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नौगढ तहसील का निर्माण अधर में, जमीन वन विभाग की निकली
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नौगढ़। क्षेत्र के देवखत गांव में नौगढ़ तहसील भवन के लिए होने वाला निर्माण कार्य अधर में लटक गया है। भूमि पूजन के बाद अब वन विभाग ने अड़ंगा लगा दिया है। वन विभाग का कहना है कि वह वन आरक्षित भूमि है और उस पर पांच साल पहले पौधरोपण भी कराया गया था। इसके चलते तहसील के भवन निर्माण का कार्य खटाई में पड़ गया है।
नौगढ़ तहसील बनने क बाद वहां कोई भवन नहीं था। अब तक तहसील कार्यालय ब्लाक मुख्यालय में संचालित होता था। तहसील के भवन निर्माण के लिए शासन से 2.64 करोड़ भी स्वीकृत हो चुके थे। इसके बाद तहसील प्रशासन ने डीएम के निर्देश पर देवखत गांव में जमीन की तलाश की थी। उसका भूमिपूजन भी हो गया। अब वन क्षेत्राधिकारी नौगढ़ रिजवान अली ने सोमवार को उप जिला अधिकारी नौगढ़ विजय बहादुर सिंह को पत्र लिखकर बताया कि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 20 के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा उक्त क्षेत्र रक्षित वन घोषित हो चुका है। ऐसे में निर्माण नहीं हो सकता। जानकारी के मुताबिक जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल ने उप जिलाधिकारी और तहसीलदार नौगढ़ को तहसील भवन निर्माण हेतु भूमि का चयन करने का निर्देश दिया था। इसके बाद तहसीलदार आनंद कुमार कनौजिया ने देवखत गांव के काश्तकारों को जमीन के बदले गांव सभा की जमीन दिए जाने पर राजी किया था। पिछले दिनों लोक निर्माण विभाग ने भूमि पूजन कर कार्य प्रारंभ कर दिया और उप जिलाधिकारी ने काश्तकारों को गांव सभा की भूमि आवंटन की कार्रवाई भी शुरू कर दिए थे। इस बीच डीएफओ मनोज खरे ने संयुक्त सर्वे सीमांकन के लिए अमीन नईमुद्दीन को भेजा तो राज्यपाल के गजट में आराजी नंबर 171 आराजी 170 क ख ग रक्षित वन अंकित था। विभाग ने 5 वर्ष पूर्व उक्त भूमि में प्लांटेशन भी कराया है। जिसके बाद वन क्षेत्राधिकारी ने उप जिलाधिकारी को पत्र लिखा है कि उक्त भूमि विभाग की धारा 20 की रक्षित वन है जिस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा और निर्माण नहीं हो सकता। इसके चलते निर्माण कार्य ठप हो गया है।
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नौगढ़ तहसील बनने क बाद वहां कोई भवन नहीं था। अब तक तहसील कार्यालय ब्लाक मुख्यालय में संचालित होता था। तहसील के भवन निर्माण के लिए शासन से 2.64 करोड़ भी स्वीकृत हो चुके थे। इसके बाद तहसील प्रशासन ने डीएम के निर्देश पर देवखत गांव में जमीन की तलाश की थी। उसका भूमिपूजन भी हो गया। अब वन क्षेत्राधिकारी नौगढ़ रिजवान अली ने सोमवार को उप जिला अधिकारी नौगढ़ विजय बहादुर सिंह को पत्र लिखकर बताया कि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 20 के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा उक्त क्षेत्र रक्षित वन घोषित हो चुका है। ऐसे में निर्माण नहीं हो सकता। जानकारी के मुताबिक जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल ने उप जिलाधिकारी और तहसीलदार नौगढ़ को तहसील भवन निर्माण हेतु भूमि का चयन करने का निर्देश दिया था। इसके बाद तहसीलदार आनंद कुमार कनौजिया ने देवखत गांव के काश्तकारों को जमीन के बदले गांव सभा की जमीन दिए जाने पर राजी किया था। पिछले दिनों लोक निर्माण विभाग ने भूमि पूजन कर कार्य प्रारंभ कर दिया और उप जिलाधिकारी ने काश्तकारों को गांव सभा की भूमि आवंटन की कार्रवाई भी शुरू कर दिए थे। इस बीच डीएफओ मनोज खरे ने संयुक्त सर्वे सीमांकन के लिए अमीन नईमुद्दीन को भेजा तो राज्यपाल के गजट में आराजी नंबर 171 आराजी 170 क ख ग रक्षित वन अंकित था। विभाग ने 5 वर्ष पूर्व उक्त भूमि में प्लांटेशन भी कराया है। जिसके बाद वन क्षेत्राधिकारी ने उप जिलाधिकारी को पत्र लिखा है कि उक्त भूमि विभाग की धारा 20 की रक्षित वन है जिस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा और निर्माण नहीं हो सकता। इसके चलते निर्माण कार्य ठप हो गया है।
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