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सूखी होली खेलकर बचाएं पानी

Tue, 22 Mar 2016 01:31 AM IST
ब्यूरो/ अमरउजाला, चंदौली
ब्यूरो/ अमरउजाला, चंदौली Updated Tue, 22 Mar 2016 01:31 AM IST
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Holly playing dry Save  water
कपड़ों की खरीदारी करतीं महिलाएं।
होली पर लोग जी भर कर एक दूसरे को रंगों से भिगोते हैं, लेकिन इसके साथ ही पानी की बर्बादी भी खूब होती है। पहले रंग घोलने में और  बाद में रंग छुड़ाने के लिए पानी का इस्तेमाल खूब होता है। इस तरह नगर में करीब ढाई लाख की आबादी के हिसाब से होली के दिन एक करोड़ पचास  लाख लीटर पानी खर्च होना तय है। ऐसे में यदि सूखी होली यानी अबीर गुलाल से खेली जाए तो यह पानी बच सकता है।
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नगर पालिका से वर्तमान में प्रति  व्यक्ति 135 लीटर पानी की आपूर्ति होती है।अधिशासी अधिकारी नगर पालिका  राजेन्द्र प्रसाद का कहना है कि होली वाले दिन पानी की मांग लगभग दोगुनी हो  जाती है। इस तरह उस दिन प्रति व्यक्ति ढाई सौ लीटर पानी की आपूर्ति होती है। इस तरह देखा जाए तो एक दिन में पांच करोड़ लीटर से  अधिक पानी की बर्बाद हो जाएगी। गर्मी आते ही जनपद में पानी की  किल्लत शुरू हो जाती है। पहाड़ी इलाकों में तो पानी की एक एक बूंद के लिए  मारामारी होती है। दूसरी तरफ पानी की इतनी बर्बादी कहां तक उचित है। 
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पालिका के ईओ कहते हैं कि यदि होली पर सिर्फ एक दूसरे को अबीर लगाएं तो ढाई करोड़ लीटर पानी की बर्बादी रुक जाएगा। रेलकर्मी एसके सिंह कहते हैं कि वैसे होली रंगों का  त्योहार है लेकिन आधुनिक समय में सूखी होली खेलना आवश्यक है। इसी तरह सर्कस रोड  निवासी सोनू सिंह कहते हैं कि वर्तमान में रंगों में केमिकल की मिलावट होती  है और इसे लगाने से रोग की चपेट में आने की आशंका होती है। 
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ऐसे में अबीर  के साथ होली खेल कर पानी की बचत के साथ स्वास्थ्य लाभ भी हो सकता है।  गोबरिया निवासी संजय श्रीवास्तव कहते हैं कि परंपरा लोगों के लिए है और  परंपरा समय के अनुसार बदलती है। इसी तरह अखिल भारतीय कायस्थ महासभा  शैलेन्द्र  श्रीवास्तव कहते हैं कि इसके लिए युवाओं को आगे आने की जरूरत है और इसकी  प्रेरणा बुजुर्गों को देना होगा। इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष रेखा  जायसवाल कहती हैं कि वैसे होली पर पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी। 22 से  25 मार्च तक भोर में चार बजे से शाम तीन बजे तक और शाम चार बजे से रात 11  बजे तक लगातार जलापूर्ति की जाएगी।   
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