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कविताओं से खूब वाहवाही लूटी
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sat, 24 Sep 2016 01:37 AM IST
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काव्यगोष्ठी का उद्घाटन करतीं दीपा खरे और अन्य।
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सांसद हंै, घूस नहीं तो क्या घास खायेंगे , करोड़ो इलेक्शन में खर्चे तुम्हारे बाप लाऐंगे। यह पंक्ति मशहूर कवि चकाचौंध ज्ञानपुरी ने यूरोपियन कालोनी स्थित बाकले प्रमोदशाला में शुक्रवार को आयोजित राजभाषा संगोष्ठी एवं हास्य कवि सम्मेलन में कही। इस दौरान वहां मौजूद कवियों में किसी ने कविताओं से कुव्यवस्थाओं पर तंज कसा तो किसी ने देशभक्ति की पंक्तियों से लोगों की वाहवाही लूटी।
केन्द्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद पूर्व मध्य रेलवे मुगलसराय के तत्वावधान में राजभाषा पखवाड़ा अन्तर्गत आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि कार्यकारी निदेशक रेलवे बोर्ड अमिताभ खरे, मंडल रेल प्रबंधक किशोर कुमार व अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित करके की। इस अवसर पर कवि मो. अली बक्शी की पंक्ति "बेवफा थे वो मगर मुझको वफा करना पड़ा, राहे उल्फत में हमें खुद को फना करना पड़ा" लोगों के दिल को छू गयी। वहीं सलीम शिल्वी ने "मेरे लिये यही जन्नत से कम नही होगी,मरू मैं जब भी तिरंगा कफन के साथ रहे" , रामकृष्ण शहस्त्रबुद्धे ने "हिन्दी हिन्दुस्तान की, भाषा है सम्मान की" एवं अनिल चौबे ने ' राजती है असंख्य दिलों पर, देश की राजकुमारी है हिन्दी" पढ़कर श्रोताओं को तालियां बजाने पर विवश कर दिया। मुख्य अतिथि अमिताभ खरे ने कहा कि यूनिकोड से हिंदी में कार्य करना आसान है। कहा कि विंडो का प्रयोग कर अधिकािधिक कार्य सरलता से किये जा सकते है। मंडल रेल प्रबंधक किशोर कुमार ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी अधिक बनती है कि हिंदी में कार्य कर इसका विकास करें। लेखक एल उमाशंकर ने मुगलसराय रेलवे मंडल में हिंदी में कार्य करने वाले लेखकों की चर्चा की। इस अवसर पर वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी जेपी सिंह, मंडल कार्मिक अधिकारी चंद्रशेखर आजाद, मंडल समाग्री प्रबंधक सुबोध मंडल, डीसी सिंह आदि रहे।
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केन्द्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद पूर्व मध्य रेलवे मुगलसराय के तत्वावधान में राजभाषा पखवाड़ा अन्तर्गत आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि कार्यकारी निदेशक रेलवे बोर्ड अमिताभ खरे, मंडल रेल प्रबंधक किशोर कुमार व अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित करके की। इस अवसर पर कवि मो. अली बक्शी की पंक्ति "बेवफा थे वो मगर मुझको वफा करना पड़ा, राहे उल्फत में हमें खुद को फना करना पड़ा" लोगों के दिल को छू गयी। वहीं सलीम शिल्वी ने "मेरे लिये यही जन्नत से कम नही होगी,मरू मैं जब भी तिरंगा कफन के साथ रहे" , रामकृष्ण शहस्त्रबुद्धे ने "हिन्दी हिन्दुस्तान की, भाषा है सम्मान की" एवं अनिल चौबे ने ' राजती है असंख्य दिलों पर, देश की राजकुमारी है हिन्दी" पढ़कर श्रोताओं को तालियां बजाने पर विवश कर दिया। मुख्य अतिथि अमिताभ खरे ने कहा कि यूनिकोड से हिंदी में कार्य करना आसान है। कहा कि विंडो का प्रयोग कर अधिकािधिक कार्य सरलता से किये जा सकते है। मंडल रेल प्रबंधक किशोर कुमार ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी अधिक बनती है कि हिंदी में कार्य कर इसका विकास करें। लेखक एल उमाशंकर ने मुगलसराय रेलवे मंडल में हिंदी में कार्य करने वाले लेखकों की चर्चा की। इस अवसर पर वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी जेपी सिंह, मंडल कार्मिक अधिकारी चंद्रशेखर आजाद, मंडल समाग्री प्रबंधक सुबोध मंडल, डीसी सिंह आदि रहे।
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