टैंड के पास छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान तीन गाड़ियों पर लदा पाउडर से बना करीब 25 क्विंटल खोवा बरामद किया गया। हालांकि, खोवा लेकर आए लोग मौके से फरार हो गए थे।
इनसेट :
ऐसे करें मिलावटी खोवा की पहचान
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी केएन त्रिपाठी के अनुसार, आयोडीन टिंचर की मदद से स्टार्च की मौजूदगी की जांच की जा सकती है। स्टार्च होने पर नमूने का रंग नीला-बैंगनी या गहरा हो सकता है। हालांकि, यह परीक्षण हर तरह की मिलावट नहीं पकड़ता। खोवा की असामान्य गंध, रंग या बनावट पर भी ध्यान दें। खुले और संदिग्ध स्रोत से उत्पाद खरीदने से बचें। केवल घरेलू परीक्षण के आधार पर खोवा को शुद्ध या मिलावटी घोषित न करें। संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना दें और प्रयोगशाला जांच को प्राथमिकता दें।
कोट-
मिलावटी खोवे को लेकर विभाग लगातार कार्रवाई करता है। नकली खोवे का नमूना लेने के बाद उसे मौके पर नष्ट कराया जाता है। इसके बाद नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाती है। मंडियों से भी लगातार नमूने लिए जाते हैं। - केएन त्रिपाठी, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, चंदौली
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पीडीडीयू नगर की खोवा मंडी में रोजाना करीब 80 से 90 क्विंटल खोवा की खपत होती है। यहां से बनारस के मिठाई कारोबारी खोवा खरीदकर ले जाते हैं। बड़ी मात्रा में इसकी आपूर्ति झारखंड के बैजनाथ धाम तक भी होती है। ऐसे में यहां बिकने वाले खोवा की गुणवत्ता का असर स्थानीय बाजार के साथ दूसरे जिलों और राज्यों में भी मिठाइयों की शुद्धता पर पड़ता है।
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त्योहारों में मांग बढ़ने पर कम लागत में तैयार खोवा खपाने की कोशिश उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। हालांकि, मंडी में बिकने वाले सभी खोवा को मिलावटी मानना उचित नहीं होगा। असल चुनौती शुद्ध और मिलावटी उत्पादों की पहचान करने और आपूर्ति की प्रत्येक खेप पर प्रभावी निगरानी रखने की है। संवाद
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इनसेट-
आसपास के जिलों और बिहार से आता है खोवा
पीडीडीयू नगर की मंडी में मिर्जापुर, सोनभद्र और भदोही के अलावा बिहार के कैमूर और हाटा सहित विभिन्न क्षेत्रों से खोवा पहुंचता है। जिले के धानापुर, चकिया और नौगढ़ क्षेत्रों से भी इसकी आपूर्ति होती है। कारोबारी यहां से अपनी जरूरत के मुताबिक खोवा खरीदकर मिठाई बनाने के लिए दूसरे बाजारों तक पहुंचाते हैं।त्योहारों के दौरान मिठाई की बिक्री बढ़ने के साथ खोवा की मांग भी बढ़ जाती है। ऐसे में आपूर्ति की मात्रा और गुणवत्ता के बीच संतुलन बनाए रखना खाद्य सुरक्षा विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। विभाग की पूर्व की कार्रवाइयों में पाउडर और पाम ऑयल से तैयार खोवा की बड़ी खेपें पकड़े जाने से मिलावट की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इनसेट-
उपभोक्ता भी बरतें सावधानी
खोवा खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, गंध, बनावट और बिक्री के स्थान पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, केवल रंग, स्वाद या बनावट के आधार पर मिलावट की पुष्टि नहीं की जा सकती। उत्पाद पर संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना देना बेहतर है। घर पर किए जाने वाले सामान्य परीक्षण भी हर तरह की मिलावट की विश्वसनीय पहचान नहीं कर सकते। त्योहारों की मिठास बरकरार रखने के लिए जरूरी है कि खोवा कारोबारी खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करें, विभाग नियमित रूप से नमूने लेकर जांच करे और मिलावट के मामलों में दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।
केस एक-
पाउडर से तैयार 50 किलो खोवा नष्ट कराया
अगस्त 2026 में रक्षाबंधन के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चलाया था। इसी क्रम में धानापुर कस्बे के पास अतौली गांव में छापा मारकर पाउडर से तैयार किए जा रहे खोवा का नमूना लिया गया। मौके पर करीब 50 किलो खोवा मिला, जिसे अधिकारियों ने नष्ट करा दिया। इसकी कीमत लगभग 15 हजार रुपये बताई गई थी।
केस दो-
पाम ऑयल और पाउडर से तैयार 20 क्विंटल खोवा पकड़ा
जुलाई 2025 में पीडीडीयू नगर के चकिया तिराहे के पास जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने एक मालवाहक वाहन से करीब 20 क्विंटल खोवा बरामद किया था। जांच में खोवा पाम ऑयल और पाउडर से तैयार किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद विभाग ने गड्ढा खोदकर पूरी खेप नष्ट करा दी थी।
केस तीन-
तीन गाड़ियों में मिला 25 क्विंटल नकली खोवा
जनवरी 2025 में पीडीडीयू नगर की मिठाई की दुकानों पर मिलावटी खोवा की आपूर्ति की सूचना मिलने पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने पुराने रोडवेज बस स्टैंड के पास छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान तीन गाड़ियों पर लदा पाउडर से बना करीब 25 क्विंटल खोवा बरामद किया गया। हालांकि, खोवा लेकर आए लोग मौके से फरार हो गए थे।
इनसेट :
ऐसे करें मिलावटी खोवा की पहचान
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी केएन त्रिपाठी के अनुसार, आयोडीन टिंचर की मदद से स्टार्च की मौजूदगी की जांच की जा सकती है। स्टार्च होने पर नमूने का रंग नीला-बैंगनी या गहरा हो सकता है। हालांकि, यह परीक्षण हर तरह की मिलावट नहीं पकड़ता। खोवा की असामान्य गंध, रंग या बनावट पर भी ध्यान दें। खुले और संदिग्ध स्रोत से उत्पाद खरीदने से बचें। केवल घरेलू परीक्षण के आधार पर खोवा को शुद्ध या मिलावटी घोषित न करें। संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना दें और प्रयोगशाला जांच को प्राथमिकता दें।
कोट-
मिलावटी खोवे को लेकर विभाग लगातार कार्रवाई करता है। नकली खोवे का नमूना लेने के बाद उसे मौके पर नष्ट कराया जाता है। इसके बाद नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाती है। मंडियों से भी लगातार नमूने लिए जाते हैं। - केएन त्रिपाठी, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, चंदौली