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Chandauli News: ओपीडी में रोज आ रहे किडनी के करीब 12 मरीज, 30 की रोज हो रही डायलिसिस, 65 इंतजार में
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चंदौली। गुर्दा रोग से संबंधित रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है स्थिति यह है कि जिला अस्पताल के ओपीडी में प्रति दिन 12 किडनी के मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं डायलिसिस सेंटर में रोजाना 10 बेड पर 30 मरीजों की डायलिसिस हो रही है। इसके बाद भी डायलिसिस के लिए 65 से ज्यादा मरीज इंतजार में है। ऐसे में लोग लगातार डायलिसिस के बेड बढ़ाने की भी मांग कर रहे हैं।
मुख्यालय स्थित पं. कमलापति त्रिपाठी जिला चिकित्सालय में डायलिसिस सेंटर की स्थापना की गई है, जिससे किडनी के मरीजों का डायलिसिस यहीं हो सके। इन दिनों प्रतिदिन 30 किडनी मरीज की डायलिसिस हो रही है,लेकिन इसके लिए मात्र 10 बेड है। बेड की संख्या कम होने से 65 मरीज डायलिसिस के लिए एक महीने से प्रतीक्षारत हैं। वही एक मशीन पर हेपेटाइटिस बी के मरीजों के लिए भी डायलिसिस की व्यवस्था की गई है। वहां भी 5 से ज्यादा मरीज प्रतीक्षारत हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से व्यवस्था सुधारने के लिए लगातार दावे किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इस व्यवस्था को सुधारने के लिए शासन की ओर से पांच बेड की स्थापना की व्यवस्था की गई है, लेकिन इसके देर होने के कारण मरीज को डायलिसिस के लिए प्रतीक्षा करना पड़ रहा है।
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900 की ओपीडी में 10 से ज्यादा पहुंच रहे हैं किडनी के मरीज
चंदौली। पंडित कमलापति त्रिपाठी जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन लगभग 800 से 900 ओपीडी में मरीज इलाज के लिए इन दोनों आ रहे हैं लेकिन इसमें से 10 से 12 मरीज ऐसे हैं। जो किडनी की बीमारी से प्रभावित होते हैं जब उनकी जांच कराई जाती है तो कहीं न कहीं किडनी में परेशानी आती है। उन्हें वरिष्ठ फिजिशियन के माध्यम से उनका इलाज किया जाता है ताकि उनको इस बीमारी से अधिक ग्रसित होने से बचाया जा सके। फिजिशियन डॉ. संजय कुमार का कहना है कि किडनी के मरीजों को चिकित्सकों की सलाह का अनुपालन करना चाहिए अगर ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें एक समय ऐसा आएगा जो डायलिसिस की जरूरत पड़ जाएगी ऐसे में सावधानी बरत कर ही किडनी को प्रभावित होने से बचाया जा सकता है। डायलिसिस एक चिकित्सा प्रक्रिया है। जिसमें रक्त को शुद्ध करने के लिए एक मशीन का उपयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया तब आवश्यक होती है जब गुर्दे अपना काम ठीक से नहीं कर पाते हैं और रक्त में विषाक्त पदार्थों को शुद्ध करने में असमर्थ होते हैं।
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क्यों और कैसे होता है डायलिसिस
चंदौली। डायलिसिस की आवश्यकता तब होती है जब गुर्दे की बीमारी या क्षति के कारण गुर्दे अपना काम ठीक से नहीं कर पाते हैं। मुख्यालय स्थित डायलिसिस केंद्र के प्रभारी डॉक्टर सुभाष कुमार ने बताया कि यह प्रक्रिया दो प्रकार की होती है।इसमें हेमोडायलिसिस इसमें रक्त को एक मशीन में पंप किया जाता है, जहां यह एक डायलिसर के माध्यम से पारित होता है। डायलिसर में एक विशेष तरल पदार्थ होता है जो रक्त से विषाक्त पदार्थों को साफ करता है। दूसरा पेरिटोनियल डायलिसिस है। इसमें एक विशेष तरल पदार्थ को पेट में डाला जाता है, जो रक्त से विषाक्त पदार्थों को निकालता है। यह तरल पदार्थ बाद में निकाल दिया जाता है और एक नए तरल पदार्थ से बदल दिया जाता है।
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कोट-- --
