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संगम की रेती भी अनमोल
महाकुंभ नगर(इलाहाबाद)/अमित सरन
Updated Tue, 15 Jan 2013 01:18 AM IST
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गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर बिखरी रेती भी अनमोल है। दुनिया के सबसे बड़े मेले के पहले शाही स्नान पर मुट्ठी भर रेत के लिए राजस्थान से 50 महिलाओं का जत्था इलाहाबाद चला आया। उड़ीसा से आईं 60-70 साल की बुजुर्ग महिलाएं संतों के चरणों की धूल पाने के लिए पुलिस की लाठियां खाने को तैयार दिखीं तो एमपी से आए व्यापारियों के लिए यह रेती उनकी आय का जरिया बनेगी।
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एक मुट्ठी रेत आखिर ऐसा कौन सा चमत्कार करेगी कि इसके लिए लोग अपनी जान को जोखिम में डालने को तैयार हो गए। उन्हें न तो पुलिस की लाठियों का भय रह गया और न ही कोई बैरिकेडिंग दिखी। संगम क्षेत्र की सड़कों पर शाही सवारी का काफिला जिधर से निकला, साधु-संतों के चरणों की धूल पाने के लिए भगदड़ मच गई। मान्यता है कि मुट्ठी भर यह रेत किसी के खेत में सोना पैदा करेगी तो किसी के घर को धन-धान्य से परिपूर्ण कर देगी। तमाम लोग साल भर अपने माथे पर इस मिट्टी का तिलक लगाएंगे तो कई घरों के मंदिरों में यह मिट्टी पूजी जाएगी।
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राजस्थान से आईं देवी सहित 50 महिलाएं तो साधु-संतों के चरणों की धूल पाने के लिए पुलिस की लाठी खाने को भी तैयार थीं। बिहार से आईं अनुपमा ने एक किलो रेत इकट्ठा की, उनके पुत्र और पति साल भर अपने माथे पर इस रेती का तिलक लगाएंगे। मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले से आए नारायण दास और उनके बड़े भाई ने दो किलो रेत झोले में इकट्ठा की। बकौल नारायण दास पास-पड़ोस के कुछ लोगों की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण कुंभ नगरी तक नहीं पहुंच सके, ये रेत उन्हीं के लिए ले जा रहे हैं।
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