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डायट प्राचार्य से मांगा स्पष्टीकरण
Updated Sat, 19 Aug 2017 12:16 AM IST
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चंदौली। डायट प्राचार्य पर मृतक आश्रित शिक्षकों ने शोषण का आरोप लगाते हुुए शपथ पत्र पर इसकी शिकायत मुुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री से की थी। शिक्षकों के इस आरोप को शासन ने गंभीरता से लेते हुए जांच टीम गठित कर दी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने डायट प्राचार्य से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान पर मृतक आश्रित शिक्षकों को बीटीसी की ट्रेनिंग दिया जाना था। दो वर्ष के इस प्रशिक्षण के अंतिम सेमेस्टर में बिना प्रायोगिक परीक्षा के नाम पर पांच सौ से एक हजार रुपये लिए जाने का आरोप लगाया गया था। वहीं जो लोग इस सुविधा शुल्क को देने से इंकार कर रहे थे। उन्हें बिना प्रशिक्षण के ही संबधित विद्यालय पर भेज दिया जा रहा था। जिस पर प्रशिक्षु शिक्षकों ने डायट प्राचार्य के खिलाफ लामबंद होकर जिलाधिकारी को शपथ पत्र देकर इसकी जांच कराए जाने की मांग की थी। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा इस पर कोई पहल न दिखाए जाने पर शिक्षकों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री व मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डा. महेंद्र नाथ पांडेय को शपथ पत्र देकर इसकी जांच कराए जाने की मांग की थी। शिक्षकों के इस आरोप को मुख्यमंत्री ने संज्ञान में लेते हुए डायट प्राचार्य से स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं शासन के संज्ञान लेने के बाद डायट प्राचार्य द्वारा इन शिक्षकों के ऊपर दबाव बनाया जा रहा है। इस दौरान प्रशिक्षु शिक्षक सतीश, मनोज कुमार सिंह, अनिल कुमार, मो. कासिम अंसारी, दीपक कुमार, कमलेश कुमार, संजय ने आरोप लगाया है कि डायट प्राचार्य बेसिक शिक्षा अधिकारी को साथ लेकर शिक्षकों पर दबाव बनाने का कार्य कर रहे हैं जिससे जांच प्रभावित हो सके। इस संबंध में डायट प्राचार्य डा. पारस नाथ का कहना है कि इस तरह का आरोप निराधार है। इसमें कुछ लोग जानबूझ कर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। जिन लोगों के नाम से शपथ पत्र दिया गया है। वह लोग प्राचार्य के नाम से शपथ पत्र दे चुके हैं कि उनके नाम से फर्जी शपथ पत्र बनवाकर इस प्रकार का कार्य किया जा रहा है।
जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान पर मृतक आश्रित शिक्षकों को बीटीसी की ट्रेनिंग दिया जाना था। दो वर्ष के इस प्रशिक्षण के अंतिम सेमेस्टर में बिना प्रायोगिक परीक्षा के नाम पर पांच सौ से एक हजार रुपये लिए जाने का आरोप लगाया गया था। वहीं जो लोग इस सुविधा शुल्क को देने से इंकार कर रहे थे। उन्हें बिना प्रशिक्षण के ही संबधित विद्यालय पर भेज दिया जा रहा था। जिस पर प्रशिक्षु शिक्षकों ने डायट प्राचार्य के खिलाफ लामबंद होकर जिलाधिकारी को शपथ पत्र देकर इसकी जांच कराए जाने की मांग की थी। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा इस पर कोई पहल न दिखाए जाने पर शिक्षकों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री व मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डा. महेंद्र नाथ पांडेय को शपथ पत्र देकर इसकी जांच कराए जाने की मांग की थी। शिक्षकों के इस आरोप को मुख्यमंत्री ने संज्ञान में लेते हुए डायट प्राचार्य से स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं शासन के संज्ञान लेने के बाद डायट प्राचार्य द्वारा इन शिक्षकों के ऊपर दबाव बनाया जा रहा है। इस दौरान प्रशिक्षु शिक्षक सतीश, मनोज कुमार सिंह, अनिल कुमार, मो. कासिम अंसारी, दीपक कुमार, कमलेश कुमार, संजय ने आरोप लगाया है कि डायट प्राचार्य बेसिक शिक्षा अधिकारी को साथ लेकर शिक्षकों पर दबाव बनाने का कार्य कर रहे हैं जिससे जांच प्रभावित हो सके। इस संबंध में डायट प्राचार्य डा. पारस नाथ का कहना है कि इस तरह का आरोप निराधार है। इसमें कुछ लोग जानबूझ कर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। जिन लोगों के नाम से शपथ पत्र दिया गया है। वह लोग प्राचार्य के नाम से शपथ पत्र दे चुके हैं कि उनके नाम से फर्जी शपथ पत्र बनवाकर इस प्रकार का कार्य किया जा रहा है।
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