जिला अस्पताल में प्रतिदिन 30 मरीजों की डायलिसिस की जाती है। 60 से 65 मरीज ऐसे हैं, जिन्हें डायलिसिस के लिए इंतजार करना पड़ता है। यह व्यवस्था ठीक करने के लिए बेड बढ़ाए जाने के लिए शासन को अवगत कराया गया है, उम्मीद है कि जल्द ही बेड बढ़ जाएंगे।- डाॅ.सुभाष कुमार, डायलिसिस केंद्र प्रभारी, पंडित कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय चंदौली।
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मुख्यालय स्थित पं. कमलापति त्रिपाठी जिला चिकित्सालय में डायलिसिस सेंटर की स्थापना की गई है, जिससे किडनी के मरीजों का डायलिसिस यहीं हो सके। इन दिनों प्रतिदिन 30 किडनी मरीज की डायलिसिस हो रही है,लेकिन इसके लिए मात्र 10 बेड है। बेड की संख्या कम होने से 65 मरीज डायलिसिस के लिए एक महीने से प्रतीक्षारत हैं। वही एक मशीन पर हेपेटाइटिस बी के मरीजों के लिए भी डायलिसिस की व्यवस्था की गई है। वहां भी 5 से ज्यादा मरीज प्रतीक्षारत हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से व्यवस्था सुधारने के लिए लगातार दावे किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इस व्यवस्था को सुधारने के लिए शासन की ओर से पांच बेड की स्थापना की व्यवस्था की गई है, लेकिन इसके देर होने के कारण मरीज को डायलिसिस के लिए प्रतीक्षा करना पड़ रहा है।
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900 की ओपीडी में 10 से ज्यादा पहुंच रहे हैं किडनी के मरीज
चंदौली। पंडित कमलापति त्रिपाठी जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन लगभग 800 से 900 ओपीडी में मरीज इलाज के लिए इन दोनों आ रहे हैं लेकिन इसमें से 10 से 12 मरीज ऐसे हैं। जो किडनी की बीमारी से प्रभावित होते हैं जब उनकी जांच कराई जाती है तो कहीं न कहीं किडनी में परेशानी आती है। उन्हें वरिष्ठ फिजिशियन के माध्यम से उनका इलाज किया जाता है ताकि उनको इस बीमारी से अधिक ग्रसित होने से बचाया जा सके। फिजिशियन डॉ. संजय कुमार का कहना है कि किडनी के मरीजों को चिकित्सकों की सलाह का अनुपालन करना चाहिए अगर ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें एक समय ऐसा आएगा जो डायलिसिस की जरूरत पड़ जाएगी ऐसे में सावधानी बरत कर ही किडनी को प्रभावित होने से बचाया जा सकता है। डायलिसिस एक चिकित्सा प्रक्रिया है। जिसमें रक्त को शुद्ध करने के लिए एक मशीन का उपयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया तब आवश्यक होती है जब गुर्दे अपना काम ठीक से नहीं कर पाते हैं और रक्त में विषाक्त पदार्थों को शुद्ध करने में असमर्थ होते हैं।
क्यों और कैसे होता है डायलिसिस
चंदौली। डायलिसिस की आवश्यकता तब होती है जब गुर्दे की बीमारी या क्षति के कारण गुर्दे अपना काम ठीक से नहीं कर पाते हैं। मुख्यालय स्थित डायलिसिस केंद्र के प्रभारी डॉक्टर सुभाष कुमार ने बताया कि यह प्रक्रिया दो प्रकार की होती है।इसमें हेमोडायलिसिस इसमें रक्त को एक मशीन में पंप किया जाता है, जहां यह एक डायलिसर के माध्यम से पारित होता है। डायलिसर में एक विशेष तरल पदार्थ होता है जो रक्त से विषाक्त पदार्थों को साफ करता है। दूसरा पेरिटोनियल डायलिसिस है। इसमें एक विशेष तरल पदार्थ को पेट में डाला जाता है, जो रक्त से विषाक्त पदार्थों को निकालता है। यह तरल पदार्थ बाद में निकाल दिया जाता है और एक नए तरल पदार्थ से बदल दिया जाता है।
कोट
जिला अस्पताल में प्रतिदिन 30 मरीजों की डायलिसिस की जाती है। 60 से 65 मरीज ऐसे हैं, जिन्हें डायलिसिस के लिए इंतजार करना पड़ता है। यह व्यवस्था ठीक करने के लिए बेड बढ़ाए जाने के लिए शासन को अवगत कराया गया है, उम्मीद है कि जल्द ही बेड बढ़ जाएंगे।- डाॅ.सुभाष कुमार, डायलिसिस केंद्र प्रभारी, पंडित कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय चंदौली।