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मार्च के पहले सप्ताह में होगी बारिश
अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Mon, 29 Feb 2016 12:04 AM IST
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मौसम में बेशक गरमाहट का अहसास होने लगा है, लेकिन विशेषज्ञ मार्च के पहले सप्ताह में बारिश की संभावना जता रहे हैं। अनुमान है कि एनसीआर में तीन और चार मार्च को हलकी बूंदाबांदी हो सकती है।
जो कुछ ठंड का अहसास करा सकती है। इस बार सर्दी ने कई बार रंग बदला। बीच-बीच में गरमाहट का एहसास होता रहा। कई बार बादल भी छाए मगर अच्छी बरसात नहीं हो सकी।
दिसंबर और जनवरी में हर वर्ष बरसात होती रही है। पिछले एक पखवाड़े से लगातार तापमान बढ़ रहा है। अब विशेषज्ञों ने एक बार फिर मार्च माह के पहले सप्ताह तीन और चार मार्च को एनसीआर हलकी बूंदाबांदी की संभावना जताई है।
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मौसम विशेषज्ञ डॉ. विवेकराज का कहना है कि इस बार मौसम आंकड़ों का गणित बिगाड़ रहा है। इस बार बरसात भी नहीं हुई। मगर मार्च माह के प्रथम सप्ताह में मौसम के रंगत बदलने के आसार बन रहे हैं।
गेहूं को रोगी बना रहा मौसम
अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं में माहु (चेपा) और रतुआ के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। किसान त्वरित दवा का स्प्रे कर फसल को बचाने का प्रयास करें।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. आरएस वर्मा ने बताया कि गरमाहट भरे मौसम में गेहूं की फसल में चेपा और रतुआ खासकर पीला रतुआ की बीमारी लगने का खतरा बढ़ गया है। किसानों को चाहिए कि वह फसल का निरीक्षण करते रहे।
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जो कुछ ठंड का अहसास करा सकती है। इस बार सर्दी ने कई बार रंग बदला। बीच-बीच में गरमाहट का एहसास होता रहा। कई बार बादल भी छाए मगर अच्छी बरसात नहीं हो सकी।
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दिसंबर और जनवरी में हर वर्ष बरसात होती रही है। पिछले एक पखवाड़े से लगातार तापमान बढ़ रहा है। अब विशेषज्ञों ने एक बार फिर मार्च माह के पहले सप्ताह तीन और चार मार्च को एनसीआर हलकी बूंदाबांदी की संभावना जताई है।
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मौसम विशेषज्ञ डॉ. विवेकराज का कहना है कि इस बार मौसम आंकड़ों का गणित बिगाड़ रहा है। इस बार बरसात भी नहीं हुई। मगर मार्च माह के प्रथम सप्ताह में मौसम के रंगत बदलने के आसार बन रहे हैं।
गेहूं को रोगी बना रहा मौसम
अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं में माहु (चेपा) और रतुआ के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। किसान त्वरित दवा का स्प्रे कर फसल को बचाने का प्रयास करें।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. आरएस वर्मा ने बताया कि गरमाहट भरे मौसम में गेहूं की फसल में चेपा और रतुआ खासकर पीला रतुआ की बीमारी लगने का खतरा बढ़ गया है। किसानों को चाहिए कि वह फसल का निरीक्षण करते रहे।