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आग बुझाने के उपाय नाकाफी
ब्यूरो/ अमरउजाला, चंदौली
Updated Fri, 22 Apr 2016 02:02 AM IST
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मुगलसराय के परमार कटरा में कपड़े की दूकानें।
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नगर में कई बाजार कभी भी आग की चपेट में आ सकते हैं। वजह है तंग गलियां और उसमें ढेर सारी दूकानें। साथ ही अपर्याप्त अग्नि शमन संयंत्र। यहां यदि आग लगती है तो फायर ब्रिगेड का पहुंचना भी मुश्किल है। पूर्व में भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। पर गलियों में अग्नि सुरक्षा के विशेष उपाय नहीं किए गए हैं।
नगर पालिका मुगलसराय क्षेत्र में जीटी रोड के किनारे एक दर्जन से अधिक बाजार हैं। लाल बहादुर शास्त्री कटरा, धर्मशाला रोड, खोआ गली, गल्ला मंडी, परमार कटरा, रस्तोगी गली सहित अन्य कई मार्केट हैं। वीआईपी मार्केट के रूप में पहचान बनाने वाले परमार कटरा में बड़े व्यावसायिक दूकानों में स्वर्ण आभूषण के साथ कपड़ों सहित अन्य वस्तुओं की चार दर्जन से अधिक दूकानों समेत छोटी बड़ी कुल सौ से अधिक दुकानें हैं।
बड़ी दूकानों में तो दुकानदार अग्निशमन यंत्र रखे हुए हैं लेकिन छोटे दूकानदार जिनकी तादात करीब चार हजार से अधिक है उनके यहां अग्निशमन यंत्र तक नहीं है। ऐसे में अगर तंग गलियों की छोटी दूकानों में भी आग लगती है तो अग्नि शमन यंत्र के अभाव में आग फैलकर बड़ी दुकानों को भी प्रभावित कर सकती है।
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अत्यंत तंग गली वाले बाजार में यदि किसी दुकान में आग लगी तो यहां अग्निशमन विभाग का पहुंचना मुश्किल होगा। इससे भी खराब स्थिति धर्मशाला रोड की है। डाक खाना के पीछे खोआ वाली गली में तो कपड़े की थोक दूकानें हैं। यहां भी आग लगने पर मुश्किल होगी। यही हाल रस्तोगी गली और लाल बहादुर शास्त्री कटरा का भी है। आम तौर पर दूकानों में सीज फायर रखना अनिवार्य है। यही नहीं फायर ब्रिगेड को समय-समय पर इसकी जांच करनी चाहिए ।
लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है।
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नगर पालिका मुगलसराय क्षेत्र में जीटी रोड के किनारे एक दर्जन से अधिक बाजार हैं। लाल बहादुर शास्त्री कटरा, धर्मशाला रोड, खोआ गली, गल्ला मंडी, परमार कटरा, रस्तोगी गली सहित अन्य कई मार्केट हैं। वीआईपी मार्केट के रूप में पहचान बनाने वाले परमार कटरा में बड़े व्यावसायिक दूकानों में स्वर्ण आभूषण के साथ कपड़ों सहित अन्य वस्तुओं की चार दर्जन से अधिक दूकानों समेत छोटी बड़ी कुल सौ से अधिक दुकानें हैं।
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बड़ी दूकानों में तो दुकानदार अग्निशमन यंत्र रखे हुए हैं लेकिन छोटे दूकानदार जिनकी तादात करीब चार हजार से अधिक है उनके यहां अग्निशमन यंत्र तक नहीं है। ऐसे में अगर तंग गलियों की छोटी दूकानों में भी आग लगती है तो अग्नि शमन यंत्र के अभाव में आग फैलकर बड़ी दुकानों को भी प्रभावित कर सकती है।
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अत्यंत तंग गली वाले बाजार में यदि किसी दुकान में आग लगी तो यहां अग्निशमन विभाग का पहुंचना मुश्किल होगा। इससे भी खराब स्थिति धर्मशाला रोड की है। डाक खाना के पीछे खोआ वाली गली में तो कपड़े की थोक दूकानें हैं। यहां भी आग लगने पर मुश्किल होगी। यही हाल रस्तोगी गली और लाल बहादुर शास्त्री कटरा का भी है। आम तौर पर दूकानों में सीज फायर रखना अनिवार्य है। यही नहीं फायर ब्रिगेड को समय-समय पर इसकी जांच करनी चाहिए ।
लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है।