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Bulandshahar News: यूरिया घोटाला..पीसीएफ के पूर्व जिला प्रबंधक समेत 10 पर लगा गैंगस्टर एक्ट
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बुलंदशहर। जनपद में चर्चित रहे सरकारी यूरिया कालाबाजारी मामले में पुलिस-प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। अनूपशहर पुलिस ने गिरोह बनाकर यूरिया की तस्करी करने वाले पीसीएफ (प्रादेशिक कोऑपरेटिव फेडरेशन) के तत्कालीन जिला प्रबंधक दिव्यांशु वर्मा समेत कुल 10 आरोपियों के खिलाफ उप्र गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है। जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद प्रभारी निरीक्षक जयकिशोर गौतम की तहरीर पर यह कार्रवाई की गई।
जिले में किसानों के हक के सरकारी यूरिया को दूसरे जनपदों में ऊंचे दामों पर बेचकर अवैध मुनाफा कमाने वाले संगठित गिरोह की रीढ़ तोड़ने के लिए पुलिस ने गैंगस्टर का शिकंजा कसा है। इस मामले में दो सगे भाई भी शामिल हैं।
10 मई 2026 को जिला कृषि अधिकारी रामकुमार यादव ने चेकिंग अभियान के दौरान तीन संदिग्ध ट्रकों को रोका था। जांच पड़ताल करने पर ट्रकों में अवैध रूप से लदी 1575 बोरी सरकारी यूरिया बरामद हुई थी। पूछताछ और प्रपत्रों की जांच में स्पष्ट हुआ कि सरकारी सब्सिडी वाली इस यूरिया को किसानों तक पहुंचाने के बजाय अवैध रूप से दूसरे जिलों में खपाने की तैयारी थी। इस मामले में थाना अनूपशहर पर आवश्यक वस्तु अधिनियम व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
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विवेचना के दौरान सामने आया कि गिरोह का सरगना पूर्व जिला प्रबंधक पीसीएफ दिव्यांशु वर्मा है, जिसने अपने पद का दुरुपयोग कर यह संगठित सिंडिकेट खड़ा किया था। इस मामले में कुछ आरोपियों पर रासुका के तहत भी कार्रवाई की थी।
वहीं अब पुलिस की ओर से तैयार किए गए गैंग चार्ट के अनुसार, गिरोह के सदस्यों में भंडारनायक रमेंद्र उर्फ गुड्डू निवासी बिजनौर, असलम निवासी रामपुर, शेरअली निवासी बदायूं, श्योपाल निवासी संभल, पीसीएफ भंडारनायक हरेन्द्र पाल सिंह खुर्जा, हरेन्द्र का भाई सहायक लेखाकार यश राघव खुर्जा, मो. हारून रामपुर, सलीम खां उर्फ हब्बी उस्ताद रामपुर और मो. दिलशाद निवासी बदायूं शामिल हैं।
विवेचना में खुलासा हुआ कि यह सिंडिकेट लंबे समय से सक्रिय था। पीसीएफ के गोदामों से सरकारी खाद की बोरियों को फर्जी बिलों और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे बाहर निकाला जाता था और फिर बदायूं, रामपुर, संभल समेत अन्य सीमावर्ती जनपदों में निजी व्यापारियों को महंगे दामों पर बेच दिया जाता था।
इस अवैध धंधे से आरोपियों ने करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति अर्जित की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संगठित अपराध और माफिया तंत्र पर नकेल कसने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है। गैंगस्टर एक्ट लगने के बाद अब पुलिस धारा 14(1) के तहत आरोपियों द्वारा अपराध से कमाई गई संपत्तियों का ब्योरा जुटा रही है, जिसे जल्द ही कुर्क किया जाएगा।
कोट..
सरकारी खाद की कालाबाजारी कर किसानों के हक पर डाका डालने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पीसीएफ के तत्कालीन जिला प्रबंधक समेत सभी दस आरोपियों को गैंगस्टर एक्ट में निरुद्ध कर दिया गया है। पुलिस निष्पक्ष और ठोस पैरवी कर आरोपियों को कड़ी सजा दिलाएगी। - अंतरिक्ष जैन,
प्रभारी एसएसपी
जिले में किसानों के हक के सरकारी यूरिया को दूसरे जनपदों में ऊंचे दामों पर बेचकर अवैध मुनाफा कमाने वाले संगठित गिरोह की रीढ़ तोड़ने के लिए पुलिस ने गैंगस्टर का शिकंजा कसा है। इस मामले में दो सगे भाई भी शामिल हैं।
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10 मई 2026 को जिला कृषि अधिकारी रामकुमार यादव ने चेकिंग अभियान के दौरान तीन संदिग्ध ट्रकों को रोका था। जांच पड़ताल करने पर ट्रकों में अवैध रूप से लदी 1575 बोरी सरकारी यूरिया बरामद हुई थी। पूछताछ और प्रपत्रों की जांच में स्पष्ट हुआ कि सरकारी सब्सिडी वाली इस यूरिया को किसानों तक पहुंचाने के बजाय अवैध रूप से दूसरे जिलों में खपाने की तैयारी थी। इस मामले में थाना अनूपशहर पर आवश्यक वस्तु अधिनियम व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
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विवेचना के दौरान सामने आया कि गिरोह का सरगना पूर्व जिला प्रबंधक पीसीएफ दिव्यांशु वर्मा है, जिसने अपने पद का दुरुपयोग कर यह संगठित सिंडिकेट खड़ा किया था। इस मामले में कुछ आरोपियों पर रासुका के तहत भी कार्रवाई की थी।
वहीं अब पुलिस की ओर से तैयार किए गए गैंग चार्ट के अनुसार, गिरोह के सदस्यों में भंडारनायक रमेंद्र उर्फ गुड्डू निवासी बिजनौर, असलम निवासी रामपुर, शेरअली निवासी बदायूं, श्योपाल निवासी संभल, पीसीएफ भंडारनायक हरेन्द्र पाल सिंह खुर्जा, हरेन्द्र का भाई सहायक लेखाकार यश राघव खुर्जा, मो. हारून रामपुर, सलीम खां उर्फ हब्बी उस्ताद रामपुर और मो. दिलशाद निवासी बदायूं शामिल हैं।
विवेचना में खुलासा हुआ कि यह सिंडिकेट लंबे समय से सक्रिय था। पीसीएफ के गोदामों से सरकारी खाद की बोरियों को फर्जी बिलों और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे बाहर निकाला जाता था और फिर बदायूं, रामपुर, संभल समेत अन्य सीमावर्ती जनपदों में निजी व्यापारियों को महंगे दामों पर बेच दिया जाता था।
इस अवैध धंधे से आरोपियों ने करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति अर्जित की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संगठित अपराध और माफिया तंत्र पर नकेल कसने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है। गैंगस्टर एक्ट लगने के बाद अब पुलिस धारा 14(1) के तहत आरोपियों द्वारा अपराध से कमाई गई संपत्तियों का ब्योरा जुटा रही है, जिसे जल्द ही कुर्क किया जाएगा।
कोट..
सरकारी खाद की कालाबाजारी कर किसानों के हक पर डाका डालने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पीसीएफ के तत्कालीन जिला प्रबंधक समेत सभी दस आरोपियों को गैंगस्टर एक्ट में निरुद्ध कर दिया गया है। पुलिस निष्पक्ष और ठोस पैरवी कर आरोपियों को कड़ी सजा दिलाएगी। - अंतरिक्ष जैन,
प्रभारी एसएसपी