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रिश्वत मामले में पंजाब के पीसीएस अफसर को 3 साल की सजा
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली(पंजाब)
Updated Sat, 09 Sep 2017 09:24 AM IST
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गिरफ्तार
- फोटो : Demo Photo
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करीब सात साल पुराने भ्रष्टाचार के एक मामले में जिला अदालत ने शुक्रवार को पीसीएस अधिकारी टीके गोयल को दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई। साथ ही 12 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने इस केस में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 7 तथा 13 (2) में सजा सुनाई है। हालांकि मौके पर ही उन्हें जमानत मिल गई।
पिछले लंबे से अलग अलग आरोपों में घिरे टीके गोयल इस समय राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) में प्रोजेक्ट डायरेक्टर के पद तैनात हैं। इससे पहले वे डीपीआई कालेजेज भी रह चुके हैं। जानकारी के मुुताबिक यह मामला सितंबर 2010 का है। उस समय गोयल पंजाब मिनी सचिवालय स्थित दलित एवं पिछड़ी श्रेणियों की भलाई विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर थे।
विजिलेंस ने उन्हें कस्बा भुलत्थ से संबंधित जौरज शुभ नाम के व्यक्ति से 50 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। जौरज का आरोप था कि अधिकारी ने जाति आधारित इंक्वायरी उसके पक्ष में करने के बदले यह रिश्वत ली थी। विजिलेंस ने अधिकारी के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
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विजिलेंस ने दे दिया था क्लीन चिट
जिक्रयोग है कि नवंबर 2012 में विजिलेंस ने ही उनको क्लीन चिट देते हुए अदालत को भ्रष्टाचार से केस बंद करने की अपील की थी। लेकिन अदालत ने विजिलेंस की वह अपील रद्द कर कर दी थी। अदालत का कहना था कि रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने वाले अधिकारी को क्लीन चिट दिए जाने का सवाल ही नहीं बनता।
अदालत द्वारा अपील रद्द किए जाने के बाद विजिलेंस फिर से केस की पैरवी शुरू की थी। जबकि इससे पहले जब उन्हें विजिलेेंस ने रंगे हाथों पकड़ा था, तो वह 13 दिन बाद जमानत पर बाहर आ गए थे। दूसरी ओर इस केस के शिकायतकर्ता जौरज शुभ ने कहा कि अधिकारी को सजा कम हुई है। वे पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में सजा बढ़ाने को लेकर अपील करेंगे।
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पिछले लंबे से अलग अलग आरोपों में घिरे टीके गोयल इस समय राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) में प्रोजेक्ट डायरेक्टर के पद तैनात हैं। इससे पहले वे डीपीआई कालेजेज भी रह चुके हैं। जानकारी के मुुताबिक यह मामला सितंबर 2010 का है। उस समय गोयल पंजाब मिनी सचिवालय स्थित दलित एवं पिछड़ी श्रेणियों की भलाई विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर थे।
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विजिलेंस ने उन्हें कस्बा भुलत्थ से संबंधित जौरज शुभ नाम के व्यक्ति से 50 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। जौरज का आरोप था कि अधिकारी ने जाति आधारित इंक्वायरी उसके पक्ष में करने के बदले यह रिश्वत ली थी। विजिलेंस ने अधिकारी के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
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विजिलेंस ने दे दिया था क्लीन चिट
जिक्रयोग है कि नवंबर 2012 में विजिलेंस ने ही उनको क्लीन चिट देते हुए अदालत को भ्रष्टाचार से केस बंद करने की अपील की थी। लेकिन अदालत ने विजिलेंस की वह अपील रद्द कर कर दी थी। अदालत का कहना था कि रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने वाले अधिकारी को क्लीन चिट दिए जाने का सवाल ही नहीं बनता।
अदालत द्वारा अपील रद्द किए जाने के बाद विजिलेंस फिर से केस की पैरवी शुरू की थी। जबकि इससे पहले जब उन्हें विजिलेेंस ने रंगे हाथों पकड़ा था, तो वह 13 दिन बाद जमानत पर बाहर आ गए थे। दूसरी ओर इस केस के शिकायतकर्ता जौरज शुभ ने कहा कि अधिकारी को सजा कम हुई है। वे पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में सजा बढ़ाने को लेकर अपील करेंगे।