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Chandauli News: राज्यसभा में दर्शना सिंह ने उठाई धान क्लस्टर स्थापना की मांग
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सदन में बोलतीं राज्यसभा सांसद दर्शना सिंह। स्रोत:-जागरूक पाठक
-शून्यकाल में किसानों की समस्या उठाते हुए केंद्र सरकार से की पहल की मांग
-- धान के भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन की बेहतर व्यवस्था पर दिया जोर
चंदौली। देश के उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान राज्यसभा सांसद दर्शना सिंह ने चंदौली में धान क्लस्टर की स्थापना की मांग की। कहा कि चंदौली को पूर्वांचल का धान का कटोरा कहा जाता है। यहां के किसान हर वर्ष बड़े पैमाने पर धान का उत्पादन कर प्रदेश और देश की खाद्य सुरक्षा में अहम योगदान देते हैं।
कहा कि चंदौली के अधिकांश किसान छोटे और सीमांत किसान हैं, जो पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरीकों से खेती करते हैं। लेकिन धान के सुरक्षित भंडारण और वैज्ञानिक प्रसंस्करण की पर्याप्त व्यवस्था न होने से कई बार उन्हें उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। कटाई के बाद धान में नमी अधिक रहने पर उसके खराब होने की आशंका रहती है, किसानों को मजबूरी में कम दाम पर उपज बेचनी पड़ती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज अनाज उत्पादन के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है। चावल उत्पादन में भी देश अग्रणी स्थान पर है। दर्शना सिंह ने कहा कि चंदौली जैसे बड़े धान उत्पादक क्षेत्र में धान क्लस्टर की स्थापना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी होगी। चंदौली का धान उत्पादन केवल जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है। यदि यहां धान क्लस्टर स्थापित किया जाता है तो इससे मिर्जापुर, सोनभद्र, गाजीपुर और जौनपुर समेत आसपास के जिलों के किसानों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। धान के भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन की बेहतर व्यवस्था विकसित होगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। चंदौली भौगोलिक दृष्टि से भी धान क्लस्टर के लिए उपयुक्त स्थान है। यहां रेल और सड़क परिवहन की बेहतर सुविधा उपलब्ध है, जिससे धान और चावल को देश के विभिन्न हिस्सों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।
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चंदौली। देश के उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान राज्यसभा सांसद दर्शना सिंह ने चंदौली में धान क्लस्टर की स्थापना की मांग की। कहा कि चंदौली को पूर्वांचल का धान का कटोरा कहा जाता है। यहां के किसान हर वर्ष बड़े पैमाने पर धान का उत्पादन कर प्रदेश और देश की खाद्य सुरक्षा में अहम योगदान देते हैं।
कहा कि चंदौली के अधिकांश किसान छोटे और सीमांत किसान हैं, जो पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरीकों से खेती करते हैं। लेकिन धान के सुरक्षित भंडारण और वैज्ञानिक प्रसंस्करण की पर्याप्त व्यवस्था न होने से कई बार उन्हें उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। कटाई के बाद धान में नमी अधिक रहने पर उसके खराब होने की आशंका रहती है, किसानों को मजबूरी में कम दाम पर उपज बेचनी पड़ती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज अनाज उत्पादन के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है। चावल उत्पादन में भी देश अग्रणी स्थान पर है। दर्शना सिंह ने कहा कि चंदौली जैसे बड़े धान उत्पादक क्षेत्र में धान क्लस्टर की स्थापना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी होगी। चंदौली का धान उत्पादन केवल जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है। यदि यहां धान क्लस्टर स्थापित किया जाता है तो इससे मिर्जापुर, सोनभद्र, गाजीपुर और जौनपुर समेत आसपास के जिलों के किसानों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। धान के भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन की बेहतर व्यवस्था विकसित होगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। चंदौली भौगोलिक दृष्टि से भी धान क्लस्टर के लिए उपयुक्त स्थान है। यहां रेल और सड़क परिवहन की बेहतर सुविधा उपलब्ध है, जिससे धान और चावल को देश के विभिन्न हिस्सों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।
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