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Chandauli News: धान की बालियों में पीले-काले गोले दिखें तो समझें आभासी कंडुआ का प्रकोप

Tue, 20 Oct 2026 02:09 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2026 02:09 AM IST
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If yellow-black spheres appear on the paddy panicles, consider it an outbreak of false smut.
धान की फसल में आभासी कंडुआ रोग का प्रकोप किसानों के लिए नुकसान का कारण बन सकता है। यह फफूंद जनित रोग शुरुआती अवस्था में दिखाई नहीं देता। बालियां निकलने पर दानों की जगह पीले या काले रंग के पाउडर जैसे गोले नजर आने लगते हैं। जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव ने किसानों को रोग की पहचान कर समय से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि धान में फूल आने की अवस्था में वातावरण में 90 प्रतिशत से अधिक आर्द्रता और 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान होने पर रोग फैलने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में किसानों को फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए। रोग की रोकथाम के लिए गर्मी में खेत की गहरी जुताई करने और बोआई से पहले बीज शोधन की सलाह दी गई है। बीज शोधन के लिए स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस या ट्राइकोडर्मा का 10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से इस्तेमाल करने को कहा गया है।
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इसके अलावा एक हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई के लिए तैयार पौध की जड़ों को 100 लीटर पानी में 2.5 किलोग्राम स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस या ट्राइकोडर्मा मिलाकर तैयार घोल में 30 मिनट तक उपचारित करने के बाद रोपाई की जा सकती है। किसानों को उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने और फसल चक्र अपनाने की भी सलाह दी गई है।
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बाली निकलने पर करें अनुशंसित दवा का छिड़काव
कृषि रक्षा अधिकारी के अनुसार, धान में बाली निकलने की अवस्था में रोग नियंत्रण के लिए प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी अथवा पिकॉक्सीस्ट्रोबिन 7.05 प्रतिशत और प्रोपिकोनाजोल 11.7 प्रतिशत एससी के एक लीटर घोल को 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा थिफ्लुजामाइड 15 प्रतिशत और डाइफेनोकोनाजोल 20 प्रतिशत एससी की 250 मिलीलीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करने का सुझाव दिया गया है। किसानों को दवाओं के इस्तेमाल से पहले उत्पाद के लेबल, पंजीकृत उपयोग और कृषि विभाग की वर्तमान अनुशंसा की पुष्टि करने की सलाह भी दी गई है।
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