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Chandauli News: चार हजार रसोइयों को नहीं मिला तीन महीने का मानदेय, रक्षाबंधन के बाद भेजे गए मात्र एक हजार रुपये
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चंदौली के परिषदीय विद्यालयों में मिड डे मील बनाकर बच्चों को खाना परोसने वाली लगभग चार हजार रसोइयों को बीते तीन महीनों से मानदेय नहीं मिला है। बीएसए सचिन कुमार ने आश्वासन दिया था कि रक्षाबंधन पर उनको मानदेय दिया जाएगा। लेकिन रक्षाबंधन के दो दिन बाद पैसे आए वो भी मात्र एक हजार रुपये ही। जबकि एक रसोइया का तीन महीने का वेतन छह हजार रुपये हुआ। ऐसे में रसोइयों का घर चलाना मुश्किल हो गया है।
रसोइया महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश ने बताया कि रसोइयों से विद्यालयों में भोजन पकवाने के साथ-साथ सफाई और अन्य कार्य भी कराए जाते हैं। मना करने पर कई बार उन्हें अनुबंध नवीनीकरण में बाहर कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि चंदौली में मार्च, अप्रैल और जुलाई महीने का मानदेय रसोइयों को नहीं मिला है। रक्षाबंधन के त्योहार पर मानदेय के लिए अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई गई लेकिन आश्वासन के बाद भी रक्षाबंधन पर मानदेय नहीं मिला। रक्षाबंधन के दो दिन बाद रसोइयों के खाते में मात्र एक हजार रूपये आए जबकि एक रसोइया का तीन महीने का छह हजार रुपये बाकि हैं। कहा कि रसोइयों को मानदेय समय से मिले और उनके साथ हो रहे शोषण पर भी प्रशासन गंभीरता से ध्यान दे ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए। रसोइया इंद्रावती देवी ने बताया कि रक्षाबंधन पर मानदेय मिलने की उम्मीद थी लेकिन उसके बाद आया तो वो भी मात्र एक हजार रुपये। रसोइया आशा देवी ने बताया कि हम बहुत गरीब हैं, हमारी थोड़ी बहुत आशा उसी मानदेय से है लेकिन वह भी नहीं मिल पा रहा है।
रसोइयों का भुगतान जल्द से जल्द किया जाएगा। विभागीय प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। - सचिन कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी, चंदौली
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रसोइया महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश ने बताया कि रसोइयों से विद्यालयों में भोजन पकवाने के साथ-साथ सफाई और अन्य कार्य भी कराए जाते हैं। मना करने पर कई बार उन्हें अनुबंध नवीनीकरण में बाहर कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि चंदौली में मार्च, अप्रैल और जुलाई महीने का मानदेय रसोइयों को नहीं मिला है। रक्षाबंधन के त्योहार पर मानदेय के लिए अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई गई लेकिन आश्वासन के बाद भी रक्षाबंधन पर मानदेय नहीं मिला। रक्षाबंधन के दो दिन बाद रसोइयों के खाते में मात्र एक हजार रूपये आए जबकि एक रसोइया का तीन महीने का छह हजार रुपये बाकि हैं। कहा कि रसोइयों को मानदेय समय से मिले और उनके साथ हो रहे शोषण पर भी प्रशासन गंभीरता से ध्यान दे ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए। रसोइया इंद्रावती देवी ने बताया कि रक्षाबंधन पर मानदेय मिलने की उम्मीद थी लेकिन उसके बाद आया तो वो भी मात्र एक हजार रुपये। रसोइया आशा देवी ने बताया कि हम बहुत गरीब हैं, हमारी थोड़ी बहुत आशा उसी मानदेय से है लेकिन वह भी नहीं मिल पा रहा है।
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रसोइयों का भुगतान जल्द से जल्द किया जाएगा। विभागीय प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। - सचिन कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी, चंदौली