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आर्सेनिकयुक्त पानी पीने को विवश हैं गंगा किनारे बसे गांवों के लोग

Wed, 24 Mar 2021 12:01 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 24 Mar 2021 12:01 AM IST
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People from villages situated along the Ganges are forced to drink arsenic water
पीडीडीयू नगर। जिले में गंगा नदी के तट पर बसे गांवों के भू-जल में आर्सेनिक की मात्रा पाया जाना चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि 12 वर्षों से जलनिगम विभाग व सरकार इन क्षेत्रों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयास में जुटी है पर अभी पूरी सफलता हासिल नहीं हुई है। वर्ष 2008 में जिले में गंगा के किनारे बसे दर्जनभर गांवों के सर्वे में पाया गया था कि 19 बस्तियों के लोग आर्सेनिकयुक्त पानी का उपयोग कर रहे हैं। इसके बाद से ही इन गांवों के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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पेयजल की शुद्धता मापने के लिए वर्ष 2008 में गंगा नदी के किनारे बसे पड़ाव और चहनिया क्षेत्र के गांवों का केंद्र सरकार की ओर से सर्वे कराया गया था। इस दौरान दोनों क्षेत्रों के दर्जनभर गांवों की 19 बस्तियों में पाया गया कि यहां के भूजल में आर्सेनिक की मात्रा मानक से ज्यादा है। इन गांवों में पड़ाव क्षेत्र के बहादुरपुर, मडि़या, चौरहट व कटेसर और चहनिया ब्लॉक के सोनबरसा, टांडाकला, कैली सहित अन्य गांवों की 19 बस्तियों के भूजल में आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा है। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से वाटर क्वालिटी प्रोग्राम के तहत इन गांवों के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ट्यूबवेल लगाए जाने की योजना पर कार्य शुरू किया गया। वर्ष 2012 के अंत तक नादी-निधौरा, पूरा, पलिया, टांडाकला, कैली, बहादुरपुर व कटेसर में भूजल की जांच करने के बाद ट्यूबवेल के सहारे पेयजल की आपूर्ति आरंभ कर दी गई। वहीं आबादी अधिक होने के कारण सूजाबाद पेयजल योजना के तहत पांच ट्यूबवेल लगाए गए। इससे इन क्षेत्र के अधिकांश लोगों को शुद्ध पानी मिलने लगा है।
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जलनिगम विभाग के लैब असिस्टेंट विनोद पांडेय ने बताया कि बच्चों में चर्मरोग की शिकायत मिलने के बाद भूजल का सर्वे कराया गया था। साधारण पानी में आसैनिक की मात्रा 0.01 प्रतिशत प्रति लीटर होना चाहिए। इन बस्तियों के पानी की जांच करने पर पाया गया कि आर्सेनिक की मात्रा 0.03 प्रतिशत है। इससे बच्चों की त्वचा पर चकत्ते पड़ जाते थे। वहीं बड़े भी पेट की गंभीर बीमारियों से पीडि़त रहते थे। बताया कि आर्सेनिक की मात्रा इससे अधिक होने पर ब्लड कैंसर होने का खतरा बन जाता है।
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इस मामले में जल विभाग के एक्सईएन हेमंत सिंह ने बताया कि क्षेत्र में पानी के गुणवत्ता की लगातार जांच कराई जाती है। इसमें आर्सेनिक की मात्रा अधिक पाए जाने पर केंद्र व प्रदेश सरकार को सूचित किया जाता है। वहां से अनुमति मिलने के बाद ट्यूबवेल लगवाकर समस्या दूर की जा रही है।
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