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Chandauli News: किसी भी सीएचसी पर ऑपरेशन से नहीं होते प्रसव, कहीं 13 तो कहीं दो साल से व्यवस्था ठप
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पीडीडीयू नगर। जिले के चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सामान्य प्रसव की सुविधा तो है, लेकिन जटिल प्रसव के दौरान ऑपरेशन की व्यवस्था वर्षों से ठप है। कहीं 13 साल तो कहीं दो साल से एक भी प्रसव ऑपरेशन के जरिये नहीं हुआ।
महिला सर्जन की तैनाती नहीं होने के कारण इन केंद्रों से हर महीने 50 से ज्यादा महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। इससे दूरदराज और वनांचल की गर्भवती महिलाओं को पीड़ा सहते हुए लंबा सफर तय करना पड़ता है।
जिले में चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, लेकिन लंबे समय से कहीं भी महिला सर्जन की तैनाती नहीं है। ऐसे में कहीं भी ऑपरेशन से प्रसव नहीं हो रहे। सामान्य प्रसव के दौरान बच्चा फंसने या जटिल स्थिति उत्पन्न होने के कारण महिलाओं को जिला अस्पताल या किसी अन्य अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
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दर्द से कराहती महिलाओं को जिला अस्पताल पहुंचने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ता है। इससे सबसे ज्यादा समस्या नौगढ़ के ग्रामीण इलाके के लोगों को होती है। प्रसव पीड़ा से परेशान महिलाओं को यहां से सोनभद्र के लिए 50 किलोमीटर और चकिया जिला अस्पताल पहुंचने के लिए 60 किमी का सफर तय करना पड़ता है। हालांकि सामान्य प्रसव सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हो रहे हैं।
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केस-1
नौगढ़ में दो साल से एक भी ऑपरेशन से प्रसव नहीं
वनांचल के 122 गांवों की एक लाख से ज्यादा आबादी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ पर निर्भर है। यहां हर महीने करीब 80 से 90 प्रसव होते हैं, लेकिन पिछले दो साल में ऑपरेशन के जरिये एक भी प्रसव नहीं हुआ है। महिला सर्जन नहीं होने से हर महीने 20 महिलाओं को 60 किमी दूर जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। सीएचसी को एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) का दर्जा प्राप्त है, लेकिन ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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केस-2
भोगवारे सीएचसी में 13 साल से बंद है ऑपरेशन
50 से ज्यादा गांवों की एक लाख से ज्यादा आबादी के लिए पीडीडीयू नगर की भोगवारे सीएचसी में 13 साल से कोई भी प्रसव ऑपरेशन से नहीं हुआ। यहां भी महिला सर्जन नहीं है, जिसके कारण ऑपरेशन से प्रसव की व्यवस्था ठप है। सीएचसी प्रभारी डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि हर महीने में यहां 20-25 नार्मल डिलिवरी होती है। वहीं, ऑपरेशन से प्रसव के मामले में 5 से 7 महिलाओं को राजकीय महिला चिकित्सालय या कीनाराम मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है।
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केस-3
धानापुर में पांच साल से नहीं हुई सर्जरी
धानापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से चहनिया, बलुआ सहित 40 से ज्यादा गांवों की आबादी जुड़ी है। यहां भी महिला सर्जन नहीं होने के कारण पिछले पांच साल से ऑपरेशन से प्रसव की सुविधा ठप है। सीएचसी प्रभारी डॉ. रीतेश सिंह ने बताया कि अस्पताल में हर महीने 200-250 नार्मल डिलिवरी होती है। सर्जन नहीं होने के कारण ऑपरेशन से प्रसव के लिए 29-30 महिलाओं को हर महीने जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
केस-4
सकलडीहा में दो साल से महिला सर्जन नहीं
सकलडीहा सीएचसी पर 60 से अधिक गांव जुड़े हैं। यहां रोज 400 से ज्यादा मरीजों की ओपीडी होती है। दो साल से महिला सर्जन नहीं होने की वजह से यहां भी ऑपरेशन से प्रसव की सुविधा ठप है। दो साल पहले यहां हर महीने पांच से दस प्रसव ऑपरेशन से होते थे लेकिन अब बंद है। यहां हर महीने 50 से ज्यादा नार्मल डिलिवरी होती है। वहीं, पांच से ज्यादा महिलाओं को ऑपरेशन से प्रसव के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
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कोट--
- रात में बेटी के पेट में तेज दर्द हुआ तो उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ ले जाया गया। वहां महिला चिकित्सक नहीं होने पर गंभीर हालत में उसे 50 किलोमीटर दूर सोनभद्र के निजी अस्पताल ले जाना पड़ा। उस समय बेटी की जान बचाने की चिंता थी। - प्रीति देवी, नौगढ़
- सात महीने पहले भाभी को प्रसव के लिए नौगढ़ सीएचसी ले गए थे। वहां महिला चिकित्सक नहीं होने की बात कहते हुए रेफर कर दिया गया। इसके बाद करीब 60 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल जाना पड़ा। क्षेत्र के लोगों को ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। - फैजल, सेमरा
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भोगवारे में सर्जरी की सुविधा नहीं होने के कारण 50 से ज्यादा गांव की महिलाओं को राजकीय महिला चिकित्सालय जाना पड़ता है। यहां व्यवस्था हो जाती तो क्षेत्र के लोगों को काफी राहत मिलती। - नेहा शर्मा, भोगवारे
- भोगवारे सीएचसी में इलाज तो होता है, लेकिन प्रसव के समय इमरजेंसी या सर्जरी की जरूरत होने पर महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में दर्द से कराहती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। - सुनीता प्रजापति
