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गायत्री यज्ञ

Sat, 18 Apr 2015 01:32 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला चंदौली
ब्यूरो अमर उजाला चंदौली Updated Sat, 18 Apr 2015 01:32 AM IST
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Gayatri Yajna
गायत्री परिवार द्वारा आयोजित गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा में
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शांति कुंज हरिद्वार से पधारे रामतपस्या आचार्य ने प्रज्ञा पुराण कथा के प्रथम निशा में कहा कि सत्संग से मन अंधकार से प्रकाश की ओर जाता है। सत्संग के द्वारा सत्य बातों की चर्चा होती है।


कहीं भी कथा पुराण पर चर्चा हो तो हमें सपरिवार शामिल होकर कथा श्रवण का लाभ उठाना चाहिए। कहा कि यह संसार यज्ञ मय है। यज्ञ सबसे श्रेष्ठ कर्म है।

 प्रत्येक मनुष्य को नित्य यज्ञ करना चाहिए, क्योंकि यज्ञ त्रिभुवन की नाभि केंद्र है। इसी पर पूरी सृष्टि चलती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार समुद्र का पानी वाष्प में बदल जाता है। बादल उस जल को धरती पर वर्षा करता है और वह जल सभी प्राणियों के जीवन प्रदान करता है।

मनुष्य को परमार्थवादी होना चाहिए। जबकि आज मनुष्य सत्कर्म छोड़ कर स्वार्थ, लोभ, लालच में फंसकर जघन्य अपराध कर रहा है।

मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आरएन सिंह ने पावन प्रज्ञा पुराण का पूजन के साथ कथा का प्रारंभ हुआ। इस दौरान डा. ज्ञानप्रकाश, भोला सिंह, अवधेश जायसवाल, विरेंद्र जायसवाल, तरूण सिंह, जितेंद्र सहित आदि लोग उपस्थित रहे।
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