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Chandauli News: एक साल में 2 हजार रुपये से ज्यादा बढ़े किताबों के दाम, एक ही दुकान से सेटिंग
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पीडीडीयू नगर में निजी विद्यालयों के किताबों को घर ले जाते अभिभावक। संवाद
पीडीडीयू नगर।
चंदौली जिले के निजी कॉन्वेंट स्कूलों में किताबों की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। महज एक साल के भीतर किताबों के दाम में दो हजार रुपये से अधिक की वृद्धि हो गई है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है।
अभिभावकों के अनुसार, पिछले वर्ष कक्षा चार की किताबें लगभग 5500 रुपये में उपलब्ध थीं, जो इस वर्ष बढ़कर 7837 रुपये तक पहुंच गई हैं। इसी तरह अन्य कक्षाओं में भी किताबों के दामों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके अलावा, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी महंगी होती जा रही है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा कुछ चुनिंदा दुकानों को ही अधिकृत किया गया है, जहां से किताबें और ड्रेस खरीदने का दबाव डाला जा रहा है। इससे वे सस्ते विकल्प तलाशने में असमर्थ हो जाते हैं। कई अभिभावकों ने स्कूलों और दुकानों के बीच ‘सेटिंग’ का भी आरोप लगाया है।
किताबों के बढ़े दाम (निजी विद्यालय) रुपये में
नर्सरी – 4580
एलकेजी – 4963
यूकेजी – 5582
कक्षा 1 – 6506
कक्षा 2 – 6675
कक्षा 3 – 7445
कक्षा 4 – 7837
कक्षा 5 – 8247
हर साल बदलती किताबें और ड्रेस बना बोझ
अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों में हर वर्ष किताबें और यूनिफॉर्म बदल दी जाती हैं, जिससे पुराने सामान का उपयोग नहीं हो पाता और हर बार नया खर्च उठाना पड़ता है। यह अतिरिक्त खर्च बड़ी परेशानी बनता जा रहा है।
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अभिभावकों की आवाज
निजी स्कूलों में किताबों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल किताबों के दाम दो हजार रुपये से ज्यादा बढ़े हैं। – रजनीश सिंह डब्लू, रविनगर
हर साल किताबों की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट को बिगाड़ दिया है। सरकार को इस पर नियंत्रण करना चाहिए। समझ नहीं आ रहा कि स्कूल वालों पर किसी का नियंत्रण है या नहीं। – निशा शर्मा, भोगवार
निजी विद्यालयों में फीस के साथ प्रत्येक महीने इवेंट के नाम पर कुछ ना कुछ शुल्क लेना भारी पड़ रहा है। प्रत्येक वर्ष कॉपी, किताब के साथ ड्रेस बदले जाने से बजट बिगड़ रहा है। – सुनीता प्रजापति, मवई खुर्द
निजी कॉन्वेंट स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना आम लोगों के बस की बात नहीं है। केजी और नर्सरी में एडमिशन के नाम पर आठ से 12 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। कॉपी-किताब और ड्रेस के साथ यह राशि 15 से 20 हजार हो जा रही है। – कृष्णा जायसवाल, शाहकुटी
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई जाए और किताबों की कीमतों को नियंत्रित किया जाए। उन्होंने सरकारी स्कूलों की तर्ज पर एकरूपता लाने की भी मांग की है, ताकि हर साल किताबें बदलने की बाध्यता समाप्त हो सके।
कोट:
निजी विद्यालयों को जल्द ही नोटिस जारी किया जाएगा। अगर वे एक ही दुकान से किताबें और ड्रेस खरीदने को कहते हैं तो कार्रवाई की जाएगी। – सचिन कुमार, बीएसए, चंदौली
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चंदौली जिले के निजी कॉन्वेंट स्कूलों में किताबों की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। महज एक साल के भीतर किताबों के दाम में दो हजार रुपये से अधिक की वृद्धि हो गई है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है।
अभिभावकों के अनुसार, पिछले वर्ष कक्षा चार की किताबें लगभग 5500 रुपये में उपलब्ध थीं, जो इस वर्ष बढ़कर 7837 रुपये तक पहुंच गई हैं। इसी तरह अन्य कक्षाओं में भी किताबों के दामों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके अलावा, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी महंगी होती जा रही है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा कुछ चुनिंदा दुकानों को ही अधिकृत किया गया है, जहां से किताबें और ड्रेस खरीदने का दबाव डाला जा रहा है। इससे वे सस्ते विकल्प तलाशने में असमर्थ हो जाते हैं। कई अभिभावकों ने स्कूलों और दुकानों के बीच ‘सेटिंग’ का भी आरोप लगाया है।
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किताबों के बढ़े दाम (निजी विद्यालय) रुपये में
नर्सरी – 4580
एलकेजी – 4963
यूकेजी – 5582
कक्षा 1 – 6506
कक्षा 2 – 6675
कक्षा 3 – 7445
कक्षा 4 – 7837
कक्षा 5 – 8247
हर साल बदलती किताबें और ड्रेस बना बोझ
अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों में हर वर्ष किताबें और यूनिफॉर्म बदल दी जाती हैं, जिससे पुराने सामान का उपयोग नहीं हो पाता और हर बार नया खर्च उठाना पड़ता है। यह अतिरिक्त खर्च बड़ी परेशानी बनता जा रहा है।
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अभिभावकों की आवाज
निजी स्कूलों में किताबों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल किताबों के दाम दो हजार रुपये से ज्यादा बढ़े हैं। – रजनीश सिंह डब्लू, रविनगर
हर साल किताबों की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट को बिगाड़ दिया है। सरकार को इस पर नियंत्रण करना चाहिए। समझ नहीं आ रहा कि स्कूल वालों पर किसी का नियंत्रण है या नहीं। – निशा शर्मा, भोगवार
निजी विद्यालयों में फीस के साथ प्रत्येक महीने इवेंट के नाम पर कुछ ना कुछ शुल्क लेना भारी पड़ रहा है। प्रत्येक वर्ष कॉपी, किताब के साथ ड्रेस बदले जाने से बजट बिगड़ रहा है। – सुनीता प्रजापति, मवई खुर्द
निजी कॉन्वेंट स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना आम लोगों के बस की बात नहीं है। केजी और नर्सरी में एडमिशन के नाम पर आठ से 12 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। कॉपी-किताब और ड्रेस के साथ यह राशि 15 से 20 हजार हो जा रही है। – कृष्णा जायसवाल, शाहकुटी
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई जाए और किताबों की कीमतों को नियंत्रित किया जाए। उन्होंने सरकारी स्कूलों की तर्ज पर एकरूपता लाने की भी मांग की है, ताकि हर साल किताबें बदलने की बाध्यता समाप्त हो सके।
कोट:
निजी विद्यालयों को जल्द ही नोटिस जारी किया जाएगा। अगर वे एक ही दुकान से किताबें और ड्रेस खरीदने को कहते हैं तो कार्रवाई की जाएगी। – सचिन कुमार, बीएसए, चंदौली