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चंदौली में खोला जाए केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय : दर्शना
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पीडीडीयू नगर। भाजपा की राज्यसभा सांसद दर्शना सिंह ने बृहस्पतिवार को सदन में चंदौली में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय खोलने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों और युवाओं के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। ऐसे में पूरा विश्वास है कि चंदौली में इस विश्वविद्यालय की नींव रखी जाएगी।
सांसद दर्शना सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रयास से कृषि शिक्षा और किसानों के लिए नई तकनीक का विकास तेजी से हो रहा है। चंदौली पूर्वांचल का प्रमुख हिस्सा है, जो अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक धरोहरों के साथ कृषि के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि चंदौली में विकास की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। यदि इन चुनौतियों का समाधान किया जाए, तो चंदौली कृषि, उद्योग और सामाजिक विकास के क्षेत्र में एक आदर्श जनपद बन सकता है।
उन्होंने कहा कि चंदौली को भारत सरकार ने आकांक्षी जिलों में शामिल किया है, जहां की ज्यादातर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और कृषि मुख्य व्यवसाय है।
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धान, गेहूं, गन्ना, मटर और आलू का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। हालांकि, यहां के किसानों को नई कृषि तकनीकों, जैविक खेती और वैज्ञानिक विधियों की सीमित जानकारी है।
ऐसे में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना से क्षेत्र में कृषि अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक कृषि शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही पूर्वांचल के किसानों, छात्रों और शोधकर्ताओं को लाभ मिलेगा।
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सांसद दर्शना सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रयास से कृषि शिक्षा और किसानों के लिए नई तकनीक का विकास तेजी से हो रहा है। चंदौली पूर्वांचल का प्रमुख हिस्सा है, जो अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक धरोहरों के साथ कृषि के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि चंदौली में विकास की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। यदि इन चुनौतियों का समाधान किया जाए, तो चंदौली कृषि, उद्योग और सामाजिक विकास के क्षेत्र में एक आदर्श जनपद बन सकता है।
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उन्होंने कहा कि चंदौली को भारत सरकार ने आकांक्षी जिलों में शामिल किया है, जहां की ज्यादातर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और कृषि मुख्य व्यवसाय है।
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धान, गेहूं, गन्ना, मटर और आलू का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। हालांकि, यहां के किसानों को नई कृषि तकनीकों, जैविक खेती और वैज्ञानिक विधियों की सीमित जानकारी है।
ऐसे में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना से क्षेत्र में कृषि अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक कृषि शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही पूर्वांचल के किसानों, छात्रों और शोधकर्ताओं को लाभ मिलेगा।