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प्रवचन में भीड़
ब्यूरो अमर उजाला चंदौली
Updated Tue, 21 Apr 2015 01:52 AM IST
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गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा के अंतिम दिन सोमवार को महिलाओं एवं
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पुरुषों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दूर दराज से भारी संख्या में लोग कथा श्रवण
करने पहुंचे।
वहीं आयोजक मंडल द्वारा इस अवसर पर भंडारे का भी आयोजन किया गया था।
कथा के दौरान शांति कुंज हरिद्वार से पधारे कथा वाचक रामतपस्या आचार्य ने कहा कि दीप यज्ञ की एक अलग पहचान हैं। जिस प्रकार अंधकार को उजाले की एक किरण दूर कर देती हैं।
वहीं दीप यज्ञ के माध्यम से कथा सुनने आए महिलाएं एवं पुरुषों के ऊपर व्याप्त अंधकार दूर हो जाता है और सुविचार का प्रकश फैल जाता है। कहा कि हमारे समाज में अप संस्कृति का विस्तार हो गया है। हमें विदेशी परिधानों का परित्याग कर भारतीय परिधान को ग्रहण करना चाहिए।
उन्होंने युवाओं को आह्नान करते हुए कहा कि हम बदलेंगे, युग बदलेगा तभी देश का कल्याण होगा। वहीं दीप यज्ञ के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के बाद आलौकिक छटा देखते ही बन रही थी।
कार्यक्रम के अंत में शांति कुंज से आए अतिथियों का विदाई कार्य किया गया। कार्यक्रम में भोला सिंह, रामजी, अवधेश जायसवाल, सत्यनारायण, राजेंद्र आदि मौजूद रहे।
वहीं आयोजक मंडल द्वारा इस अवसर पर भंडारे का भी आयोजन किया गया था।
कथा के दौरान शांति कुंज हरिद्वार से पधारे कथा वाचक रामतपस्या आचार्य ने कहा कि दीप यज्ञ की एक अलग पहचान हैं। जिस प्रकार अंधकार को उजाले की एक किरण दूर कर देती हैं।
वहीं दीप यज्ञ के माध्यम से कथा सुनने आए महिलाएं एवं पुरुषों के ऊपर व्याप्त अंधकार दूर हो जाता है और सुविचार का प्रकश फैल जाता है। कहा कि हमारे समाज में अप संस्कृति का विस्तार हो गया है। हमें विदेशी परिधानों का परित्याग कर भारतीय परिधान को ग्रहण करना चाहिए।
उन्होंने युवाओं को आह्नान करते हुए कहा कि हम बदलेंगे, युग बदलेगा तभी देश का कल्याण होगा। वहीं दीप यज्ञ के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के बाद आलौकिक छटा देखते ही बन रही थी।
कार्यक्रम के अंत में शांति कुंज से आए अतिथियों का विदाई कार्य किया गया। कार्यक्रम में भोला सिंह, रामजी, अवधेश जायसवाल, सत्यनारायण, राजेंद्र आदि मौजूद रहे।