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Chandauli News: दोस्त को बचाने में युवक और भतीजे को बचाने में चाचा की गई जान
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शहाबगंज के किड़िहिरा गांव में कुंए में जहरीली गैस से हुई मौत के बाद जुटी भीड़ व जानकारी लेती पु
शहाबगंज। स्थानीय थाना क्षेत्र के किड़िहिरा गांव में शनिवार की दोपहर कुएं में उतरे चाचा-भतीजे समेत तीन लोगों की जहरीली गैस से मौत हो गई जबकि एक युवक की हालत गंभीर बनी हुई है। कुएं में सबमर्सिबल पंप लगाया गया था, जो ऊपर से ढका था। पंप खराब होने पर उसे निकालने के दौरान यह हादसा हुआ।
मेरे आने के बाद ही कुएं में उतरना...बड़े भाई दानिश का यह आखिरी मैसेज 18 साल के वारिस के लिए महज एक हिदायत थी, लेकिन किसे पता था कि चंद घंटों बाद यह बात जीवन और मौत का फासला बन जाएगी। दोपहर में जैसे ही वारिस कुएं के अंधेरे में ओझल हुआ और बाहर नहीं आया, बाहर खड़े दोस्त तौकीर से रहा नहीं गया। दोस्ती की खातिर वह अपनी जान की परवाह किए बिना रस्सी पकड़कर नीचे उतर गया। जब दोनों की आवाज़ आनी बंद हो गई, तो चाचू आखिर जमाका दिल दहल उठा। भतीजे और उसके दोस्त को तड़पता छोड़ चाचा पीछे कैसे हटते? अपने खून को बचाने के लिए वह भी कुएं में उतर पड़े। जहरीली गैस ने किसी को संभलने का मौका नहीं दिया। न दोस्ती काम आई और न ही चाचा का लाड-प्यार। एक-दूसरे को जिंदगी की ओर खींचने उतरे तीन मजबूत हाथ हमेशा के लिए बेजान हो गए।
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अस्पताल में डॉक्टरों ने तीन को मृत घोषित किया
वारिस के बड़े भाई दानिश अली ने बताया कि वह उस समय वाराणसी में था और उसने फोन पर वारिस को उसके आने तक कुएं में न उतरने की सख्त हिदायत दी थी। लेकिन वारिस दोपहर में कुएं में उतर गया। वाराणसी से लौटने के बाद दानिश ने ग्रामीणों की मदद से चारों को कुएं से बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने जांच के बाद आखिर जमा, तौकीर आलम और वारिस अली को मृत घोषित कर दिया, जबकि शमशेर अली का इलाज जारी है।
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मेरे आने के बाद ही कुएं में उतरना...बड़े भाई दानिश का यह आखिरी मैसेज 18 साल के वारिस के लिए महज एक हिदायत थी, लेकिन किसे पता था कि चंद घंटों बाद यह बात जीवन और मौत का फासला बन जाएगी। दोपहर में जैसे ही वारिस कुएं के अंधेरे में ओझल हुआ और बाहर नहीं आया, बाहर खड़े दोस्त तौकीर से रहा नहीं गया। दोस्ती की खातिर वह अपनी जान की परवाह किए बिना रस्सी पकड़कर नीचे उतर गया। जब दोनों की आवाज़ आनी बंद हो गई, तो चाचू आखिर जमाका दिल दहल उठा। भतीजे और उसके दोस्त को तड़पता छोड़ चाचा पीछे कैसे हटते? अपने खून को बचाने के लिए वह भी कुएं में उतर पड़े। जहरीली गैस ने किसी को संभलने का मौका नहीं दिया। न दोस्ती काम आई और न ही चाचा का लाड-प्यार। एक-दूसरे को जिंदगी की ओर खींचने उतरे तीन मजबूत हाथ हमेशा के लिए बेजान हो गए।
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अस्पताल में डॉक्टरों ने तीन को मृत घोषित किया
वारिस के बड़े भाई दानिश अली ने बताया कि वह उस समय वाराणसी में था और उसने फोन पर वारिस को उसके आने तक कुएं में न उतरने की सख्त हिदायत दी थी। लेकिन वारिस दोपहर में कुएं में उतर गया। वाराणसी से लौटने के बाद दानिश ने ग्रामीणों की मदद से चारों को कुएं से बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने जांच के बाद आखिर जमा, तौकीर आलम और वारिस अली को मृत घोषित कर दिया, जबकि शमशेर अली का इलाज जारी है।
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