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Chandauli News: जेल के अंदर बंदियों को मोबाइल देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई तय
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जेल के अंदर कुछ बंदियों को प्राइवेट मोबाइल नंबर से बात कराने की सुविधा गोपनीय तरीके से दी गई थी। इसके बदले उनसे 5-20 रुपये तक प्रति मिनट के हिसाब से लिया जाता था। यह जानकारी सूत्रों ने दी है। इस मामले में जिला जेल में तैनात कई जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी तय है। सूत्रों की मानें तो इस मामले में कई जिम्मेदारों पर गाज भी गिर सकती है।
बिहार में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का सरगना विनोद गुप्ता पर जेल के अंदर से फोन करने के मामले की जांच में यह खुलासा हुआ है। मामले में चल रही पुलिस-प्रशासन की ओर से जांच करीब-करीब पूरी हो गई है। इधर, जेल विभाग के मुख्यालय से भी मामले जांच बैठा दी गई है। जेल के जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साध लिए हैं। किसी का फोन नहीं उठा रहे हैं। पहले मामला संज्ञान में आने के बाद अधिकारी बंदी तक को क्लीन चिट दे दी थी कह रहे थे कि जेल में मैनुअल के हिसाब से उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर बात कराई गई। लेकिन, सूत्रों की मानें तो पुलिस प्रशासन की जांच में सच्चाई इसके विपरीत सामने आई है। गोपनीय तरीके से शिकायत की जांच कराने के बाद शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। शासन को रिपोर्ट भेजने के पहले खुद डीएम, एसपी, एएएसपी सिटी, सीआरओ, सीओ तक ने जेल में जाकर अपने-अपने स्तर से जांच कर ली है। अब इस रिपोर्ट को शासन को भेजा जा रहा है।
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जिला पुलिस प्रशासन मामले की जांच कर रहा है। इसके अलावा विभागीय स्तर से भी जांच मुख्यालय स्तर पर बैठाई गई है। मामले में जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।-राजेश कुमार श्रीवास्तव, डीआईजी जेल वाराणसी
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बिहार में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का सरगना विनोद गुप्ता पर जेल के अंदर से फोन करने के मामले की जांच में यह खुलासा हुआ है। मामले में चल रही पुलिस-प्रशासन की ओर से जांच करीब-करीब पूरी हो गई है। इधर, जेल विभाग के मुख्यालय से भी मामले जांच बैठा दी गई है। जेल के जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साध लिए हैं। किसी का फोन नहीं उठा रहे हैं। पहले मामला संज्ञान में आने के बाद अधिकारी बंदी तक को क्लीन चिट दे दी थी कह रहे थे कि जेल में मैनुअल के हिसाब से उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर बात कराई गई। लेकिन, सूत्रों की मानें तो पुलिस प्रशासन की जांच में सच्चाई इसके विपरीत सामने आई है। गोपनीय तरीके से शिकायत की जांच कराने के बाद शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। शासन को रिपोर्ट भेजने के पहले खुद डीएम, एसपी, एएएसपी सिटी, सीआरओ, सीओ तक ने जेल में जाकर अपने-अपने स्तर से जांच कर ली है। अब इस रिपोर्ट को शासन को भेजा जा रहा है।
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जिला पुलिस प्रशासन मामले की जांच कर रहा है। इसके अलावा विभागीय स्तर से भी जांच मुख्यालय स्तर पर बैठाई गई है। मामले में जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।-राजेश कुमार श्रीवास्तव, डीआईजी जेल वाराणसी
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