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कला और संस्कृति को संजोने की जरूरत
Chandauli
Updated Wed, 21 May 2014 05:30 AM IST
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जौनपुर। मऊ दूरदर्शन केंद्र के कार्यक्रम अधिशासी संतोष मिश्र ने कहा कि लोक कला और संस्कृति को संजो कर रखने की जरूरत है। संस्कृति ही एक ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा देश को एक सूत्र में बांध कर विकास की दिशा दी जा सकती है। वह सोमवार को पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में आयोजित दूरदर्शन और भारतीय समाज की भूमिका विषयक गोष्ठी में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि दूरदर्शन दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क है। व्यावसायिक हितों से ऊपर उठ कर आज भी आम आदमी को ध्यान में रख कर कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। खेत खलिहान के मुद्दों को प्राथमिकता से उठाया जाता है। दूरदर्शन देश के उस आदमी को ध्यान में रख कर कार्यक्रम बनाता है, जो हमारा अन्नदाता है। उन्होंने कहा कि मीडिया का क्षेत्र काफी बड़ा है। छात्र इसमें बेहतर कॅरियर की तलाश कर सकते हैं। उन्होंने टेलीविजन फिल्म और अन्य कार्यक्रमों के निर्माण की विस्तार से जानकारी दी। कहा कि कोई भी कार्यक्रम तैयार करते समय इस बात का ध्यान जरूर रहे कि उससे कितने लोगों को लाभ मिलेगा। इस मौके पर डा. मनोज सिंह, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. दिग्विजय सिंह सहित विभाग के छात्र मौजूद थे। संचालन डा. अजय प्रताप सिंह ने किया।
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उन्होंने कहा कि दूरदर्शन दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क है। व्यावसायिक हितों से ऊपर उठ कर आज भी आम आदमी को ध्यान में रख कर कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। खेत खलिहान के मुद्दों को प्राथमिकता से उठाया जाता है। दूरदर्शन देश के उस आदमी को ध्यान में रख कर कार्यक्रम बनाता है, जो हमारा अन्नदाता है। उन्होंने कहा कि मीडिया का क्षेत्र काफी बड़ा है। छात्र इसमें बेहतर कॅरियर की तलाश कर सकते हैं। उन्होंने टेलीविजन फिल्म और अन्य कार्यक्रमों के निर्माण की विस्तार से जानकारी दी। कहा कि कोई भी कार्यक्रम तैयार करते समय इस बात का ध्यान जरूर रहे कि उससे कितने लोगों को लाभ मिलेगा। इस मौके पर डा. मनोज सिंह, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. दिग्विजय सिंह सहित विभाग के छात्र मौजूद थे। संचालन डा. अजय प्रताप सिंह ने किया।
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