चंदौलीः खेल महाकुंभ में दधिबल सिंह ने जीते दो गोल्ड मेडल, एक कांस्य मेडल पर भी जमाया कब्जा
महाराष्ट्र के नासिक में हुए पहले नेशनल वेटेरन्स एंड गेम्स चैंपियनशिप, राष्ट्रीय खेल महाकुंभ में चंदौली के दधिबल सिंह चौहान ने दो गोल्ड मेडल और एक कांस्य मेडल जीतकर जिले का मान बढ़ाया है।
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महाराष्ट्र के नासिक में 11 से 14 नवंबर को आयोजित पहले नेशनल वेटेरन्स एंड गेम्स चैंपियनशिप, राष्ट्रीय खेल महाकुंभ में चंदौली के दधिबल सिंह चौहान (56) ने दो गोल्ड मेडल और एक कांस्य मेडल जीत लिया है। शहाबगंज के केराडीह के निवासी दधिबल सिंह ने 10 किमी दौड़ और 500 मीटर वॉक कंप्टीशन में गोल्ड और तीन किमी वॉक प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता है।
जिले के शहाबगंज थाना क्षेत्र के केराडीह निवासी दधिबल सिंह चौहान अपने परिवार के साथ रामनगर में रहते हैं। वे आर्मी कैंप गोवा ट्रैनर के पद पर तैनात थे और 2008 में सेवानिवृत हुए। परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब होने की वजह से उन्होंने बीएचयू में सुरक्षाकर्मी की नौकरी कर ली। स्थिति यह रही कि नौकरी के दौरान पूरे दस वर्षों तक वे रोजाना सुबह और शाम दौड़ते हुए बीएचयू जाते और आते थे।
कोरोना काल के दौरान एक मरीज के भागने के बाद बीएचयू प्रशासन ने इन्हें हटा दिया। ये उच्चाधिकारियों से गुहार लगाते रहे कि मेरी कोई गलती नहीं है पर किसी ने कुछ नहीं सुनी। नौकरी छूटने के बाद भी दधिबल ने हार नहीं मानी और प्रैक्टिस जारी रखी।
जिले का नाम रोशन किया
उन्होंने 11 से 14 नवंबर से नासिक में आयोजित खेल महाकुंभ में प्रतिभाग किया और राष्ट्रीय स्तर पर 10 किमी दौड़ और पांच सौ मीटर वॉक में गोल्ड के साथ तीन किमी वॉक में कास्य पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है।
कर्ज लेकर महाकुंभ में गए, एशियन गेम्स में जाने के पैसे नहीं
नासिक में सोना जीतने वाले दधिबल सिंह चौहान ने अमर उजाला से बातचीत में काफी निराश होकर कहा कि खेलमहाकुंभ में एक मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को जहां उनके जनपद में भव्य स्वागत किया गया वहीं अपने यहां किसी ने फोन कर बधाई तक नहीं दी।
दधिबल ने बताया कि मेरा चयन थाईलैंड में होने वाले मास्टर एशियन गेम में भी हुआ है पर वहां जाने के लिए 50-60 हजार रुपये का खर्च है। उतने पैसे मेरे पास नहीं हैं। इसलिए चाहकर भी वहां नहीं जा सकता। बताया कि मैं कर्ज पर पैसे लेकर नासिक खेलकूद प्रतियोगिता में भाग लेने गया था। संवाद