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कोट-- -
सीएचसी में डॉक्टरों की कमी के कारण समस्या आ रही है। शासन को कई बार पत्र भेजा जा चुका है। जैसे ही जिले में डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी तैनाती की जाएगी। - डॉ. परितोष मिश्रा, सीएमओ
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महिला सर्जन की तैनाती नहीं होने के कारण इन केंद्रों से हर महीने 50 से ज्यादा महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। इससे दूरदराज और वनांचल की गर्भवती महिलाओं को पीड़ा सहते हुए लंबा सफर तय करना पड़ता है।
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जिले में चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, लेकिन लंबे समय से कहीं भी महिला सर्जन की तैनाती नहीं है। ऐसे में कहीं भी ऑपरेशन से प्रसव नहीं हो रहे। सामान्य प्रसव के दौरान बच्चा फंसने या जटिल स्थिति उत्पन्न होने के कारण महिलाओं को जिला अस्पताल या किसी अन्य अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
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दर्द से कराहती महिलाओं को जिला अस्पताल पहुंचने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ता है। इससे सबसे ज्यादा समस्या नौगढ़ के ग्रामीण इलाके के लोगों को होती है। प्रसव पीड़ा से परेशान महिलाओं को यहां से सोनभद्र के लिए 50 किलोमीटर और चकिया जिला अस्पताल पहुंचने के लिए 60 किमी का सफर तय करना पड़ता है। हालांकि सामान्य प्रसव सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हो रहे हैं।
केस-1
नौगढ़ में दो साल से एक भी ऑपरेशन से प्रसव नहीं
वनांचल के 122 गांवों की एक लाख से ज्यादा आबादी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ पर निर्भर है। यहां हर महीने करीब 80 से 90 प्रसव होते हैं, लेकिन पिछले दो साल में ऑपरेशन के जरिये एक भी प्रसव नहीं हुआ है। महिला सर्जन नहीं होने से हर महीने 20 महिलाओं को 60 किमी दूर जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। सीएचसी को एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) का दर्जा प्राप्त है, लेकिन ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
केस-2
भोगवारे सीएचसी में 13 साल से बंद है ऑपरेशन
50 से ज्यादा गांवों की एक लाख से ज्यादा आबादी के लिए पीडीडीयू नगर की भोगवारे सीएचसी में 13 साल से कोई भी प्रसव ऑपरेशन से नहीं हुआ। यहां भी महिला सर्जन नहीं है, जिसके कारण ऑपरेशन से प्रसव की व्यवस्था ठप है। सीएचसी प्रभारी डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि हर महीने में यहां 20-25 नार्मल डिलिवरी होती है। वहीं, ऑपरेशन से प्रसव के मामले में 5 से 7 महिलाओं को राजकीय महिला चिकित्सालय या कीनाराम मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है।
केस-3
धानापुर में पांच साल से नहीं हुई सर्जरी
धानापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से चहनिया, बलुआ सहित 40 से ज्यादा गांवों की आबादी जुड़ी है। यहां भी महिला सर्जन नहीं होने के कारण पिछले पांच साल से ऑपरेशन से प्रसव की सुविधा ठप है। सीएचसी प्रभारी डॉ. रीतेश सिंह ने बताया कि अस्पताल में हर महीने 200-250 नार्मल डिलिवरी होती है। सर्जन नहीं होने के कारण ऑपरेशन से प्रसव के लिए 29-30 महिलाओं को हर महीने जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
केस-4
सकलडीहा में दो साल से महिला सर्जन नहीं
सकलडीहा सीएचसी पर 60 से अधिक गांव जुड़े हैं। यहां रोज 400 से ज्यादा मरीजों की ओपीडी होती है। दो साल से महिला सर्जन नहीं होने की वजह से यहां भी ऑपरेशन से प्रसव की सुविधा ठप है। दो साल पहले यहां हर महीने पांच से दस प्रसव ऑपरेशन से होते थे लेकिन अब बंद है। यहां हर महीने 50 से ज्यादा नार्मल डिलिवरी होती है। वहीं, पांच से ज्यादा महिलाओं को ऑपरेशन से प्रसव के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
कोट
- रात में बेटी के पेट में तेज दर्द हुआ तो उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ ले जाया गया। वहां महिला चिकित्सक नहीं होने पर गंभीर हालत में उसे 50 किलोमीटर दूर सोनभद्र के निजी अस्पताल ले जाना पड़ा। उस समय बेटी की जान बचाने की चिंता थी। - प्रीति देवी, नौगढ़
- सात महीने पहले भाभी को प्रसव के लिए नौगढ़ सीएचसी ले गए थे। वहां महिला चिकित्सक नहीं होने की बात कहते हुए रेफर कर दिया गया। इसके बाद करीब 60 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल जाना पड़ा। क्षेत्र के लोगों को ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। - फैजल, सेमरा
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भोगवारे में सर्जरी की सुविधा नहीं होने के कारण 50 से ज्यादा गांव की महिलाओं को राजकीय महिला चिकित्सालय जाना पड़ता है। यहां व्यवस्था हो जाती तो क्षेत्र के लोगों को काफी राहत मिलती। - नेहा शर्मा, भोगवारे
- भोगवारे सीएचसी में इलाज तो होता है, लेकिन प्रसव के समय इमरजेंसी या सर्जरी की जरूरत होने पर महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में दर्द से कराहती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। - सुनीता प्रजापति
कोट
सीएचसी में डॉक्टरों की कमी के कारण समस्या आ रही है। शासन को कई बार पत्र भेजा जा चुका है। जैसे ही जिले में डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी तैनाती की जाएगी। - डॉ. परितोष मिश्रा, सीएमओ