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साढ़े चार लाख पशुओं के टीकाकरण को चलेगा अभियान
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चंदौली। जिले में पालतू मवेसियों की हिफाजत को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पशुपालन विभाग ने 4.50 लाख पालतू पशुओं का टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए 37 टीमों का गठन कर दिया गया है। चिकित्सक व पैरावेट घर-घर जाकर शारीरिक दूरी का पालन करते हुए मवेशियों में गलाघोटू, खुरपका, मुंहपका का टीका लगाएंगे।
गर्मी व बरसात के मौसम में पशुओं में गलाघोटू, मुहपका, खुरपका बीमारी फैलती है। एक बार बीमारी फैलने के बाद काबू में करना आसान नहीं होता। ऐसे में विभाग पहले ही अलर्ट हो गया है। जनपद में 6.62 लाख पालतू मवेशी हैं। इसमें गाय और भैस शामिल हैं। पशुपालन विभाग ने साढ़े चार लाख पशुओं के टीकाकरण की योजना बनाई है। गर्भवती मवेशी व बछड़ों के अलावा शेष सभी पशुओं का टीकाकरण कराया जाएगा। इसके लिए विभाग ने 37 टीमों का गठन किया है। इसमें चिकित्सक, पैरावेट व वैक्सिनेटर को शामिल किया गया है। प्रत्येक टीम को नियमित टीकाकरण के लिए लक्ष्य भी दिया गया है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए एहतियात बरतने की हिदायत दी गई है। मसलन टीकाकरण के दौरान शारीरिक दूरी का पालन अनिवार्य होगा। टीकाकरण के साथ ही पशुओं की टैगिंग भी कराई जाएगी। कारण बेसहारा पशु विभाग के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। कुछ बेसहारा पशु गैर जनपदों से जिले में प्रवेश कर रहे हैं। वहीं पशुपालक भी दूध न देने वाले पशुओं को बेसहारा छोड़ देते हैं। मवेशी किसानों की फसलों को अपना निवाला बनाते हैं। इसकी शिकायतें अक्सर मिलती रहती है। इस पर रोक लगाने के लिए विभाग ने पालतू पशुओं की टैगिंग का निर्णय लिया है। टैग लगे पालतू पशु छुट्टा घूमते मिले तो पशुपालकों को चिह्नित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। जिला प्रशासन को उम्मीद है कि सख्ती का असर होगा और पशुपालक अपने मवेशी बेसहारा नहीं छोड़ेंगे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. एसपी पांडेय ने बताया कि पशुओं का टीकाकरण और टैगिंग की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इसके लिए टीम गठित कर दी गई है। जिले में साढ़े चार लाख पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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गर्मी व बरसात के मौसम में पशुओं में गलाघोटू, मुहपका, खुरपका बीमारी फैलती है। एक बार बीमारी फैलने के बाद काबू में करना आसान नहीं होता। ऐसे में विभाग पहले ही अलर्ट हो गया है। जनपद में 6.62 लाख पालतू मवेशी हैं। इसमें गाय और भैस शामिल हैं। पशुपालन विभाग ने साढ़े चार लाख पशुओं के टीकाकरण की योजना बनाई है। गर्भवती मवेशी व बछड़ों के अलावा शेष सभी पशुओं का टीकाकरण कराया जाएगा। इसके लिए विभाग ने 37 टीमों का गठन किया है। इसमें चिकित्सक, पैरावेट व वैक्सिनेटर को शामिल किया गया है। प्रत्येक टीम को नियमित टीकाकरण के लिए लक्ष्य भी दिया गया है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए एहतियात बरतने की हिदायत दी गई है। मसलन टीकाकरण के दौरान शारीरिक दूरी का पालन अनिवार्य होगा। टीकाकरण के साथ ही पशुओं की टैगिंग भी कराई जाएगी। कारण बेसहारा पशु विभाग के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। कुछ बेसहारा पशु गैर जनपदों से जिले में प्रवेश कर रहे हैं। वहीं पशुपालक भी दूध न देने वाले पशुओं को बेसहारा छोड़ देते हैं। मवेशी किसानों की फसलों को अपना निवाला बनाते हैं। इसकी शिकायतें अक्सर मिलती रहती है। इस पर रोक लगाने के लिए विभाग ने पालतू पशुओं की टैगिंग का निर्णय लिया है। टैग लगे पालतू पशु छुट्टा घूमते मिले तो पशुपालकों को चिह्नित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। जिला प्रशासन को उम्मीद है कि सख्ती का असर होगा और पशुपालक अपने मवेशी बेसहारा नहीं छोड़ेंगे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. एसपी पांडेय ने बताया कि पशुओं का टीकाकरण और टैगिंग की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इसके लिए टीम गठित कर दी गई है। जिले में साढ़े चार लाख पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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