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रोशनी से नहाया कोना-कोना
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sun, 30 Oct 2016 08:01 PM IST
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दीप जलातीं युवतियां।
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प्रकाश पर्व दीपावली रविवार को जिले भर में धूमधाम से मनायी गई। लोगों ने श्रद्धापूर्वक प्रथम पूज्य गणेश और वैभव की देवी लक्ष्मी की पूजा अर्चना की। इसके बाद शाम को पूरे घर को दीपक से सजाया। घरों को आकर्षक ढंग से झालरों से भी सजाया गया था। सांझ ढलते ही बाजार रोशनी से नहा उठे। देर रात तक आतिशबाजी होती रही।
पर्व की तैयारियों में लोग काफी पहले से लगे हुए थे, लेकिन रविवार को लोग घरों को साफ-सुथरा करने के साथ ही इस दिन होने वाले पूजा-पाठ की सामग्री व गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों सहित अन्य जरूरी सामान की खरीदारी की। लोगों ने अपने मकान- दूकान की साफ-सफाई करने के साथ ही झालरों से भव्य सजावट की।
रात में लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना की। शहर में जमकर आतिशबाजी की गई। देर रात तक आतिशबाजी की जाती रही। कई जगहों पर जुए की बाजी भी खूब लगी। रंगीन कागजों झालर और फूल-मालाओं से बंदनवार बनाए गए। नगरीय इलाकों में घरों को विद्युत झालर, रंग बिरंगे बल्ब आदि से सजाया गया। बाजार में मिलने वाली रेडिमेड रंगोली का भी खूब प्रयोग हुआ। शाम के वक्त शुभ मुहुर्त में लोगों ने गणेश और लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। इसके बाद घर के बच्चों ने घरौंदा सजाया और उसमें ग्वालिन, मिट्टी के बर्तन आदि सजाए। इसके बाद प्रसाद स्वरूप मिठाइयों का आनंद लिया और उपहार बांटे। इसके बाद पूरे परिवार के साथ घर की छतों पर पहुंच कर खूब आतिशबाजी की और आनंद उठाया।
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पर्व की तैयारियों में लोग काफी पहले से लगे हुए थे, लेकिन रविवार को लोग घरों को साफ-सुथरा करने के साथ ही इस दिन होने वाले पूजा-पाठ की सामग्री व गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों सहित अन्य जरूरी सामान की खरीदारी की। लोगों ने अपने मकान- दूकान की साफ-सफाई करने के साथ ही झालरों से भव्य सजावट की।
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रात में लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना की। शहर में जमकर आतिशबाजी की गई। देर रात तक आतिशबाजी की जाती रही। कई जगहों पर जुए की बाजी भी खूब लगी। रंगीन कागजों झालर और फूल-मालाओं से बंदनवार बनाए गए। नगरीय इलाकों में घरों को विद्युत झालर, रंग बिरंगे बल्ब आदि से सजाया गया। बाजार में मिलने वाली रेडिमेड रंगोली का भी खूब प्रयोग हुआ। शाम के वक्त शुभ मुहुर्त में लोगों ने गणेश और लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। इसके बाद घर के बच्चों ने घरौंदा सजाया और उसमें ग्वालिन, मिट्टी के बर्तन आदि सजाए। इसके बाद प्रसाद स्वरूप मिठाइयों का आनंद लिया और उपहार बांटे। इसके बाद पूरे परिवार के साथ घर की छतों पर पहुंच कर खूब आतिशबाजी की और आनंद उठाया।
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