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खुदाई में पुरानी सभ्यता के मिले साक्ष्य
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चंदौली। सदर कोतवाली क्षेत्र के माटीगांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में मंगलवार को बीएचयू पुरातत्व विभाग ने उत्खनन कार्य शुरू किया। लोगों को अनुमान है कि गांव के मांटी के नीचे करीब दो हजार पूर्व की सभ्यता मौजूद है। इसी को लेकर केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद खुदाई का कार्य दोबारा शुरू किया गया। पहले दिन टीम में शामिल लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए चिह्नित भूमि की साफ-सफाई कराने के बाद हल्की खुदाई की।
पुरातत्व विभाग के सर्वे के दौरान माटीगांव शिव मंदिर परिसर तथा गांव के आबादी वाली इलाके में दो हजार वर्ष पुरानी कुषाण कालीन ईंट और 600 से 1200 ईस्वी के काल के मध्य निर्मित प्रमुख हिंदू देवी-देवताओं की समूची और खंडित मूर्तियां मिली थीं। केंद्रीय पुरातत्व विभाग से अनुमति मिलने के बाद बीएचयू की टीम ने 16 मार्च 2020 को मंदिर परिसर में खुदाई का कार्य आरंभ कर दिया। लेकिन इसी बीच लॉक डाउन लागू हो गया और एक सप्ताह बाद खोदाई बंद हो गई। विभाग ने मंगलवार को दोबारा खुदाई शुरू की।
टीम में शामिल प्रो. एके दुबे ने बताया कि गांव में पुरानी सभ्यता मौजूद होने के साक्ष्य मिले है। विशेषज्ञों के दावों के आधार पर शरुआती खुदाई में कुछ प्रमाण मिले है। आगे भी खुदाई के दौरान ऐतिहासिक अवशेष प्राप्त होने की पूरी संभावना है। बताया कि खुदाई के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह से पालन किया जा रहा।
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पुरातत्व विभाग के सर्वे के दौरान माटीगांव शिव मंदिर परिसर तथा गांव के आबादी वाली इलाके में दो हजार वर्ष पुरानी कुषाण कालीन ईंट और 600 से 1200 ईस्वी के काल के मध्य निर्मित प्रमुख हिंदू देवी-देवताओं की समूची और खंडित मूर्तियां मिली थीं। केंद्रीय पुरातत्व विभाग से अनुमति मिलने के बाद बीएचयू की टीम ने 16 मार्च 2020 को मंदिर परिसर में खुदाई का कार्य आरंभ कर दिया। लेकिन इसी बीच लॉक डाउन लागू हो गया और एक सप्ताह बाद खोदाई बंद हो गई। विभाग ने मंगलवार को दोबारा खुदाई शुरू की।
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टीम में शामिल प्रो. एके दुबे ने बताया कि गांव में पुरानी सभ्यता मौजूद होने के साक्ष्य मिले है। विशेषज्ञों के दावों के आधार पर शरुआती खुदाई में कुछ प्रमाण मिले है। आगे भी खुदाई के दौरान ऐतिहासिक अवशेष प्राप्त होने की पूरी संभावना है। बताया कि खुदाई के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह से पालन किया जा रहा।
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