{"_id":"6ac4eaf5d16e41131d0e2931","slug":"in-chandauli-ramlila-lakshman-rendered-unconscious-by-the-shakti-baan-was-revived-by-sanjeevani-2026-10-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंदौली रामलीला: शक्ति बाण से मूर्छित लक्ष्मण, संजीवनी से लौटे होश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंदौली रामलीला: शक्ति बाण से मूर्छित लक्ष्मण, संजीवनी से लौटे होश
Tue, 06 Oct 2026 06:34 PM IST
किशन चौबे
संवाद न्यूज एजेंसी, कंदवा
संवाद न्यूज एजेंसी, कंदवा
Published by: किशन चौबे
Updated Tue, 06 Oct 2026 06:34 PM IST
सार
चंदौली के कंजेहरा गांव में चल रही रामलीला में सोमवार रात लक्ष्मण शक्ति, मेघनाथ वध और कुंभकर्ण वध का भावपूर्ण मंचन हुआ। मेघनाथ के शक्ति बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए, जिसके बाद हनुमान संजीवनी बूटी लेकर आए और लक्ष्मण स्वस्थ हुए।मंचन के दौरान श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम और हर-हर महादेव के जयकारे लगाए।
विज्ञापन
चंदौली रामलीला: शक्ति बाण से मूर्छित हुए लक्ष्मण, संजीवनी से मिली संजीवनी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
कंदवा के कंजेहरा गांव में चल रही रामलीला में सोमवार की रात लक्ष्मण शक्ति, मेघनाथ वध और कुंभकर्ण वध की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। शक्ति बाण लगने से लक्ष्मण के मूर्छित होते ही दर्शक भावुक हो उठे। वहीं मेघनाथ और कुंभकर्ण के वध पर श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव और जय श्रीराम के जयकारे लगाए।
विज्ञापन
रामलीला का आरंभ अंगद के लंका से लौटने से हुआ। अंगद के समझाने के बावजूद रावण ने सीता को वापस करने से इनकार कर दिया। इसके बाद राम और रावण की सेनाएं युद्ध के लिए आमने-सामने आ गईं। लक्ष्मण और मेघनाथ के बीच भीषण युद्ध हुआ। दोनों योद्धाओं के हार न मानने पर मेघनाथ ने शक्ति बाण चलाकर लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया। इससे राम दल में हाहाकार मच गया।
विज्ञापन
लक्ष्मण को बचाने के लिए हनुमान लंका से वैद्य सुषेण को लेकर आए। सुषेण की सलाह पर हनुमान संजीवनी बूटी लेने पहुंचे। संजीवनी के सेवन से लक्ष्मण स्वस्थ हो गए। इसके बाद वह दोबारा युद्धभूमि में पहुंचे और घनघोर युद्ध के बाद मेघनाथ का वध कर दिया।
विज्ञापन
मेघनाथ के वध की सूचना मिलते ही रावण मूर्छित हो गया, जबकि वानरी सेना में राम-लक्ष्मण की जय-जयकार होने लगी। इसके बाद रावण ने कुंभकर्ण को जगाया। युद्धभूमि में पहुंचकर कुंभकर्ण ने हाहाकार मचा दिया। अंत में श्रीराम ने युद्ध में कुंभकर्ण का वध कर दिया।
कुंभकर्ण की भूमिका गांव के पिंटू प्रीतम ने निभाई। इस दौरान उषा, ताराशीला, अनिल यादव, रणजीत सिंह यादव, तारकेश्वरनाथ ठाकुर आदि मौजूद रहे।