{"_id":"3799f92cbb51bcd13a8a5a869746f003","slug":"rain-waterlogging-in-the-city-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश से शहर में जलभराव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश से शहर में जलभराव
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Tue, 18 Aug 2015 01:29 AM IST
विज्ञापन
एक सप्ताह के बाद सोमवार की सुबह झमाझम बारिश हुई।
ढाई घंटे तक हुई बारिश से शहर में जगह जगह पानी लग गया। सोमवार को करीब तीस मिमी बारिश हुई। इससे नाले नालियां उफना गए। मुहल्लों व गलियों में पानी जमा हो गया।
विभिन्न रेलवे कालोनियों में तो घुटने भर तक पानी लग गया। टपकती हुई छत के बीच घरों में पानी घुसने से लोगों को सामान सुरक्षित रखने में परेशानी हुई।
शहर के वीआईपी कालोनियों की गलियां भी बड़े नाले में तब्दील हो गईं। लोगों को कहना है कि जितनी तेजी से बारिश हुई है हाल के दिनों में इतनी बारिश नहीं हुई थी।
मध्य जुलाई में हुई तीन दिनों की बारिश से पूरे नगर में जलजमाव की स्थिति हुई थी। इसके बाद बारिश मानो थम गई थी। बारिश न होने से उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल हो गए।
हर तरफ लोग बारिश की आस लगाए हए थे। रविवार को शाम को कुछ देर के लिए बारिश हुई लेकिन इसके बाद उमस भरी गर्मी और तेज हो गई। रात में आसमान में बादल देख लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन रात में हल्की बूंदाबांदी ही हुई।
सुबह काले बादलों का घेरा गहराया और आठ बजे अचानक तेज बारिश शुरू हुई। झमाझम बारिश से कुछ देर में ही चहुंओर जल ही जल दिखने लगा।
नगर के चतुर्भुजपुर, काली महाल, ओड़वार, सुुुुभाषनगर, चंदासी, कैलाशपुरी, रविनगर, न्यू महाल, शाहकुटी सहित विभिन्न मुहल्लों में पानी जमा हो गया। ऐसा लगने लगा कि कुछ देर और बारिश हुई तो घरों में भी पानी घुस जाएगा। काली महाल से होकर गुजरने वाला नाला भी भर गया था।
इसी तरह रेलवे कालोनियों की स्थिति तो पूरी तरह दयनीय रही। रेलवे के वीआईपी कालोनी कही जाने वाली यूरोपियन कालोनी, मानस नगर, गया कालोनी, सेंट्रल कालोनी, लोको कालोनी, डीजल कालोनी, प्लांट डिपो कालोनी में जल जमाव की स्थिति रही।
लोको कालोनी में नाला और सड़क का भेद मिट गया और लोगों को आवागमन में दिक्कत हुई। यूरोपियन कालोनी में रेलवे क्वार्टर की छत टपकने की वजह से रेलकर्मी पहले ही परेशान हैं, ऊपर से भारी बारिश से जलजमाव से दिक्कत हुई।
विज्ञापन
ढाई घंटे तक हुई बारिश से शहर में जगह जगह पानी लग गया। सोमवार को करीब तीस मिमी बारिश हुई। इससे नाले नालियां उफना गए। मुहल्लों व गलियों में पानी जमा हो गया।
विभिन्न रेलवे कालोनियों में तो घुटने भर तक पानी लग गया। टपकती हुई छत के बीच घरों में पानी घुसने से लोगों को सामान सुरक्षित रखने में परेशानी हुई।
शहर के वीआईपी कालोनियों की गलियां भी बड़े नाले में तब्दील हो गईं। लोगों को कहना है कि जितनी तेजी से बारिश हुई है हाल के दिनों में इतनी बारिश नहीं हुई थी।
मध्य जुलाई में हुई तीन दिनों की बारिश से पूरे नगर में जलजमाव की स्थिति हुई थी। इसके बाद बारिश मानो थम गई थी। बारिश न होने से उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल हो गए।
हर तरफ लोग बारिश की आस लगाए हए थे। रविवार को शाम को कुछ देर के लिए बारिश हुई लेकिन इसके बाद उमस भरी गर्मी और तेज हो गई। रात में आसमान में बादल देख लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन रात में हल्की बूंदाबांदी ही हुई।
सुबह काले बादलों का घेरा गहराया और आठ बजे अचानक तेज बारिश शुरू हुई। झमाझम बारिश से कुछ देर में ही चहुंओर जल ही जल दिखने लगा।
नगर के चतुर्भुजपुर, काली महाल, ओड़वार, सुुुुभाषनगर, चंदासी, कैलाशपुरी, रविनगर, न्यू महाल, शाहकुटी सहित विभिन्न मुहल्लों में पानी जमा हो गया। ऐसा लगने लगा कि कुछ देर और बारिश हुई तो घरों में भी पानी घुस जाएगा। काली महाल से होकर गुजरने वाला नाला भी भर गया था।
इसी तरह रेलवे कालोनियों की स्थिति तो पूरी तरह दयनीय रही। रेलवे के वीआईपी कालोनी कही जाने वाली यूरोपियन कालोनी, मानस नगर, गया कालोनी, सेंट्रल कालोनी, लोको कालोनी, डीजल कालोनी, प्लांट डिपो कालोनी में जल जमाव की स्थिति रही।
लोको कालोनी में नाला और सड़क का भेद मिट गया और लोगों को आवागमन में दिक्कत हुई। यूरोपियन कालोनी में रेलवे क्वार्टर की छत टपकने की वजह से रेलकर्मी पहले ही परेशान हैं, ऊपर से भारी बारिश से जलजमाव से दिक्कत हुई।