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पांच माह बाद सजा सोमवारी बाजार, दुकानदारों में जगी उम्मीद

Mon, 14 Sep 2020 11:03 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2020 11:03 PM IST
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Sentenced Somwari Bazaar after five months
पीडीडीयू नगर। कोरोना के कारण लॉक डाउन के चलते नगर में प्रत्येक सोमवार को सड़क किनारे सजने वाला बाजार पांच माह बाद सोमवार को फिर से शुरू हो गया। हालांकि लाक डाउन के बाद पहली बार लगे सोमवारी बाजार में दुकानें कम लगीं और ग्राहक भी इक्का-दुक्का ही पहुंचे। इससे दुकानदार मायूस दिखे।
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लाक डाउन के बाद अनलॉक-4 में स्थिति कुछ सामान्य होने के बाद डीएम नवनीत सिंह चहल ने पहले की तरह नगर का बाजार सोमवार को बंद रखने का निर्देश जारी कर दिया है। इसके बाद नगर में सोमवार को जीटी रोड के किनारे फुटपाथ पर सजने वाले सोमवारी बाजार के दुकानदारों ने राहत की सांस ली। हालांकि सोमवार को पहले की अपेक्षा लगभग 20 प्रतिशत ही दुकानें सजीं। इनमें ज्यादातर दुकानें कपड़े, जूते व बर्तन की रहीं। कम दुकानें सजने के साथ ही बाजार में ग्राहकों की संख्या भी काफी कम रही। दुकानदारों की मानें तो पहले सोमवारी बाजार में लगभग 10 लाख रुपये की दुकानदारी होती थी जो इस सोमवार को सिमटकर हजारों में हुई। पहले की तुलना में कम दुकानों के लगने का कारण उन्होंने कोरोना, प्रशासनिक भय व पितृपक्ष को बताया। वहीं कई दुकानदारों का कहना था कि पैसेंजर व डीएमयू ट्रेनों के न चलने से भी आसपास के क्षेत्र के ग्राहक बाजार नहीं पहुंच पाए।
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पीडीडीयू नगर। लाक डाउन काल में सोमवारी बाजार के जरिए परिवार का पेट भरने वाले दुकानदारों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अचानक रोजगार बंद हो जाने से उनके लिए परिवार का खर्च चलाना कठिन हो गया था। उनमें से कुछ ने रेहड़ी लगाकर तो किसी ने गांव-गांव फेरा लगाकर किसी प्रकार जीविकोपार्जन किया।
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सोमवारी बाजार में कपड़े की दुकान लगाने वाले शानू ने बताया कि लाक डाउन के दौरान सब्जी का ठेला लगाकर परिवार का पेट भरा। हालांकि सब्जी बाजार में नया होने के कारण उसे परेशानी भी हुई। अब सोमवारी बाजार के एक बार फिर शुरू हो जाने से जीवन पटरी पर आने की उम्मीद बढ़ी है। जूते-चप्पल के दुकानदार सलमान का कहना था कि पैसेंजर व लोकल ट्रेनों के न चलने से अभी ग्राहकों के आने की उम्मीद कम है क्योंकि सबसे ज्यादा ग्राहक आसपास के दिलदारनगर, जमानिया आदि से आते हैं। इन ट्रेनों के चलने के बाद ही व्यापार में सुधार आएगा। दुकानदार करीम ने बताया कि लाक डाउन के दौरान आसपास के गांवों में फेरी कर जूते-चप्पल बेचकर किसी प्रकार गुजारा किया। सरकार की ओर से मुफ्त में मिलने वाले राशन से महीने भर परिवार का पेट भरना मुश्किल साबित हो रहा था। अब बाजार खुल जाने से पुराने दिनों के लौटने की उम्मीद बढ़ गई है। कपड़े की दुकान लगाने वाले विनोद कुमार का कहना था कि लाक डाउन का दौर काफी खराब गुजरा। परिवार का पेट पालने के लिए विवशता में सायकिल पर फेरी लगाकर कभी सब्जी, कभी फल व कभी अन्य चीजें बेचनी पड़ीं।
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