{"_id":"58-81614","slug":"Chandauli-81614-58","type":"story","status":"publish","title_hn":"भवसागर पार करने को सदगुरु की कृपा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भवसागर पार करने को सदगुरु की कृपा
Chandauli
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
नियामताबाद। मऊ से पधारे रीतिश जी महाराज ने कथा में केवट व श्रीराम के चरित्र पर चर्चा करते हुए कहा कि वनगमन के दौरान भगवान श्रीराम जब गंगा के किनारे पहुंचते हैं और केवट से प्रार्थना करते हैं नौका समीप लाने के लिए। एक अखंड ज्ञान राम, बुद्ध रूपी केवट से विद्या रूपी नौका की मांग कर रहे हैं।
बुद्ध रूपी केवट से राम गंगा पार की उपाय बताते हुए कहा कि श्रीराम व केवट का संबंध व गंगा पार कराने में उस केवट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उसी तरह सद्गुरु की कृपा से भक्तों को भवसागर से पार लगाया जा सकता है। इस दौरान सैकड़ों भक्तों ने कथा का रसपान किया। वे क्षेत्र के मानस एवं अध्यात्म प्रचार समिति बौरी के तत्वावधान में नौ दिवसीय रामकथा के तीसरे दिन भक्तों को संबोधित कर रहे थे। सुधीर जी महाराज ने प्रवचन के दौरान शिव विवाह की चर्चा करते हुए कहा कि शिव विवाह के दौरान भगवान शिव के बाराती भूत, प्रेत, देवी व देवतागण शामिल हो गए। जिससे बारात का आकार बड़ा हो गया। पार्वती के पिता को भी इतनी बड़ी बारात की उम्मीद नहीं थी। भगवान शिव की इतनी बड़ी बारात का प्रबंध कैसे हो इसको लेकर पार्वती ने खुद भगवान शिव से इतनी बड़ी बारात की संचालन करने में मदद की गुहार लगाई। भगवान शिव की एक कृपा से सभी बाराती अनुशासित ढंग से बारात में रहे। आज के समय में भी वर पक्ष का यह कर्तव्य है कि बड़ी बारात ले जाते हैं तो उन्हें भी पानी व प्रकाश की व्यवस्था स्वयं करनी चाहिए।
इसको कन्या पक्ष पर डालकर अनावश्यक रूप से कन्या पक्ष पर आर्थिक दबाव नहीं डालना चाहिए। पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने भभूत व सर्पों की माला त्यागकर दूसरे रूप में पधारे और उनका विवाह सकुशल संपन्न हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
बुद्ध रूपी केवट से राम गंगा पार की उपाय बताते हुए कहा कि श्रीराम व केवट का संबंध व गंगा पार कराने में उस केवट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उसी तरह सद्गुरु की कृपा से भक्तों को भवसागर से पार लगाया जा सकता है। इस दौरान सैकड़ों भक्तों ने कथा का रसपान किया। वे क्षेत्र के मानस एवं अध्यात्म प्रचार समिति बौरी के तत्वावधान में नौ दिवसीय रामकथा के तीसरे दिन भक्तों को संबोधित कर रहे थे। सुधीर जी महाराज ने प्रवचन के दौरान शिव विवाह की चर्चा करते हुए कहा कि शिव विवाह के दौरान भगवान शिव के बाराती भूत, प्रेत, देवी व देवतागण शामिल हो गए। जिससे बारात का आकार बड़ा हो गया। पार्वती के पिता को भी इतनी बड़ी बारात की उम्मीद नहीं थी। भगवान शिव की इतनी बड़ी बारात का प्रबंध कैसे हो इसको लेकर पार्वती ने खुद भगवान शिव से इतनी बड़ी बारात की संचालन करने में मदद की गुहार लगाई। भगवान शिव की एक कृपा से सभी बाराती अनुशासित ढंग से बारात में रहे। आज के समय में भी वर पक्ष का यह कर्तव्य है कि बड़ी बारात ले जाते हैं तो उन्हें भी पानी व प्रकाश की व्यवस्था स्वयं करनी चाहिए।
विज्ञापन
इसको कन्या पक्ष पर डालकर अनावश्यक रूप से कन्या पक्ष पर आर्थिक दबाव नहीं डालना चाहिए। पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने भभूत व सर्पों की माला त्यागकर दूसरे रूप में पधारे और उनका विवाह सकुशल संपन्न हुआ।
विज्ञापन