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Bulandshahar News: गोशालाओं की देख-रेख के लिए ग्राम प्रधानों ने दिया डेढ़ लाख
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संवाद न्यूज एजेंसी
खुर्जा। ब्लॉक परिसर में शनिवार को खंड विकास अधिकारी प्रेमचंद की अध्यक्षता में गोशालाओं के संचालन के संबंध में बैठक आयोजित की गई। इसमें सभी ग्राम प्रधानों की ओर से 1,59,400 रुपये नकद धनराशी और 142 क्विंटल भूसा दान किया।
ब्लॉक में आयोजित बैठक में खुर्जा क्षेत्र के सभी ग्राम प्रधान, समाजसेवी और ग्रामीण शामिल हुए। जिसमें ब्लॉक अधिकारी प्रेमचंद ने गोशालाओं के संचालन में सहयोग के लिए भूसा, चारा और धनराशि अन्य रूप में दान देने के लिए प्रेरित किया। साथ ही भारतीय परंपराओं की महत्ता आदि के विषय पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गई। इसमें प्रधानों ने अपनी स्वेच्छा से दान किया। खंड विकास अधिकारी का कहना है कि शासन की ओर से गोशालाओं के संचालन के लिए धनराशि जारी की जाती है। मगर कुछ गांवों में ब्लॉक की ओर से गोशालाएं संचालित की जा रही हैं, जिनकी देख-रेख ब्लॉक की जिम्मेदारी होती है। मगर शासन की ओर से जारी किए जाने वाले बजट में पशुओं को पर्याप्त आहार और सुविधा नहीं मिल पाती है। गर्मी के मौसम में गोशालाओं में पंखें लगाए जाते हैं। समर-सेबल से पानी की व्यवस्था की जाती है। रोजाना पशुओं के स्नान और सफाई के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति होती है। उनके हरे चारे और पर्याप्त आहार के लिए व्यवस्था करनी होती है। इसमें समाजसेवियों और ग्राम प्रधान के सहयोग की आवश्यकता होती है। ऐसे में सभी लोग बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। ऐसे में निराश्रित पशुओं को सभी सहारा मिलता है।
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खुर्जा। ब्लॉक परिसर में शनिवार को खंड विकास अधिकारी प्रेमचंद की अध्यक्षता में गोशालाओं के संचालन के संबंध में बैठक आयोजित की गई। इसमें सभी ग्राम प्रधानों की ओर से 1,59,400 रुपये नकद धनराशी और 142 क्विंटल भूसा दान किया।
ब्लॉक में आयोजित बैठक में खुर्जा क्षेत्र के सभी ग्राम प्रधान, समाजसेवी और ग्रामीण शामिल हुए। जिसमें ब्लॉक अधिकारी प्रेमचंद ने गोशालाओं के संचालन में सहयोग के लिए भूसा, चारा और धनराशि अन्य रूप में दान देने के लिए प्रेरित किया। साथ ही भारतीय परंपराओं की महत्ता आदि के विषय पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गई। इसमें प्रधानों ने अपनी स्वेच्छा से दान किया। खंड विकास अधिकारी का कहना है कि शासन की ओर से गोशालाओं के संचालन के लिए धनराशि जारी की जाती है। मगर कुछ गांवों में ब्लॉक की ओर से गोशालाएं संचालित की जा रही हैं, जिनकी देख-रेख ब्लॉक की जिम्मेदारी होती है। मगर शासन की ओर से जारी किए जाने वाले बजट में पशुओं को पर्याप्त आहार और सुविधा नहीं मिल पाती है। गर्मी के मौसम में गोशालाओं में पंखें लगाए जाते हैं। समर-सेबल से पानी की व्यवस्था की जाती है। रोजाना पशुओं के स्नान और सफाई के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति होती है। उनके हरे चारे और पर्याप्त आहार के लिए व्यवस्था करनी होती है। इसमें समाजसेवियों और ग्राम प्रधान के सहयोग की आवश्यकता होती है। ऐसे में सभी लोग बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। ऐसे में निराश्रित पशुओं को सभी सहारा मिलता है।
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