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हर बुखार व खांसी को न समझें कोरोना
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पीडीडीयू नगर। हर बुखार, खांसी या सर्दी को कोरोना न समझें। बुखार होने पर इसकी कुशल चिकित्सक से जांच कराएं और दवा लें। इसके बाद भी बुखार कम न हो, सूखी खांसी आती रहे और सूंघने की क्षमता अत्यधिक कम हो जाए तो कोरोना की जांच कराएं।
यह परामर्श कैलाशपुरी के आस्था क्लीनिक के संचालक व ह्दयरोग विशेषज्ञ डा. प्रदीप गुप्ता ने दिए। कहा कि कोरोना से बचाव के लिए रोब प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए चिकित्सक की सलाह पर प्रतिदिन विटामिन सी व बी की गोली ली जा सकती है। इसके अलावा विटामिन सी से भरपूर नींबू, संतरा आदि फलों का सेवन करना भी फायदेमंद है। कहा कि नियमित व्यायाम करने, टहलने, योगाभ्यास करने से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कपालभाति व अनुलोम-विलोम का अभ्यास व्यक्ति के श्वसन तंत्र को रोग से लड़ने में सहायता प्रदान करता है। सभी को कम से कम सात से आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए। इससे शरीर का मिल्टोनिन हार्मोन मजबूत होता है जो रोग से लड़ने में सहायता प्रदान करता है। इसके अलावा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में गिलोय, तुलसी, काली मिर्च, हल्दी व अदरक से बना काढ़ा भी सहायक होता है। कहा कि इस समय 60 वर्ष की आयु के लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। इसके अलावा टीबी, मधुमेह, दमा, ब्लड प्रेशर व गुर्दा से संबंधित रोगों के मरीजों को विशेष खतरा होता है। इन मरीजों को हमेशा अपने डाक्टर की निगरानी में रहकर उनकी सलाह के अनुसार दवा लेनी चाहिए।
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यह परामर्श कैलाशपुरी के आस्था क्लीनिक के संचालक व ह्दयरोग विशेषज्ञ डा. प्रदीप गुप्ता ने दिए। कहा कि कोरोना से बचाव के लिए रोब प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए चिकित्सक की सलाह पर प्रतिदिन विटामिन सी व बी की गोली ली जा सकती है। इसके अलावा विटामिन सी से भरपूर नींबू, संतरा आदि फलों का सेवन करना भी फायदेमंद है। कहा कि नियमित व्यायाम करने, टहलने, योगाभ्यास करने से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कपालभाति व अनुलोम-विलोम का अभ्यास व्यक्ति के श्वसन तंत्र को रोग से लड़ने में सहायता प्रदान करता है। सभी को कम से कम सात से आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए। इससे शरीर का मिल्टोनिन हार्मोन मजबूत होता है जो रोग से लड़ने में सहायता प्रदान करता है। इसके अलावा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में गिलोय, तुलसी, काली मिर्च, हल्दी व अदरक से बना काढ़ा भी सहायक होता है। कहा कि इस समय 60 वर्ष की आयु के लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। इसके अलावा टीबी, मधुमेह, दमा, ब्लड प्रेशर व गुर्दा से संबंधित रोगों के मरीजों को विशेष खतरा होता है। इन मरीजों को हमेशा अपने डाक्टर की निगरानी में रहकर उनकी सलाह के अनुसार दवा लेनी चाहिए।
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