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निराजल रह कर लगाया खीर का भोग
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sun, 06 Nov 2016 01:12 AM IST
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मुगलसराय मानसरोवर तालाब पर पूजा करती छठ की व्रती महिलाएं।
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लोक आस्था के महापर्व डाला छठ के दूसरे दिन शनिवार को व्रतियों ने दिन भर निराजल रहकर सूर्योपासना की और शाम को अत्यंत शुद्धतापूर्वक दूध, चावल और गुड़ की खीर, पूड़ी आदि तैयार की और चंद्रदर्शन के बाद पूजन अर्चन कर भोग लगाया। इसके पूर्व विभिन्न सरोवरों पर पहुंच कर सूर्य अर्घ्य के लिए वेदी तैयार की और पूजा-अर्चना के बाद दीपदान किया।
दूसरे सुबह स्नान ध्यान के बाद व्रती पूजन-अर्चन में जुट गए। दिन भर निराजल व्रत रहकर दिन भर सूर्य को अर्घ्य देने के लिए प्रसाद आदि की तैयारी में जुट गए। शाम के वक्त गंगा नदी, सहित अन्य सरोवर के तटों पर पहुंच कर वेदी बनायी और छठ मइया की पूजा की। इसके बाद सरोवर में दीपदान किया और इसके बाद घर पहुंच कर नए ईंट को जोड़ कर चूल्हा तैयार किया और इस पर लकड़ी और उपले से दूध, गुड़ और चावल की खीर तैयार की।
इसके बाद चंद्रदर्शन कर इसका भोग लगाया और एक बार जल ग्रहण किया। इसके बाद 36 घंटे के लिए निराजल व्रत की शुरुआत की। आस पड़ोस के लोगों ने भी व्रतियों के घर पहुंच कर श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। वहीं छठी मइया के गीतों से पुरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। व्रतियों ने पूरी रात जाग कर नए चूल्हे पर ही आटा और गुड़ का ठेकुआ, चावल की कसार आदि तैयार किया। रविवार की शाम व्रति सरोवर तटों पर पहुंच कर अस्ताचल गामी सूर्य को अर्घ्य देंगे।
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दूसरे सुबह स्नान ध्यान के बाद व्रती पूजन-अर्चन में जुट गए। दिन भर निराजल व्रत रहकर दिन भर सूर्य को अर्घ्य देने के लिए प्रसाद आदि की तैयारी में जुट गए। शाम के वक्त गंगा नदी, सहित अन्य सरोवर के तटों पर पहुंच कर वेदी बनायी और छठ मइया की पूजा की। इसके बाद सरोवर में दीपदान किया और इसके बाद घर पहुंच कर नए ईंट को जोड़ कर चूल्हा तैयार किया और इस पर लकड़ी और उपले से दूध, गुड़ और चावल की खीर तैयार की।
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इसके बाद चंद्रदर्शन कर इसका भोग लगाया और एक बार जल ग्रहण किया। इसके बाद 36 घंटे के लिए निराजल व्रत की शुरुआत की। आस पड़ोस के लोगों ने भी व्रतियों के घर पहुंच कर श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। वहीं छठी मइया के गीतों से पुरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। व्रतियों ने पूरी रात जाग कर नए चूल्हे पर ही आटा और गुड़ का ठेकुआ, चावल की कसार आदि तैयार किया। रविवार की शाम व्रति सरोवर तटों पर पहुंच कर अस्ताचल गामी सूर्य को अर्घ्य देंगे।
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