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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Case diary: it was in the bedroom Aarushi - Hemraj's murder

जब हत्या हुई, बेडरूम में थे आरुषि और हेमराज

Wed, 10 Apr 2013 08:34 AM IST
गाजियाबाद/ब्यूरो
गाजियाबाद/ब्यूरो Updated Wed, 10 Apr 2013 08:34 AM IST
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Case diary: it was in the bedroom Aarushi - Hemraj's murder

आरुषि-हेमराज का मर्डर आरुषि के बेडरूम में ही हुआ था। गोल्फ स्टिक से उन पर वार किया गया था। मौत होने के बाद सर्जिकल ब्लेड से उनके गले काटे गए थे।

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सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस. लाल की कोर्ट में ये बयान दिए इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस गुजरात के निदेशक मोहेंदर सिंह दहिया ने।

नोएडा के चर्चित आरुषि-हेमराज मर्डर केस की सुनवाई में दहिया ने कहा कि सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए मैंने यह पाया कि इस हत्याकांड में किसी बाहरी व्यक्ति का हाथ नहीं है। मामले की अगली सुनवाई अब 11 अप्रैल को होगी।
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अभियोजन की ओर से सीनियर पीपी आरके सैनी और बीके सिंह ने गवाह डा. मोहेंदर सिंह दहिया को कोर्ट में पेश किया। गवाह ने बताया कि 9 अक्तूबर 2009 को सीबीआई टीम के साथ वह घटनास्थल पर गया था। घटनास्थल वाले मकान की पुताई हो चुकी थी।
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मकान की लोकेशन और सिचुएशन देखकर वहां से सीबीआई आफिस दिल्ली पहुंचे और विवेचक से इस केस से संबंधित विचार विमर्श किया।

13 अक्तूबर को सीबीआई एसपी देहरादून ने इस केस से संबंधित फोटोग्राफ, केस का संक्षिप्त इतिहास और अन्य दस्तावेज भेजे थे। इन सभी के आधार पर 26 अक्तूबर 2009 को मैंने अपनी रिपोर्ट तैयार की थी।

गवाह ने बताया कि अपनी जांच में मैंने पाया था कि आरुषि-हेमराज मर्डर केस में दो तरह के हथियार प्रयोग हुए थे। दोनों के गले मौत के बाद काटे गए थे।

हेमराज को मारने के बाद उसकी लाश छत पर ले जाई गई थी। उसका गला भी छत पर ही काटा गया था। जिस बेड कवर में उसकी लाश छत पर ले जाई गई, उसे बाद में खींचकर निकाल लिया गया था।

जांच में यह बात भी सामने आई है कि हेमराज का गला काटने वाले का पैर छत पर पड़े पाइप में उलझ गया। इसी के चलते उसका खूनी पंजा दरवाजे के बगल दीवार में लग गया।


डिफेंस के अधिवक्ता मनोज शिशौदिया, सत्यकेतु सिंह और तनवीर अहमद मीर ने गवाह से जिरह पूरी की। डिफेंस के सवालों का जवाब देते हुए डा. दहिया का कहना था कि मैं अपनी रिपोर्ट से आज भी 100 प्रतिशत सहमत हूं।

अपराध का कारण यह था कि बेडरूम में हालात आपत्तिजनक थे। यदि गोल्फ स्टिक से चोट आना नहीं पाई जाती तो हॉकी स्टिक से आना संभव है।

अहम मामलों में रिपोर्ट दे चुके हैं डा. दहिया

गाजियाबाद। डा. एमएस दहिया के अनुसार वह 1982 से क्राइम सीन से संबंधित रिपोर्ट दे रहे हैं। अभी तक वह 1000 से ज्यादा रिपोर्ट दे चुके हैं। इनमें मुख्य रूप से गोधरा रेल कांड, भुज भूकंप के अलावा बनारस, हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद बम धमाकों की रिपोर्ट शामिल हैं।

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