{"_id":"619d3f1e95eb885b7049dc3d","slug":"now-hunting-wildlife-with-indigenous-bombs-chandauli-news-vns624044297","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिकारियों का नया हथकंडा, अब देसी बम से कर रहे वन्यजीवों का शिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिकारियों का नया हथकंडा, अब देसी बम से कर रहे वन्यजीवों का शिकार
विज्ञापन
नौगढ़। विकासखंड के जंगलों में शिकारियों ने वन्य जीवों के शिकार के लिए नया तरीका अपनाना शुरू कर दिया है। अब शिकारी बंदूक की जगह देशी बम का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे क्षेत्र के जंगलों में जगह- जगह आटे की लोई के बीच ऐसे बम का गोला रख देते हैं। जैसे ही कोई जंगली जानवर उसे मुंह में उठाता है वह फट जाता है जिससे उसकी मौत हो जाती है। पिछले सप्ताह सुअर को मारने वाले दो शिकारियों को वन विभाग ने पकड़ा तो इस नए तरीके के बारे में पता चला। इसको लेकर वन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है।
काशी वन्य जीव प्रभाग रामनगर अंतर्गत चंद्रप्रभा वन्य जीव विहार के अलावा नौगढ़, जयमोहनी व मझगाई रेंज के विभिन्न जंगलों के समीप देसी बम से जंगली शुकरों का शिकार जारी है। ठंड के मौसम में जंगली शूकर खेतों में चरने आ जाते हैं। इसके बाद शिकारी देसी बम के गोले या पतले तारों का फंदा बनाकर इनका शिकार आसानी से कर लेते हैं। धड़ल्ले से हो रहे शिकार पर प्रतिबंध लगाने के लिए गांव के लोगों द्वारा वन विभाग के अधिकारियों को दी जा रही सूचना अभी तक बेअसर है। लोगों का कहना है कि जंगली जानवरों के शिकार पर प्रतिबंध होने के बाद भी इनका धड़ल्ले से शिकार किया जा रहा है। शिकार कुछ लोग शौकिया तो कुछ लोग खाने के लिए करते हैं, जबकि वन्यजीवों का शिकार पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। शिकार करना आसान नहीं होता ऐसे में अब शिकारियों ने पैंतरा बदल कर सुगंधित देशी बम का गोला बनाने का नया तरीका इजाद कर लिया है।
ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। शिकारियों के खिलाफ अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्रीय वनाधिकारियों को रात्रि गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।-
विज्ञापन
दिनेश कुमार सिंह, डीएफओ रामनगर
विज्ञापन
काशी वन्य जीव प्रभाग रामनगर अंतर्गत चंद्रप्रभा वन्य जीव विहार के अलावा नौगढ़, जयमोहनी व मझगाई रेंज के विभिन्न जंगलों के समीप देसी बम से जंगली शुकरों का शिकार जारी है। ठंड के मौसम में जंगली शूकर खेतों में चरने आ जाते हैं। इसके बाद शिकारी देसी बम के गोले या पतले तारों का फंदा बनाकर इनका शिकार आसानी से कर लेते हैं। धड़ल्ले से हो रहे शिकार पर प्रतिबंध लगाने के लिए गांव के लोगों द्वारा वन विभाग के अधिकारियों को दी जा रही सूचना अभी तक बेअसर है। लोगों का कहना है कि जंगली जानवरों के शिकार पर प्रतिबंध होने के बाद भी इनका धड़ल्ले से शिकार किया जा रहा है। शिकार कुछ लोग शौकिया तो कुछ लोग खाने के लिए करते हैं, जबकि वन्यजीवों का शिकार पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। शिकार करना आसान नहीं होता ऐसे में अब शिकारियों ने पैंतरा बदल कर सुगंधित देशी बम का गोला बनाने का नया तरीका इजाद कर लिया है।
विज्ञापन
ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। शिकारियों के खिलाफ अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्रीय वनाधिकारियों को रात्रि गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।-
विज्ञापन
दिनेश कुमार सिंह, डीएफओ रामनगर