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रिमझिम बारिश ने बदला मौसम का मिजाज
संवाददाता चंदौली अमर उजाला
Updated Mon, 15 Dec 2014 01:44 AM IST
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रिमझिम बारिश ने रविवार को मौसम के मिजाज को एकदम से बदल दिया। सुबह जहां आसमान में बादल छाए होने से ठंड में कमी थी, वहीं दोपहर बाद हुई रिमझिम बारिश ने गलन और ठंडक को बढ़ा दिया।
इससे लोग ठुठरने को विवश हो गए। ठंड से बचने के लिए लोग घरों में दुबके रहे और खुद को गर्म रखने के लिए अलाव का सहारा लिया। दूसरी ओर खेतों में पड़ी धान की फसल के प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है। सिवान में किसान धान के बोझ को समेटते हुए नजर आए।
दरअसल बीते दो दिनों से आसमान में बादल छाए होने से किसान बारिश की संभावना से चिंतित थे। इसे देखते हुए किसान सिवान में काटकर छोड़ी गई धान की फसल को समेटने में तेजी से लगे हुए थे। रविवार को दोपहर बाद आसमान से रिमझिम फुहारे बरसने लगी। किसान अपनी फसल को बचाने के लिए सिवान में जद्दोजहद करते नजर आए। अचानक हुई बारिश ने मौसम का मिजाज एकदम से बदल कर रख दिया।
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बारिश की फुहारों से ठंड बढ़ गई। लोगों ने खुद को ठंड से बचाने के लिए गर्म कपड़ों व अलाव का सहारा दिया। सबसे अधिक दिक्कतें गरीब तबके के लोगों को हुई, जिनके पास सिर छिपाने के लिए खुद का आशियाना नहीं है। मौसम में परिवर्तन का असर रहा कि लोग शाम होने से पहले ही घरों के अंदर कैद हो गए और खुद को गर्म करने के लिए हिटर और अलाव का सहारा लिया।
दूसरी ओर रिमझिम बारिश से सड़कों पर किचड़ फैल गया। वहीं शिकारगंज में रविवार को पूरे दिन ठंड से आम जनजीवन प्रभावित रहा।
बूंदा बांदी से गलन बढ़ गई है। क्षेत्र के संतोष , राममोहन, राजेश कुमार, राकेश पांडेय ने गलन को देखते हुए गांवाें में अलाव जलाने की मांग तहसील प्रशासन से की है।
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इससे लोग ठुठरने को विवश हो गए। ठंड से बचने के लिए लोग घरों में दुबके रहे और खुद को गर्म रखने के लिए अलाव का सहारा लिया। दूसरी ओर खेतों में पड़ी धान की फसल के प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है। सिवान में किसान धान के बोझ को समेटते हुए नजर आए।
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दरअसल बीते दो दिनों से आसमान में बादल छाए होने से किसान बारिश की संभावना से चिंतित थे। इसे देखते हुए किसान सिवान में काटकर छोड़ी गई धान की फसल को समेटने में तेजी से लगे हुए थे। रविवार को दोपहर बाद आसमान से रिमझिम फुहारे बरसने लगी। किसान अपनी फसल को बचाने के लिए सिवान में जद्दोजहद करते नजर आए। अचानक हुई बारिश ने मौसम का मिजाज एकदम से बदल कर रख दिया।
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बारिश की फुहारों से ठंड बढ़ गई। लोगों ने खुद को ठंड से बचाने के लिए गर्म कपड़ों व अलाव का सहारा दिया। सबसे अधिक दिक्कतें गरीब तबके के लोगों को हुई, जिनके पास सिर छिपाने के लिए खुद का आशियाना नहीं है। मौसम में परिवर्तन का असर रहा कि लोग शाम होने से पहले ही घरों के अंदर कैद हो गए और खुद को गर्म करने के लिए हिटर और अलाव का सहारा लिया।
दूसरी ओर रिमझिम बारिश से सड़कों पर किचड़ फैल गया। वहीं शिकारगंज में रविवार को पूरे दिन ठंड से आम जनजीवन प्रभावित रहा।
बूंदा बांदी से गलन बढ़ गई है। क्षेत्र के संतोष , राममोहन, राजेश कुमार, राकेश पांडेय ने गलन को देखते हुए गांवाें में अलाव जलाने की मांग तहसील प्रशासन से की है।